रात्रि 08.00 बजे बाद शराब की दुकानों पर बिक्री पर आचार संहिता और जिला प्रशासन का कोई असर नहीं, गुप्त स्थानों पर शराब का भाण्डारण शुरू

*चुनाव के दिनों और गणतंत्र दिवस के दिन ड्राई-डे को देखते हुए संबंधित दुकानदारों ने अपनी क्षमता व मांग के अनुसार शराब का भण्डारण शुरू कर लिया है और गुप्त स्थानों पर देसी व अंग्रेजी शराब रखनी शुरू कर दी है ताकि मांग के अनुसार उसकी पूर्ति की जा सके और आखिरी समय में कोई परेशानी ना हो, यह हाल तो शहरों का है और गांवों की स्थिति तो इससे भी ज्यादा विकट है, निष्पक्ष चुनाव के लिए चुनाव आयोग कितने भी मार्गदर्शन और आचार संहिताएं लगाए परन्तु बिना शराब शायद ही कभी कोई चुनाव हुआ हो जिसमें शराब ना बँटी हो, ऐसे में चुनाव आयोग के चुनाव आॅब्ज़र्वर महोदय व जिला प्रशासन की बहुत बड़ी जिम्मेदारी हो जाती है कि वे कानून की पालना कराएं, क्यों कि जब सरकार ही चुनाव लड़ रही हो तो निर्वाचन अधिकारी के कन्धों पर सारा भार आ जाता है और उसे अपने दायित्वों का निर्वहन करने में बहुत परेशानियों का सामना करना पड़ता है क्यों कि ‘‘वहीं सास की खाट और वहीं बहू का पीसना‘‘, चुनाव तो दिनांक 29.01.18 को खत्म हो जाएंगे, फिर रहना तो अजमेर में सरकार की मर्जी से ही पड़ेगा, ऐसे में बहुत फूंक-फूंक कर कदम रखने पड़ते हैं* क्यों कि पुलिस तो कभी भी पार्टी बनती ही नहीं है, सदा बच्चू भाई के तांगे में बैठ जाती है और कभी अपने ऊपर जिम्मेदारी नहीं लेती है – *यह कह कर कि शराब के दुकानदारों पर, शराब बिक्री रोकने पर हमें कोई कानूनी अधिकार नहीं है, सरकार ने एक सर्कूलर जारी कर रखा है कि आप तो सिर्फ पैसे खाओ, बाकी काम दूसरे विभाग करेंगे, इसके तहत हम लोग कर्तव्यपरायण हैं और किसी तरह का कोई भी जोखिम लेने को तैयार नहीं हैं, अगर आप हमसे काम कराना चाहते हो तो सरकार से नियमों में संशोधन करवा लाओ और हमें पाॅवर दिलवाओ कि पुलिस भी शराब की दुकानों पर केस बना सकती है नहीं तो *‘‘माल खाए मदारी और मार खाए बन्दर‘‘ वाली कहानी चरितार्थ होती है।*
*चुनाव की निष्पक्षता और आचार संहिता पर प्रश्न चिन्ह ना लगे इसलिए निर्वाचन विभाग, चुनाव आयोग, जिला प्रशासन, केन्द्री चुनाव आॅब्ज़र्वर को समय रहते कार्यवाही करनी चाहिए, ताकि निष्पक्ष चुनाव हो सकें, न्यायहित में और जनहित में।*
राजेश टंडन अजमेर