डब्लूयूडी के पांचवे दीक्षांत समारोह में सात डॉक्टरेट डिग्रियां प्रदान कर शोध के क्षेत्र में महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की गई

दिल्ली, जुलाई 2026- रचनात्मक विषयों में शिक्षा के लिए विशेष रूप से समर्पित भारत की पहली युनिवर्सिटी- दि वर्ल्ड युनिवर्सिटी ऑफ डिजाइन (डब्लूयूडी) ने सोनीपत में राजीव गांधी एजुकेशन सिटी में अपने कैंपस में आज हुए पांचवे दीक्षांत समारोह में स्नातक, स्नातकोत्तर और डॉक्टरेट की डिग्रियां प्रदान की।

इस दीक्षांत समारोह में युनिवर्सिटी के प्रबंधन बोर्ड, अकादमिक परिषद, परामर्श बोर्ड के सदस्यों, शिक्षकों, छात्रों-छात्राओं के माता पिता और गणमान्य अतिथियों के बीच मुख्य अतिथि के तौर पर प्रख्यात डिजाइनर, उद्यमी और रचनात्मक क्षेत्र की अग्रणी सुश्री रसील गुजराल अंसल मौजूद रहीं।

इस दीक्षांत समारोह ने युनिवर्सिटी की अकादमिक यात्रा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की जिसमें सात डॉक्टोरल डिग्रियां प्रदान की गईं। इनमें वे तीन छात्र भी शामिल रहे जिन्होंने डब्लूयूडी के डॉक्टोरल प्रोग्राम के तहत अपना डॉक्टोरल अनुसंधान पूरा किया। यह उपलब्धि डिजाइन एवं रचनात्मक विषयों में अनुसंधान की बढ़ती परिपक्वता को परिलक्षित करती है। भारत में इस क्षेत्र को वह अकादमिक ध्यान मिलना अभी शुरू ही हुआ है जिसका यह हकदार है।

इस युनिवर्सिटी की अकादमिक रिपोर्ट का विवरण पेश करते हुए वर्ल्ड युनिवर्सिटी ऑफ डिजाइन (डब्लूयूडी) के कुलपति डाक्टर संजय गुप्ता ने कहा कि रचनात्मक पेशे अपने इतिहास में सबसे बड़े बदलाव के दौर से गुजर रहे हैं। उन्होंने कहा, “भारत एक ऐसे दशक में प्रवेश कर रहा है जिसमें रचनात्मकता अपनी सबसे महान अर्थव्यवस्था और सांस्कृतिक मजबूतियों में से एक बन जाएगी। उद्योगों, जन सेवाओं और हर दिन की जिंदगी में डिजाइनर, कलाकार, आर्किटेक्ट्स, प्रस्तोता और रचनात्मक टेक्नोलॉजीज की भूमिका महत्वपूर्ण तेजी से महत्वपूर्ण होती जाएगी। डब्लूयूडी में हमारा प्रयास ऐसे स्नातक तैयार करना है जो ना केवल पेशेवर रूप में सफल हों, बल्कि कल्पना, जिम्मेदारी और उद्यमशीलता की भावना के साथ इस परिवर्तन का नेतृत्व करने में सक्षम हों।”

इस युनिवर्सिटी के अकादमिक उद्भव को रेखांकित करते हुए प्रोफेसर गुप्ता ने कहा कि डब्लूयूडी ने सोच समझकर खुद को रचनात्मकता, टेक्नोलॉजी, बिजनेस और रिसर्च के संगम पर स्थापित किया है। एआई के मुख्यधारा की बातचीत मे शामिल होने से काफी पहले इस युनिवर्सिटी ने एआई को अध्यापन, सीखने की प्रक्रियाओं के साथ एकीकृत करना शुरू कर दिया था जिससे विद्यार्थी, चिंतन, मौलिकता, सहानुभूति एवं निर्णय लेने की क्षमता जैसी अनूठी मानवीय क्षमताओं को मजबूत करते हुए रचनात्मक सहयोगियों के तौर पर उभऱती टेक्नोलॉजीज का उपयोग कर सकें।

स्नातक हो रहे विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि सुश्री रसील गुजराल अंसल ने विद्यार्थियों को आत्मविश्वास के साथ बदलाव को आत्मसात करने, भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और शिल्प कौशल से जुड़े रहने और टेक्नोलॉजी से तेजी से आकार ले रही दुनिया में अपनी स्वयं की असली एवं रचनात्मक आवाज पैदा करने के लिए प्रोत्साहित किया। उन्होंने कहा कि यद्यपि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस रचनात्मक कार्य करने का तरीका बदल सकता है, कल्पनाशीलता, मौलिकता, सहानुभूति और मानवीय निर्णय सफल रचनात्मक पेशेवरों की निर्णायक गुणवत्ता बने रहेंगे।

कुलपति ने इस बात पर जोर दिया कि डब्लूयूडी का बहु-विषयक दर्शन, भारतीय उच्च शिक्षा के क्षेत्र में इसे अलग पहचान दिलाता है। आर्किटेक्चर, डिजाइन, फैशन, विजुअल आर्ट्स, संचार, एनिमेशन एवं गेम डिजाइन, परफॉर्मिंग आर्ट्स, क्रिएटिव बिजनेस एवं उभरती टेक्नोलॉजी के प्रोग्राम के विद्यार्थी नियमित रूप से ऐसी परियोजनाओं पर गठबंधन करते हैं जो वैश्विक रचनामत्क अर्थव्यस्था की तेजी से बढ़ती अंतर-विषयी प्रकृति को दर्शाते हैं।

उन्होंने इस युनिवर्सिटी के बढ़ते अनुसंधान पारितंत्र, अंतरराष्ट्रीय गठबंधनों और उद्योग के साथ मजबूत जुड़ाव को भी रेखांकित किया। फैकल्टी और विद्यार्थियों ने भारत और विदेश में अग्रणी संस्थानों और संगठनों के साथ मिलकर हिस्सा लिया, जबकि विद्यार्थियों को लाइव इंडस्ट्री असाइनमेंट्स, इंटर्नशिप, प्रदर्शनियों, परफॉर्मेंस, प्रतियोगिताओं और समुदाय आधारित पहल के जरिए गहरा अनुभव मिला।

इस दीक्षांत समारोह में स्नातक, स्नातकोत्तर और डॉक्टोरल प्रोग्राम्स पूरे करने वाले विद्यार्थियों की उपलब्धियों का जश्न मनाया गया। स्नातक, स्नातकोत्तर और सात डॉक्टोरल डिग्रियों समेत 240 डिग्रियां प्रदान की गईं। इस युनिवर्सिटी ने चांसलर्स गोल्ड मेडल, 7 गोल्ड मेडल, 7 सिल्वर मेडल प्राप्त करने वाले असाधारण विद्यार्थियों को सम्मानित भी किया और साथ ही छात्रवृत्ति, नवप्रवर्तन और रचनात्मक अभ्यास में उत्कृष्टता के लिए अन्य शैक्षणिक सम्मान प्रदान किए।

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