नई दिल्ली। आम चुनाव में एक साल से भी कम वक्त रह गया है, ऐसे में कांग्रेस के अगले प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार के नाम की भी चर्चा शुरू हो गई है। लंदन से प्रकाशित मशहूर पत्रिका द इकोनमिस्ट ने कांग्रेस के युवराज राहुल गांधी नहीं बल्कि पी चिदंबरम को संभावित उम्मीदवार माना है।
पत्रिका के मुताबिक कांग्रेस के संकटमोचक प्रणब मुखर्जी के राष्ट्रपति बनने के बाद अब यह दायित्व चिदंबरम निभा रहे हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि पिछले साल अगस्त जब से चिंदबरम वित्त मंत्रालय लौटे हैं तब से उनकी किस्मत चमक गई है।
पत्रिका ने दो बड़े राजनीतिक घटनाक्रम का जिक्र करते हुए कहा कि जब ममता बनर्जी ने एफडीआई के मुद्दे पर सरकार से समर्थन वापस लिया तब से चिदंबरम ने सहयोगी डीएमके समेत विरोधियों को भी इस मुद्दे पर अपने पक्ष में लाने में कामयाब रहे।
दूसरा पिछले महीने 27 नवंबर को वित्त मंत्री ने कैश सब्सिडी योजना का एलान किया। जानकारों का मानना है कि यह योजना 2014 के आम चुनाव में कांग्रेस के लिए ‘गेम चेंजर’ साबित हो सकता है। हालांकि ये योजना भाजपा की पूर्ववर्ती सरकार की सोच थी लेकिन इसे चिदंबरम ने लागू किया।
पत्रिका का ये भी मानना है कि पिछले दिनों चिदंबरम ने जिस तरह आधार कार्ड का समर्थन किया है वह भी उनके हक में जाता है। पहले उन्होंने इसका विरोध किया था।
पत्रिका ने कहा है कि पिछले दिनों कैश सब्सिडी योजना के एलान के समय चिदंबरम का हिंदी में भाषण देना उत्तर भारत में अपनी स्वीकार्यता बढ़ाने का एक प्रयास था।
पत्रिका का मानना है कि इस वक्त चिदंबरम सरकार में सबसे ताकतवर मंत्री हैं। क्योंकि उनके वरिष्ठ साथी प्रणब मुखर्जी राष्ट्रपति बन चुके हैं और कांग्रेस के युवराज राहुल गांधी फिलहाल बड़ी जिम्मेदारी उठाने को तैयार नहीं हैं। ऐसे में चिदंबरम प्रधानमंत्री पद के प्रबल दावेदार माने जा रहे हैं।
कांग्रेस प्रवक्ता राशिद अल्वी ने कहा कि वह इस विषय पर टिप्पणी नहीं करेंगे। उन्होंने कहा कि कांग्रेस आम चुनाव के लिए पूरी तरह से तैयार है। अगली बार भी सरकार हमारी बनेगी और कांग्रेस के सांसदों की रजामंदी के बाद हाईकमान इस पर फैसला लेगा।
