अन्याय पर न्याय, कटुता पर मधुरता, झूठ फरेब पर सद्दभावना और मजबूत इच्छा शक्ति की जीत का पर्व होली Part B

होली के जलते हुए कोयलों पर गेहूँ की बालियों को भुन कर नई फसल के लिये परमात्मा को धन्यवाद देते हुये पापड़ खीचें भी भुन कर खाते हैं | नई फसल के आजाने से किसानों सहित जनमानस के चहेरे पर खुशी और उल्लास लाती है
होली के पर्व का सामाजिक पहलू भी है क्योंकि होली परिवार, आस-पडोस,समाज, विभिन्न समुदाय और वर्ग को स्नेह-सोहार्द के अटूट बंधन में बांधता है और उनके बीच में पनपे अविश्वास, शंका, विवादों को मिटाकर पारस्परिक रिस्तों को फेवीकोल के जोड़ जैसा मजबूत बनाता है ।
निसंदेह झू फरेफ़, ईर्ष्या, लालच और मदान्धताका दानव आज भी हमारे वह आपके अंतस्थल में जिंदा है | इन सभी बुराईयों को हमेशां के लिए नष्ट करने के लिए सर्वप्रथम हमें खुद सच्चाई, सोहार्द, स्नेह के सन्मार्ग पर चल कर अपने बच्चों तथा युवाओं के सामने एक आदर्श प्रस्तुत करना होगा तथा अपने बच्चोंमें अच्छी शिक्षा, अच्छे संस्कारों को प्रतिस्थापित करना होगा |
तो क्या हम और आप अपने अंतर्मन और सच्चे दिल से तैयार हैं इस होलिका दहन पर अपनी बुराईयों को जला डालने का संकल्प लेने के लिए? यह सही है कि ऐसा हमआप ऐसा एक दिन में नहीं कर सकते हैं, परन्तु ऐसे पवित्र संकल्प को धारण करना भी महत्वपूर्णहोगा, हो सकता है हम अपने लक्ष्य की प्राप्ति में शत-प्रतिशत सफल नहीं हो पाएं और हमें शीघ्र सफलता भी नहीं मिले किन्तु हम सभी को सतत प्रयास तो करना ही होगा |
Dr. J. K.Garg,
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