नई दिल्ली। भारतीय रंगमंच, साहित्य और सांस्कृतिक अभिव्यक्ति के क्षेत्र में अपने उल्लेखनीय एवं बहुआयामी योगदान के लिए प्रख्यात नाटककार, कवयित्री, लेखिका, निर्देशिका, अभिनेत्री एवं प्रसारणकर्ता काजल सूरी को प्रतिष्ठित ‘कला साधिका पुरस्कार’ से सम्मानित किया गया।यह सम्मान नई दिल्ली स्थित राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय (एनएसडी) के सम्मुख सभागार में आयोजित “भारत की विविध सांस्कृतिक अभिव्यक्तियों का राष्ट्रीय उत्सव” विविधा के दौरान प्रदान किया गया। इस राष्ट्रीय सांस्कृतिक आयोजन का आयोजन संस्था
कला मंडली द्वारा भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय (Ministry of Culture) के सहयोग से किया गया।
यह पुरस्कार काजल सूरी के रंगमंच, साहित्य, संस्कृति और प्रसारण के क्षेत्र में वर्षों से किए जा रहे समर्पित, रचनात्मक और प्रेरणादायी कार्यों की स्वीकृति एवं सम्मान का प्रतीक है। उन्होंने अपने लेखन, नाट्य निर्देशन, अभिनय, काव्य-सृजन तथा प्रसारण के माध्यम से भारतीय संस्कृति, सामाजिक सरोकारों और मानवीय मूल्यों को सशक्त अभिव्यक्ति प्रदान की है। उनकी रचनात्मक यात्रा ने अनेक युवा कलाकारों, लेखकों और रंगकर्मियों को प्रेरित किया है।
काजल सूरी के लिखे अब तक 15 नाटक प्रकाशित हो चुके हैं !
समारोह में देश के विभिन्न राज्यों से आए प्रतिष्ठित साहित्यकारों, कलाकारों, रंगकर्मियों, शिक्षाविदों एवं सांस्कृतिक हस्तियों की गरिमामयी उपस्थिति रही। कार्यक्रम के दौरान भारत की विविध लोक एवं शास्त्रीय कला परंपराओं, संगीत, नृत्य, नाटक और साहित्यिक प्रस्तुतियों के माध्यम से देश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का भव्य प्रदर्शन किया गया।
‘कला मंडली” की संस्थापक अध्यक्ष एवं देश की जानी-मानी कथक नृत्यांगना प्रतिभा सिंह के नेतृत्व में आयोजित इस राष्ट्रीय उत्सव का उद्देश्य भारत की विविध सांस्कृतिक परंपराओं, लोक एवं शास्त्रीय कलाओं तथा साहित्यिक अभिव्यक्तियों को एक साझा मंच प्रदान करना था। प्रतिभा सिंह पिछले कई वर्षों से भारतीय शास्त्रीय नृत्य, सांस्कृतिक संरक्षण और महिला कलाकारों के सशक्तिकरण के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य कर रही हैं। उनके मार्गदर्शन में ‘विविधा’ देशभर के कलाकारों, साहित्यकारों और रंगकर्मियों को जोड़ते हुए राष्ट्रीय स्तर पर अनेक सांस्कृतिक आयोजनों का सफलतापूर्वक संचालन करती रही है।
पुरस्कार ग्रहण करने के पश्चात काजल सूरी ने आयोजक संस्था ‘कला मंडली’, संस्कृति मंत्रालय तथा सभी अतिथियों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह सम्मान उन्हें कला और साहित्य के क्षेत्र में और अधिक समर्पण एवं सृजनशीलता के साथ कार्य करने की प्रेरणा देगा। उन्होंने कहा कि कला समाज को जोड़ने, संवाद स्थापित करने और सांस्कृतिक विरासत को आने वाली पीढ़ियों तक पहुँचाने का सबसे सशक्त माध्यम है।
इस अवसर पर प्रतिभा सिंह ने कहा कि काजल सूरी को यह सम्मान रंगमंच, साहित्य, काव्य, निर्देशन, अभिनय और प्रसारण के क्षेत्र में उनके दीर्घकालिक एवं विशिष्ट योगदान के लिए प्रदान किया गया। उन्होंने अपनी रचनात्मक यात्रा के माध्यम से सामाजिक सरोकारों, भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों और मानवीय संवेदनाओं को प्रभावशाली अभिव्यक्ति दी है। उनके नाटक, लेखन और मंचीय प्रस्तुतियाँ देशभर में सराही गई हैं तथा उन्होंने अनेक युवा कलाकारों को प्रेरित किया है।
समारोह में देश के विभिन्न राज्यों से आए साहित्यकारों, रंगकर्मियों, कलाकारों, शिक्षाविदों एवं सांस्कृतिक जगत की अनेक प्रतिष्ठित हस्तियों ने सहभागिता की। इस अवसर पर भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को समर्पित संगीत, नृत्य, नाट्य एवं साहित्यिक प्रस्तुतियों ने कार्यक्रम को विशेष गरिमा प्रदान की। ने कहा कि ‘कला साधिका पुरस्कार’ उन सृजनशील महिलाओं को समर्पित है, जिन्होंने अपने कार्यों से भारतीय कला, साहित्य और संस्कृति को नई ऊँचाइयाँ प्रदान की हैं। उन्होंने कहा कि काजल सूरी का बहुआयामी योगदान उन्हें इस सम्मान का एक अत्यंत योग्य और प्रेरणादायी व्यक्तित्व बनाता है।
यह सम्मान भारतीय रंगमंच, साहित्य और सांस्कृतिक जगत में काजल सूरी की विशिष्ट पहचान और उनके निरंतर रचनात्मक योगदान का महत्वपूर्ण राष्ट्रीय सम्मान माना जा रहा है।