वेस्टवाटर ट्रीटमेंट के बाद ही प्रयोगशाला का पानी छोड़ा जायेगा

शोध एवं नवाचार से डूंगर महाविद्यालय ने बनाया प्रथम कॉलेज लैब वेस्टवाटर ट्रीटमेंट प्लान्ट

1_laboratory_waste_waterडूंगर महाविद्यालय बीकानेर के रसायन विभाग के विद्यार्थियो द्वारा ग्रीन कैम्पस बनाने हेतू नवाचार की शुरूआत की गई। आज आयोजित कार्यक्रम मंे डूंगर महाविद्यालय प्राचार्या डा. बेला भनोत को रसायन शास्त्र विभाग के तृतीय वर्ष स्नातक एवं रसायन विज्ञान स्नातकोतर के विद्यार्थियो ने रसायन विज्ञान की एक प्रयोगषाला का थ्री डी मॉडल बना कर भेंट किया इस मॉडल मे प्रयोगषाला की विभिन्न प्रणालियों के साथ साथ रसायन विभाग की प्रयोगषाला मे कार्य होने के पश्चात छोडे गये जहरीले पानी को उदासीन कर पुनः रिसाईकिल करने का प्रदर्शन किया गया है। थ्री डी मॉडल बनाने मे तृतीय वर्ष स्नातक के सात विद्यार्थी लक्ष्मीनारायण सोनी, राहुल मोदी, गुंजन जोषी, प्रियंका जोशी, इन्द्रा सहारण, पूजा मूंड एवं पूजा मीणा शामिल रहे। वेस्टवाटर तकनीक के संचालन मे एम एस सी रसायन विज्ञान के विद्यार्थी अब्दुल शाहिद, पूनम महेरिया, पूनम कंवर, काजल चारण, मानसी जोषी, अनु जैन, प्रियंका गोस्वामी, सोनू सहारण, हिमांनी सुथार एवं करिश्मा संाखला शामिल है।
कार्यक्रम में उद्बोधन के दौरान प्राचार्या डा. बेला भनोत ने रसायन विभाग के संकाय सदस्यो, विद्यार्थियो एवं प्रयोगषाला सहायकों द्वारा संयुक्त रूप से किये गये इस नवाचार को अपने आप मे अनूठा बताते हुए कहा कि राजस्थान के किसी भी कॉलेज की प्रयोगषाला मे यह कार्य प्रथम बार किया गया है। इस प्रकार डंूगर कॉलेज समाज एवं पर्यावरण हित पर शोध करके इसे धरातल पर कर दिखाने वाला राज्य का प्रथम कॉलेज बना है यह पूरे बीकानेर के लिए गौरव का विषय है ग्रीन कैमिस्ट्री रिसर्च सेंटर के राजस्थान प्रभारी डा. नरेन्द्र भोजक के अनुसार स्कूलो एवं कॉलेजो की रसायन विभाग एवं अन्य प्रयोगषालाओ मे विभिन्न प्रयोगो हेतू हानिकारक पदार्थो के साथ साथ अम्लों का इस्तेमाल लगातार किया जाता है जिससे प्रयोगषालाओ में से निकलने वाला अम्ल पानी को हानिकारक बना देता है एवं यह वेस्टवाटर जमीन में जाकर न केवल पानी को नुकसान पहंुचाता है बल्कि मिट्टी की क्वालिटी भी खराब कर देता है जिससे भूमि की ऊपजाऊ क्षमता घट जाती है इसलिए भू संरक्षण एवं अण्डर ग्राउण्ड वाटर की क्वालिटी सही रखने के लिए यह आवष्यक है कि प्रयोगषालाआंे मंे से अम्लीय व हानिकारक वेस्ट वाटर को उदासीन करके ही छोड़ा जाये। इसके लिए थ्री डी मॅाडल टैक्नीक का उपयोग करते हुए वेस्ट वाटर रिसाईकिल की शुरूआत की जा रही है। दिनांक 1.12.17 को इसका लोकार्पण किया जायेगा। कार्यक्रम में उपाचार्य डा. सतीष कौशिक ने वेस्टवाटर तकनीक की उपयोगिता पर प्रकाश डालते हुए इसे विद्यार्थियो के लिए रोजगार का साधन बताया। इस अवसर पर महाविद्यालय के सीनियर संकाय सदस्यो ने रसायन शास्त्र विभाग के विद्यार्थियो एवं स्टाफ को बधाई देते हुए उनकी इस उपलब्धि को अनुकरणीय बताया एवं यह आषा व्यक्त की आने वाले समय मे प्रदेष सभी कॉलेजो मे इसका उपयोग किया जा सके। डा. नरेन्द्र भोजक ने भावी योजनाओं को बताते हुए कहा कि अभी इस टैक्लोनोजी द्वारा पायलेट प्लान्ट स्तर पर एक प्रयोगशाला के लिए इसकी शुरूआत की जा रही है दिसम्बर माह मंे इसे चैक करके पहले रसायन विभाग की पांच प्रयोगषालाओ में लागू किया जायेगा एवं इसके बाद कॉलेज की सभी प्रयोगशालाओ लागू किया जायेगा। डा. आर एस वर्मा ने बताया कि इस तरह के मॉडल निर्माण से विद्यार्थियो मे रचनात्मकता के साथा साथ शोध क्षमता का विकास भी होता है ।
मीडिया प्रभारी डा. राजेन्द्र पुरोहित ने बताया कि प्राचार्या डा. बेला भनोत ने पूरी परियोजना के सफल संचालन हेतु ग्रीन कैमिस्ट्री रिसर्च सेंटर के राजस्थान प्रभारी एवं डूंगर महाविद्यालय के एसो. प्रोफेसर डॉ. नरेन्द्र भोजक के नेतृत्व में विद्यार्थियो एवं स्टाफ मेम्बर की दो टीम बनाई गई है। प्रथम टीम पायलेट स्तर पर परियोजना संचालन करेगी इसमें डा. एच एस भण्डारी, डा. राजाराम, डा.सुषमा जैन, डा. मृदुला भटनागर, डा अनिल गुप्ता, संकाय सदस्य, श्री विमल श्रीमाली, श्री गणेश प्रयोगशाला सहायक एवं अब्दुल शाहिद, हिमानी सुथार, करिष्मा, सोनु सहारण, प्रियंका गोस्वामी, शोध विद्यार्थी के रूप मे कार्य करेगें द्वितीय टीम भावी शोध का कार्य देखेगी इसमे डा. एस एन जाटोलिया, डा. उमा राठौड़, डा सुरूचि गुप्ता, डा. गौरव चावला, डा. एस के वर्मा, ओम सुथार, राजेन्द्र पारीक के साथ पूनम कंवर, पूनम महरिया, अनु जैन, मानसी जोषी, काजल चारण शोध विद्यार्थी के रूप मे कार्य करेगें।

(डॉ. बेला भनोत)
प्राचार्य,
राज. डॅूंगर महाविद्यालय,बीकानेर

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