नई दिल्ली। दिल्ली बम धमाके के दोषी देविंदर पाल सिंह भुल्लर को मिली फांसी की सजा को उम्रकैद में तब्दील करने वाली याचिका को खारिज करने के बाद से ही उसकी पत्नी गुस्से में है। उसने इसे राजनीतिक फैसला करार दिया है। उसकी पत्नी नवनीत ने कहा है कि सुप्रीम कोर्ट ने याचिका के दौरान भुल्लर की मानसिक और शारीरिक स्थिति पर विचार नहीं किया। उसने सरकार पर इस मामले में धोखा देने का भी आरोप लगाया है।
नवनीत ने इस दौरान राष्ट्रपति को भी कटघरे में खड़ा कर दिया। उन्होंने कहा कि यदि देश में कानून का राज होता तो राष्ट्रपति इतने वर्षो तक उसकी दया याचिका को दबाकर नहीं रखते। उसने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने भी उसकी याचिका पर फैसला लेने में एक वर्ष का समय लगा दिया। उसका कहना था कि इस दौरान भुल्लर ने काफी मानिसक वेदना सही है, वह हर पल मरा है।
भुल्लर की पत्नी ने आरोप लगाया कि आखिर जब 1984 में सिक्खों की हत्या के दोषियों को आजतक सजा नहीं दी जा सकी है तो फिर भुल्लर ही क्यों? उसने कहा कि यदि 1984 में सिक्खों को कत्लेआम नहीं होता तो भुल्लर भी ऐसा कदम नहीं उठाता। नवनीत ने कहा कि अब उसे अपनी कौम के लोगों से इस मामले में न्याय की अंतिम उम्मीद है।
भुल्लर की सजा पर मुहर लगने के बाद से गुस्साई नवनीत ने इस मुद्दे पर सरकार पर भी कई सवाल खड़े किए। उसने कहा कि सरकार उसको 1995 में जर्मनी से इस वादे के साथ लाई थी कि उसको फांसी की सजा नहीं दी जाएगी। उसने सरकार पर धोखा देने का भी आरोप जड़ दिया। उसने कहा कि वह अब सिक्खों की की सुप्रीम संस्था अकाल तख्त जत्थेदार के पास अपील करेगी। उसने कहा कि उसे सरकार पर कोई ऐतबार नहीं है।