डेटॉल बनेगा स्वस्थ इंडिया कर रहा है रीच ईच चाइल्ड प्रोग्राम के जरिए मां और बच्चे की पोषण संबंधी जरूरतें पूरी

नई दिल्ली, 29 मई 2022: डेटॉल बनेगा स्वस्थ भारत की पोषण पहल के दो वर्षों के सफलतापूर्वक पूरा होने बाद, रीच ईच चाइल्ड प्रोग्राम ने समाज पर काफी सकारात्मक असर डाला है। इस योजना का लक्ष्य अमरावती और नंदुरबार जिलों में कुपोषण के कारण होने वाली बच्चों की मौत को शून्य पर लाना है और हजारों लोगों की जान बचाना है। लगातार किए जा रहे प्रयासों और जमीनी स्तर पर किए जा रहे कार्यों के माध्यम से, यह कार्यक्रम आज पांच साल से कम उम्र के हजारों बच्चों की मदद कर रहा है। इस काम में मदद के लिए कम्युनिटी न्यूट्रिशन वर्कर्स के नाम से फ्रंटलाइन कार्यकर्ताओं का एक कैडर तैयार किया है।
कुपोषण के खिलाफ अपनी लड़ाई में देश की मदद करने के उद्देश्य से, रेकिट और प्लान इंडिया मिलकर बेहतर पोषण में निवेश करते हुए भारत में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य मानकों में सुधार की दिशा में लगातार काम कर रहे हैं। जमीन पर अपने निरंतर प्रयासों के साथ, यह कार्यक्रम प्रत्येक रुपये के निवेश पर 37 रुपये के सामाजिक मूल्य का उत्पादन करने में सक्षम है। 2021 में शुरू किया गया रीच ईच चाइल्ड पहल का तीसरा चरण, माँ और बच्चे के जीवन के पहले 1000 दिनों के दौरान मदद और देखभाल प्रदान करता है। रीच ईच चाइल्ड प्रोग्राम स्थानीय स्तर पर पहल के माध्यम से 5 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए पर्याप्त पोषण को प्राथमिकता देता है। इस पूरी प्रक्रिया में कम्युनिटी न्यूट्रिशन वर्कर सूचना और सेवाओं के प्रमुख आपूर्तिकर्ता हैं। कार्यक्रम ने पिछले दो वर्षों में अमरावती और नंदुरबार जिलों के परिवारों पर बड़ा प्रभाव डाला है। इस कार्यक्रम का उद्देश्य भारत के अन्य पिछड़े जिलों में भी अपने प्रयासों को विस्तार देना है, जिससे नई माताओं को भी इसका लाभ मिल सके।

अपनी शुरुआत से लेकर अब तक के पूरे सफर में कार्यक्रम के मार्गदर्शक सिद्धांत पोषण के लिए एक जीवनचक्र दृष्टिकोण अपनाना; लिंग संवेदनशीलता और समावेशिता; सामुदायिक स्वामित्व और प्रारंभिक रोकथाम रहे हैं। इस पहल की शुरुआत -5 वर्ष से कम आयु के अविकसित बच्चों की संख्या को 40% तक कम करने और बहुक्षेत्रीय और बहु-आयामी दृष्टिकोण के साथ बच्चों के कुपोषण को <5% तक कम करने के लिए की गई है। विश्व पोषण दिवस पर बोलते हुए, श्री रवि भटनागर, डायरेक्टर, एक्सटर्नल अफेयर्स एवं पार्टनरशिप, SOA, रेकिट,ने कहा, "रेकिट में हमारे उद्देश्य के केंद्र में अच्छा स्वास्थ्य और भलाई रहती है, और अपनी पहल के माध्यम से, हम सुरक्षा, उपचार और एक स्वच्छ एवं स्वस्थ दुनिया के लिए काम करते हैं। हमें यह घोषणा करते हुए खुशी हो रही है कि नंदुरबार और अमरावती में 'रीच ईच चाइल्ड' कार्यक्रम के तहत हमारे पायलट प्रयास ने बच्चों में कुपोषण से होने वाली मौतों की शून्य स्थिति प्राप्त करने में मदद की है और अस्पताल में प्रसव चुनने वाली महिलाओं के अनुपात में 26 प्रतिशत तक की वृद्धि की है। रीच ईच चाइल्ड के साथ हमारा उद्देश्य 2024तक 1करोड़ नई माताओं के जीवन में बदलाव लाना है।” साझेदारी के संबंध में बात करते हुए प्लान इंडिया के कार्यकारी निदेशक श्री मो.आसिफ ने कहा, "रीच ईच चाइल्ड प्रोग्राम के लिए रेकिट के साथ हमारी साझेदारी ने हमें लोगों के जीवन में, विशेष रूप से बच्चों और माताओं के जीवन में एक महत्वपूर्ण बदलाव लाने में मदद की है। प्लान इंडिया में, हम सभी इस कार्यक्रम का हिस्सा बनकर बेहद गौरवान्वित और प्रसन्न हैं। विश्व पोषण दिवस के अवसर पर हम माताओं और बच्चों का ख्याल रखने वालों के ज्ञान, कौशल और आत्मविश्वास को बढ़ाने पर अपना ध्यान केंद्रित कर रहे हैं। जिससे वे अभिनव व्यवहार परिवर्तन संचार और सामुदायिक गतिविधियों के माध्यम से स्वस्थ गर्भधारण और बच्चे की अच्छी सेहत का ख्याल रख सकें।" दुनिया भर के कुपोषण के मामलों में भारत की हिस्सेदारी करीब एक तिहाई है। भारत में अविकसित बच्चों की संख्या 46.6 मिलियन है,वहीं दक्षिण एशिया में सबसे अधिक कुपोषित बच्चे भारत में हैं। यूनिसेफ के एक शोध के अनुसार, भारत में महामारी के बाद कुपोषण में 10% का इजाफा होने की संभावना है। भारत की जनसंख्या के आकार को देखते हुए, सभी प्रकार के कुपोषण को कम करने के लिए प्रयासों में निवेश करना वैश्विक लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, क्योंकि सतत विकास लक्ष्यों (एसडीजी) को प्राप्त करने में पोषण सबसे अहम स्थान रखता है। कोविड-19 महामारी की पहली और दूसरी लहर में महाराष्ट्र सबसे बुरी तरह प्रभावित हुआ था। नंदुरबार जिले में दूसरी लहर में पॉजिटिविटी रेट सबसे अधिक थी। राज्य भर में 'रीच ईच चाइल्ड' कार्यक्रम के तहत डेटॉल बीएसआई के प्रयासों ने एनआरसी और स्वास्थ्य केंद्रों को नवीनीकृत करके गर्भावस्था से पहले, गर्भावस्था के दौरान और गर्भावस्था बाद माताओं और गंभीर रूप से कुपोषित बच्चों की देखभाल में सुधार करने में महाराष्ट्र सरकार की मदद की। कार्यक्रम ने सुनिश्चित किया कि माताओं को आवश्यक प्रयासों जैसे अच्छे पोषण की आदत, सभी को फूड फोर्टिफिकेशन के माध्यम से सूक्ष्म पोषक तत्व प्रदान करना, विशेष खाद्य पदार्थों के साथ कुपोषित बच्चों की थेरेपेटिक फीडिंग, छोटे बच्चों और माताओं द्वारा विटामिन, खनिजों की खपत बढ़ाना, सशर्त-नकद-स्थानांतरण के प्राध्यम से प्रोत्साहन के माध्यम से बेहतर लाभ प्राप्त हो। नीति आयोग द्वारा समर्थित, रीच ईच चाइल्ड कार्यक्रम को भारत में कुपोषण से लड़ने के लिए पिछड़े जिलों में सर्वोत्तम प्रयासों के रूप में चित्रित किया गया है। यात्रा में एक कदम और आगे बढ़ाते हुए, रीच ईच चाइल्ड ने अमरावती और नंदुरबार के सभी गांवों के जिला परिषद कार्यालयों में तख्ती स्थापित करने की योजना बनाई है, जहां कुपोषण के कारण शून्य मौतें हुई हैं। उत्सव के तहत, कम्युनिटी न्यूट्रिशन वर्कर हाथ धोने की चरण दर चरण प्रक्रिया और लाभों को भी प्रदर्शित करेंगे और हमारे जीवन में स्वास्थ्य, स्वच्छता और पोषण के महत्व पर पैनल चर्चा करेंगे। एनआरसी के पोषण विशेषज्ञ रीच ईच चाइल्ड प्रोग्राम के स्वयंसेवकों द्वारा पूरे दिन विभिन्न अन्य आकर्षक और शैक्षिक गतिविधियों के साथ-साथ स्थानीय उत्पादों का उपयोग करके स्वस्थ व्यंजनों का प्रदर्शन करेंगे। साथ ही, पहल के हिस्से के रूप में "रीच ईच चाइल्ड" वाउचर योजना शुरू की जाएगी, जिससे कुपोषित सैकड़ों बच्चे लाभान्वित होंगे। कुपोषण को समाप्त करने और 2030 तक संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्यों को पूरा करने के उद्देश्य से भारत सरकार के "राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन" के अनुरूप, रेकिट ने जागरूकता फैलाने और कुपोषण के खिलाफ लड़ाई में हर बच्चे तक पहुंचने के लिए अपने पार्टनर प्लान इंडिया के साथ 'रीच ईच चाइल्ड' पहल विकसित की है।

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