पर्रीकर पंचतत्व में विलीन

पणजी (गोवा)। चार बार गोवा के मुख्यमंत्री और देश के रक्षा मंत्री की जिम्मेदारी निभा चुके भाजपा नेता मनोहर पर्रीकर का पार्थिव शरीर पूरे राजकीय सम्मान के साथ सोमवार शाम पंचतत्व में विलीन हो गया। पर्रीकर के ज्येष्ठ पुत्र उत्पल ने उन्हें मुखाग्नि दी। कैंसर की बीमारी से ग्रस्त रहे पर्रीकर का रविवार शाम डोना पावला स्थित उनके घर पर ही निधन हो गया था।
गोवा मुक्ति के बाद यहां के सबसे लोकप्रिय मुख्यमंत्री रहे मनोहर पर्रीकर को गंवाने का गम सोमवार को गोवावासियों में स्पष्ट दिखाई दिया। देश के सबसे लोकप्रिय पर्यटन केंद्र गोवा का दृश्य सोमवार को अघोषित बंद जैसा रहा। लोगों ने अपनी दुकानें और कामकाज बंद रखे। लोग सुबह से ही आत्माराम बोरकर मार्ग स्थित प्रदेश भाजपा कार्यालय के बाहर पर्रीकर के अंतिम दर्शन के लिए इकट्ठा होना शुरू हो गए थे। सेना के वाहन से पार्थिक शरीर 10.19 मिनट पर वहां पहुंचा तो बहुत से लोग फूट-फूटकर रोते हुए दिखाई दिए।
महिलाएं भाई गेला-भाई गेला (भाई चला गया) कहकर फूट-फूटकर रोती दिखाई दीं। दर्शन के लिए कतार में खड़े लोग लगातार मनोहर भाई अमर रहें और वंदे मातरम् के नारे लगा रहे थे। दर्शन करने आए लोगों में युवा वर्ग बड़ी संख्या में नजर आया।भाजपा कार्यालय पर करीब दो घंटे पार्थिव शरीर रखने के बाद गोवा कला अकादमी परिसर ले जाया गया। कला अकादमी में पार्थिव शरीर आम जनता के दर्शनार्थ शाम तक रखा गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण, वस्त्रोद्योग मंत्री स्मृति ईरानी और गोवा की राज्यपाल मृदुला सिन्हा ने कला अकादमी जाकर ही पर्रीकर को श्रद्धासुमन अर्पित किए।
प्रधानमंत्री मोदी ने वहां मौजूद पर्रीकर के दोनों पुत्रों उत्पल और अभिजात को ढांढस बंधाया। भाजपा अध्यक्ष अमित शाह, सड़क एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी, केंद्रीय मंत्री सुरेश प्रभु, रामदास अठावले, और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़नवीस ने भी पर्रीकर को श्रद्धांजलि अर्पित की। अंतिम दर्शन के लिए आने वालों में गोवा में भाजपा के सहयोगी और विरोधी दलों के नेताओं के अलावा सभी धमरें और वगरें के लोग आते देखे गए।
कला अकादमी के बाहर दर्शनार्थियों की लंबी कतार अंतिम यात्रा शुरू होने तक लगी रही। शाम करीब पांच बजे राजकीय सम्मान के साथ अंतिम यात्रा मीरामार स्थित एसएजी मैदान के लिए रवाना हुई। सूर्यास्त से कुछ पहले ही पूर्ण राजकीय सम्मान एवं वैदिक मंत्रोच्चार के बीच उनका अंतिम संस्कार कर दिया गया।

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