इलाहाबाद। हादसा कैसे, कहां और कब हुआ, निश्चित तौर पर पुलिस-प्रशासन के अफसरों के साथ ही लोग भी यह जानना चाह रहे थे। रेलवे अस्पताल में घायलों को लाया गया तो पीछे-पीछे उनके परिजन व साथी भी पहुंचे। यह इस हादसे के चश्मदीद थे। इन्होंने जो बताया उसे सुनकर हर कोई दंग रह गया।
बांदा निवासिनी घायल लक्ष्मी देवी के नाती अजय कुमार द्विवेदी ने बताया कि वह अपनी नानी के साथ प्लेटफार्म नंबर चार पर घर जाने के लिए ट्रेन पर सवार होने के लिए मौजूद था। अचानक लाउडस्पीकर से आवाज आई कि बांदा की तरफ जाने वाली ट्रेन प्लेटफार्म नंबर छह पर आएगी। यह सुनते ही प्लेटफार्म चार पर मौजूद लोग प्लेटफार्म छह की तरफ भागे। इसी बीच अचानक ओवरब्रिज पर भगदड़ मच गई। लोग एक-दूसरे पर गिरने लगे। कई लोग ओवर ब्रिज की रेलिंग टूटने से सीधे नीचे चले गए।
कटनी बड़गांव निवासी ज्योति के चाचा पूरन ने बताया कि ट्रेन पर सवार होने के लिए वह परिजनों व गांव के लोगों के साथ प्लेटफार्म नंबर छह पर ओवरब्रिज से आ रहे थे। पुलिसकर्मी भीड़ को रोक रहे थे और जब भीड़ नहीं रुकी तो पुलिसकर्मियों ने लाठी चला दी, जिससे भगदड़ मच गई। वह तो बाल-बाल बच गया, लेकिन उसकी भतीजी ज्योति व भाभी सकुन बाई गंभीर रूप से घायल हो गई।
सोनीपत निवासी प्रवीण कुमार ने बताया कि उन्होंने ऐसा हादसा कभी नहीं देखा। प्लेटफार्म अचानक बदलने के कारण भीड़ जब दौड़ी तो पुलिसकर्मियों ने लाठी चला दी, जिससे भगदड़ मची और हादसा हुआ।
फतेहपुर निवासी प्रकाश तिवारी की पत्नी लक्ष्मी घायल हुई हैं। प्रकाश ने बताया कि ओवरब्रिज पर अचानक आगे जा रही भीड़ भागी तो भगदड़ मच गई। उनके समझ में नहीं आया कि यह क्या हो गया। उनके मुंह से आवाज तक नहीं निकल रही थी। सतना के बेटा लाल का कहना है कि ओवरब्रिज पर वह अपनी पत्नी बिट्टन व गांव के अन्य लोगों के साथ था, तभी अचानक भगदड़ मची और चीख पुकार मच गई।