क्या भाजपा करेगी अजमेर उत्तर में गैर सिंधी का प्रयोग?

प्रो. वासुदेव देवनानी
हाल ही हुए लोकसभा उपचुनाव में भाजपा की करारी हार के बाद शिक्षा राज्य मंत्री प्रो. वासुदेव देवनानी के आगामी विधानसभा चुनाव में टिकट पर संशय के बादल मंडरा रहे हैं। हालांकि समझा यही जाता है कि देवनानी इतने चतुर हैं कि आखिर तक अपना कब्जा नहीं छोड़ेंगे, मगर उनका टिकट कटने की उम्मीद में कुछ गैर सिंधी नेता दावा कर सकते हैं। इनमें सबसे पहला नाम है अजमेर विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष शिव शंकर हेड़ा का। उन्होंने काफी समय से इसका ताना बाना बुनना शुरू कर दिया था। अगर सिद्धांतत: भाजपा गैर सिंधी का प्रयोग करती ही तो संभव है आखिर में खुद देवनानी अपने सबसे करीबी अजमेर नगर निगम के मेयर धर्मेन्द्र गहलोत पर हाथ रख दें। यूं मसूदा विधायक श्रीमती सुशील कंवर पलाड़ा के पति युवा नेता भंवर सिंह पलाड़ा भी दमदार दावेदारी ठोक सकते हैं। अगर गैर सिंधी पर विचार की तनिक भी स्थिति बनी तो फेहरिश्त लंबी हो सकती है। अब तक देहात की राजनीति करने वाले प्रो. बी. पी. सारस्वत भी पीछे नहीं रहने वाले। गाहे-बगाहे संघ के महानगर प्रमुख सुनील दत्त जैन का भी नाम उछलता रहा है।
अगर देवनानी का टिकट कटने की नौबत आई और सिंधी को ही टिकट देने का मानस रहा तो सबसे प्रबल दावेदार कंवल प्रकाश किशनानी ही होंगे। यह सीट चूंकि संघ के खाते की है, इस कारण उन्हें वहां से हरी झंडी हासिल करनी होगी। हालांकि संघ की कार्यशैली ऐसी रही है कि वह अचानक ऐसा नाम सामने ले आता है, जिसे कोई जानता तक नहीं, मगर बदले राजनीतिक हालात में चेहरे की लोकप्रियता का भी ध्यान रख सकता है।

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