सोनपुर मेला में सामयिक परिवेश द्वारा आयोजित कवि-सम्मेलन

डाक्टर रेणु शर्मा की कविता संग्रह मुक्त मन का लोकार्पण

सोनपुर ।आओ अंधेरों की बस्ती में प्रकाश की बात करें, नफरत की दुनिया छोड़कर प्यार की बात करें।
उपरोक्त पंक्तियाँ औरंगाबाद से आये जाने-माने वरीय कवि एवं कथाकार अरविन्द अकेला ने विश्व प्रसिद्ध सोनपुर मेला में बिहार की लोकप्रिय साहित्यिक संस्था सामयिक परिवेश द्वारा आयोजित कवि-
सम्मेलन में कविता पाठ करते हुए कही। कवि अकेला ने अपनी हास्य-व्यंग्य कविताओं के माध्यम से खूब तालियाँ बटोरी।
सामयिक परिवेश की अध्यक्षा एवं वरीय कवियत्री ममता मेहरोत्रा के कुशल संयोजन एवं छपरा से पधारे उद्घोषक संजय भारद्वाज के कुशल संचालन में आयोजित कवि सम्मेलन में चर्चित शायर कासिम खुर्शीद
(पटना) ने अपने गजल की इन पंक्तियों-
“तुम्हारी याद में खोता नहीं हूँ
मगर मैं रातभर सोता नहीं हूँ
कहीं मुझमें सफर रहता है जारी
मगर मैं रातभर सोता नहीं हूँ।”
सुनाकर श्रोताओं का दिल जीत लिया।
एक तरफ कवयित्री अनीता मिश्रा सिद्धि की भोजपुरी कविता की यह पंक्तियाँ “नइहर के रहिया भुलवल हो बाबा,काहे भेज देला ससुराल हो,अबही त हम रही चिरैया,रो रो भइनी बेहाल हो ”
*सविता राज के गजल की यह पंक्तियाँ “होठों पर मुस्कान दिखानी पड़तीहै।पीर हृदय की रोज छिपानी पड़ती है।”लोगों को काफी अच्छी लगी।*

वहीं दूसरी ओर वरीय कवयित्री एवं सामयिक परिवेश की अध्यक्षा ममता मेहरोत्रा(पटना) की कविता की इन पंक्तियाँ ”
लाख जतन करने पड़ते हैं ,
इश्क की मंजिल पाने को
दिल हारा है,तब जीता है
मैंने एक दिवानो को” तालियों के बीच काफी सराही गयी।
वरीय साहित्यकार शिवनारायन
(पटना) ने अपनी गजल की इन पंक्तियों-
“उपर-उपर क्या पढ़ लोगे
जीवन यह अखबार नहीं है।” को सुनाकर श्रोतागण का मन मोह लिया वहीं दुसरी तरफ युवा कवि समीर परिमल ने अपनी कविता की इन पंक्तियों-
” इश्कवाले हैं प्यार वाले हैं,
हम खिजा में बहारवाले हैं
मुस्कुराकर जो देखिए हमको
जान दे दें हम बिहार वाले हैं।”
को सुनाकर लोंगो पर अपनी अमिट छाप छोड़ी।
मुंगेर से पधारे चर्चित कवि अनिरूद्ध सिन्हा की कविता की यह पंक्तिया ” मेरे जज्बात मेरे नाम बिके, उनके इमान सरेआम बिके” तालियों के बीच सराही गयी जबकि राँची से पधारे वरीय शायर दिलशाद नजमी के गजल की इन पंक्तियों-
“हम मोहब्बत के नहीं सबसे अदा होते हैं,
मतलबी लोग तो मिलते हैं जुदा होते हैं “।
को तालियों के बीच सराही गयी।
वरीय कवयित्री रूबी भूषण की गजल क इन पंक्तियों –
“साथ उसका रहा दिल्लगी की तरह,
जिन्दगी कब रही जिन्दगी की तरह” ने लोंगो का दिल जीत लिया।
वरीय कवि अशोक कुमार सिन्हा की कविता की इन पंक्तियों-“मत गाओ वह गीत की नयन पुन:भर जाये,सुधा पाण्डेय की यह पंक्ति “ए चाँद गुरूर न कर” एवं प्रतिभा रानी की यह पंक्तियाँ –
“पुरूष हो प्रकृति का सम्मान करो
नहीं अपने पुरुषत्व पर अभिमान करो” लोंगो के दिल पर अपनी अमिट छाप छोड़ने में काफी सफल रही।
कवि सम्मेलन के पश्चात हाजीपुर से पधारी कवयित्री डा.रेणु शर्मा के काव्य संग्रह मुक्त मन का लोकार्पण किया गया एवं सभी कवियों को अंगवस्त्र से सम्मानित किया गया।

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