कोलकाता। गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को बंगाल के उद्योगपतियों के समक्ष वाइब्रेंट गुजरात की झलक पेश की। अपने संबोधन में जहां उन्होंने केंद्र पर जमकर निशाना साधा वहीं पश्चिम बंगाल की सरकार द्वारा उठाए कदमों की सराहना भी की। अपने ही अंदाज में उन्होंने केंद्र पर अन्य राज्यों के साथ भेदभाव करने का आरोप भी जड़ दिया। बिजली, पानी, कृषि, उद्योग जैसे मुद्दों पर मोदी यहां अपनी ही पीठ थपथपाते हुए दिखाई दिए।
अपने भाषण में उन्होंने बदलती विदेश नीति की भी चर्चा की। उन्होंने कहा कि मौजूदा समय में भारत सार्क देशों से भी पूरा फायदा नहीं उठा पा रहा है, यह भारत सरकार की कमी है। मोदी ने इटली के सैनिकों के मुद्दे पर भी भारत के रुख की आलोचना की। अपने भाषण के अंत में उन्होंने बंगाल के उद्योगपतियों को गुजरात आने का भी न्यौता दिया।
मोदी ने केंद्र को चुनौती दी कि उन्हें राज्यों के साथ भेदभाव करने का अधिकार नहीं दिया है। लेकिन केंद्र संविधान और कानून को ताक पर रखकर काम करता रहा है। उन्होंने कहा कि किसानों के खून पसीने से उगाया अनाज सड़ गया, लेकिन सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद भी केंद्र ने उसको गरीबों में नहीं बांटा। उन्होंने कहा कि जब उन्हें राज्य में सत्ता की कमान सौंपी गई तो राज्य घाटे में था आज गुजरात के फायदे का जिक्र हर कोई करता है।
मोदी ने इस मौके पर गुजरात के राज्यपाल पर भी तंज कसा और कहा कि दो तिहाई की बहुमत वाली सरकार जिस बिल को पास करती है उसको केंद्र सरकार द्वारा नियुक्त व्यक्ति नकार देता है। उन्होंने कहा कि गुजरात में कृषि में पिछले दशक में दस फीसद की दर से तेजी आई है जबकि दूध उत्पादन अस्सी फीसद बढ़ा है।
मोदी ने कहा कि केंद्र का काम नीतियां बनाना है कोई राज्य उन्हें नहीं मानते हैं तो उस पर विचार करना केंद्र के काम का हिस्सा है। उन्होंने अपने भाषण में केंद्र की नीतियों और उनकी मंशा को बेहद घटिया करार दिया। अपने भाषण में मोदी ने कहा कि केंद्र सरकार को केवल 2014 ही दिखाई दे रहा है। उन्होंने कहा कि केंद्र अपने घटक दलों के शासन वाले राज्यों में जी भर का पैसा लुटाती है लेकिन अन्य राज्यों के साथ भेदभाव बरतती है।
उन्होंने कहा कि औद्यौगिक विकास हुआ है, साथ ही कृषि योग्य भूमि में भी इजाफा हुआ है। यदि वहां पर भ्रष्टाचार होता तो यह संभव नहीं था। उन्होंने कहा कि केंद्र राज्यों के सपनों को चकना चूर कर रही है। मोदी ने इस विषय पर केंद्र को जमकर कोसा। उन्होंने कहा कि सिर्फ सब्सिडी से कुछ नहीं होने वाला है। उन्होंने बंगाल के साथ अपने पुराने संबंधों का जिक्र किया और राज्य के पुराने गौरवशाली अतीत पर भी चर्चा की।
मोदी ने कहा कि देश का विकास करना है तो इसकी शुरुआत बंगाल से ही करनी होगी। मोदी ने कहा कि अंग्रेजों को सशस्त्र क्रांति के जरिए बाहर उखाड़ फेंकने की शुरुआत बंगाल से ही हुई थी।
इस दौरान मोदी ने मीडिया पर भी चुटकी ली। उन्होंने कहा कि मीडिया चाहता है कि वह कुछ ऐसा बोलें जो दूसरों पर तंज कसने वाला हो। उन्होंने कहा कि वह ऐसा सिर्फ चुनावी समय में ही करते हैं। मोदी ने कहा कि गुजरात के विकास में बारह वर्ष लगे हैं। इस मौके पर मोदी ने पश्चिम बंगाल की सरकारों की भी कड़ी आलोचना की। हालांकि उन्होंने इस आलोचना में ममता की तारीफ भी की। उन्होंने कहा कि 32 वर्षो में जो यहां पर गडढे़ पिछली सरकारों ने खोदे हैं मौजूदा समय में उन्हें भरने का काम चल रहा है।
इससे पूर्व आज सुबह उन्होंने पश्चिम बंगाल के प्रसिद्ध दक्षिणेश्वर मंदिर में दर्शन किए। लंबे समय के बाद सोमवार देर शाम कोलकाता पहुंचे मोदी आज बेलूर मठ भी जाएंगे जो स्वामी विवेकानंद से जुड़ा है। शाम को वह भाजपा कार्यकर्ताओं के साथ बैठक करेंगे।
दक्षिणेश्वर मंदिर पहुंचने पर उन्होंने कहा कि वह यहां काफी लंबे अंतराल के बाद आए हैं। यहां आकर उनकी वहीं पुरानी स्मृतियां एक बार फिर से ताजा हो गई हैं। कल जिस वक्त मोदी ने कोलकाता में कदम रखा, उससे कुछ समय पहले ही राज्य की मुख्यमंत्री ममता बेनर्जी दिल्ली में प्रधानमंत्री से मुलाकात करने के लिए वहां से निकल गई। माना जा रहा है कि आज होने वाली उद्योगपतियों की बैठक में ममता के करीबी उद्योगपति नदारद रह सकते हैं।
मोदी कोलकाता में लगातार कई कार्यक्रमों में हिस्सा लेंगे। पांच सितारा होटल में बंगाल के उद्योग जगत से जुड़े करीब आठ सौ प्रतिनिधियों के समक्ष गुजरात के औद्योगिक विकास मॉडल प्रस्तुत करेंगे। इसके बाद भारत चेंबर आफ कामर्स, इंडियन चेंबर आफ कामर्स और एमसीसी चेंबर आफ कामर्स एंड इंडस्ट्री के चुनिंदा प्रतिनिधियों के साथ अलग-अलग बैठक करेंगे।
बंगाल के लिए दिल्ली में जब मुख्यमंत्री ममता बनर्जी हक व न्याय मांग रही होंगी, उसी वक्त कोलकाता में गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी निवेशकों को आकर्षित करने की कोशिश करेंगे। कोलकाता में मोदी बंगाल के उद्योगपतियों को सिर्फ गुजरात के बारे में ही नहीं बताएंगे, बल्कि निवेश के लिए भी आमंत्रित करेंगे। मंगलवार को मोदी तीन औद्योगिक व वाणिज्यिक संगठनों के चुनिंदा उद्योगपतियों के साथ अलग-अलग तीन बार बैठक करेंगे।