क्या इस साल मानसून होगा मेहरबान

mansoonनई दिल्ली। देश की अर्थव्यवस्था और संस्कृति से गहरा नाता रखने वाला दक्षिण पश्चिम मानसून इस बार सामान्य रहने वाला है। देश भले ही अब कृषि प्रधान न रहा हो, लेकिन आज भी देश की 55 प्रतिशत उपजाऊ जमीन जून से सितंबर के बीच हुई बारिश पर ही आश्रित है। देश और दुनिया की खाद्य सुरक्षा को सुनिश्चित करने में इस मानसूनी बारिश का अहम योगदान होता है।

सामान्य मानसून:

देश में मानसून के सामान्य रहने का निर्धारण पिछले पचास वर्षो में हुई औसत बारिश से तय किया जाता है। पिछले पचास साल में मानसून सीजन के चार महीनों (जून-सितंबर) में हुई बारिश का औसत 89 सेमी है। जब मानसून इस दीर्घावधि औसत का 96 से 104 फीसद तक होता है तो उसे सामान्य मानसून कहा जाता है।

आगमन:

एक जून को केरल तट पर पहुंचने से मानसून की शुरुआत होती है। अगले एक सप्ताह तक यह दक्षिण भारत के क्षेत्रों को अपनी जद में लेता है। आमतौर पर दस दिन के भीतर यह देश के उत्तरी हिस्सों और 15 दिनों के भीतर आधे देश तक अपनी पहुंच बनाता है। जून के तीसरे सप्ताह तक यह मध्य भारत को तरबतर करते हुए जुलाई के पहले सप्ताह तक पश्चिमी क्षेत्रों को भिगोता है।

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