जिसने 10 साल की उम्र तक स्कूल में कदम नहीं रखा उसने..

computer-lady-wants-to-share-her-knowledge-with-everyoneनई दिल्ली। पैसों से ज्ञान नहीं खरीदा जा सकता। अगर आपमें ज्ञान है तो उसे चमकाने के लिए किसी सहारे की जरूरत नहीं होती। गणितज्ञ शकुंतला देवी इस बात का ज्वलंत उदाहरण हैं। शकुंतला देवी को अपने बचपन में कभी अच्छी स्कूली शिक्षा नहीं मिली और न ही उन्हें पर्याप्त आहार मिला, लेकिन इससे उनके ज्ञान में कहीं कोई कमी नहीं आई। उन्होंने अपनी मेहनत और लगन से सफलता की ऊंची उड़ान तय की। जिस शकुंतला देवी ने दस साल की उम्र तक स्कूल की सीढि़यों पर अपना कदम नहीं रखा, उसी शकुंतला देवी का नाम गिनीज बुक ऑफ व‌र्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज किया गया।

गरीब परिवार में जन्म लेने वाली शकुंतला बचपन से ही ज्ञानी और अच्छी स्मरण शक्ति की धनी थीं। वे बगैर कागज कलम के ही गणित के बड़े से बड़े सवाल सुलझा लेती थीं। तीन साल की उम्र में वे अपने पिता के साथ ताश के पत्ते खेलती थीं। उनके पिता सर्कस में काम करते थे। उनके पास शकुंतला की स्कूल की फीस देने के लिए भी पैसे नहीं होते थे। तभी एक बार शकुंतला को स्कूल से निकाल दिया गया था। पांच साल की उम्र से ही वे गणित कठिन सवालों का समाधान करने लगी थीं।

ज्ञान बांटना चाहती थीं शकुंतला

एक इंटरव्यू के दौरान शकुंतला देवी ने कहा था कि वे भले ही अपना ज्ञान किसी को दे नहीं सकती लेकिन वे उसे लोगों से बांटना चाहती हैं और इसके माध्यम से लोगों की उलझी समस्याओं को सुलझाना चाहती हैं। उनका सपना था कि वे एक आर एंड डी विश्वविद्यालय बनाएं जहां वे लोग आए जिनके पास ज्ञान तो है लेकिन उसके विकास का रास्ता नहीं है। शकुंतला देवी के पास हर समस्या के हजारों समाधान होते थे। वे एक क्षण में ही गणित, ज्योतिष और कंप्यूटर संबधित हर समस्या सुलझा लेती थीं। उन्होंने कंप्यूटर के बड़े से बड़े सवालों का समाधान करके ये साबित कर दिया कि कंप्यूटर से इन्सान नहीं बनते बल्कि इन्सान कंप्यूटर बनाते और चलाते हैं।

उन्होंने ‘फन विद नंबर्स’, ‘एस्ट्रोलॉजी फॉर यू’, ‘पजल्स टू पजल्स यू’ और ‘मैथब्लीट’ जैसी कई पुस्तकें भी लिखी हैं। उनके अंदर पिछली सदी की किसी भी तारीख का दिन क्षण भर में बताने की क्षमता थी।

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