ठेका नवीनीकरण नही करने की चेतावनी

महिलाओं की खुली चेतावनी अब ठेका बंद नहीं किया तो परिणाम भुगतने तैयार रहें आबकारी विभाग
महिलाएं बोली- शराब का ठेका बंद करें नहीं तो कानून हाथ में लेंगे

दो साल से चल रहे शांतिपूर्ण अभियान में अब महिलाओं का गुस्सा तेज
शराबबंदी अभियान को लेकर राजसमन्द जिले के भीम उपखंड की पूरे देश में चर्चित ग्राम पंचायत मंडावर का अभियान अब पूरे शबाब पर है। इसको लेकर पिछले दो वर्ष से शांतिपूर्ण आंदोलन चलाया जा रहा था परंतु विभिन्न कयासों के माध्यम से शांतिपूर्ण माहौल अशांतिपूर्ण आंदोलन के रूप में बदलने की संभावनाएं तेज हो गई है। ज्ञातव्य है कि मंडावर शराबबंदी आंदोलन पिछले दो वर्ष से चल रहा है और पिछले वर्ष 15 मार्च को तत्कालीन जिला कलेक्टर अर्चना सिंह को ज्ञापन देकर वर्तमान वित्तिय वर्ष 2017-18 के शराब ठेके की 20 मार्च को होने वाली मंडावर की लॉटरी को रोकने की मांग की थी और 31 मार्च से पूर्व ज्ञापन का भौतिक सत्यापन व मतदान कराने की मांग की थी । पर ऐसा नही हुआ प्रशासन ने नियमों को ताक में रखकर लॉटरी खोल दी व नया ठेका आवंटन कर दिया। प्रशासन की लेटलतीफी के कारण आंदोलन वर्ष भर चलता रहा और अंततोगत्वा लम्बे संघर्ष के बाद 20 जनवरी को मतदान हुआ। इस मतदान में शराब का ठेका बंद करने पर मुहर लग गई। इसके बाद महिलाओं ने जीत का जश्न तो मनाया पर अब तक शराब का ठेका नही हटाया गया है।

महिलाएं बोली- शराब का ठेका बंद करें नहीं तो कानून हाथ में लेंगे
मंडावर शराबबंदी आंदोलन पिछले दो वर्ष से शांतिपूर्ण तरीके से संचालित किया जा रहा था। जिसका मतदान 20 जनवरी को हो चुका है । जिस पर शराब का ठेका बंद कराने हेतु 94 प्रतिशत लोगो ने एक तरफा मतदान करके जनादेश दिया है।इधर लगातार प्रशासन में आबकारी विभाग के द्वारा शराब का ठेका अगले वर्ष तक संचालित करने की खबरों के चलते शराबबंदी आंदोलन की नेतृत्वकर्ता महिलाओं ने एक आवाज में कहा है- अब तक चले शांतिपूर्ण अभियान के बाद कानून हाथ में लेंगे। ठेका नहीं खुलने देंगे। ठेका खोला तो प्रशासन जिम्मेदार होगा।

31 मार्च डेडलाइन 1 अप्रैल से खुला विरोध
मंडावर की महिलाओं ने प्रशासन व आबकारी विभाग को खुली चेतावनी देते हुए कहा है कि मनमानी करते हुए अभियान को दबाने की साजिश के चलते हुए 1 वर्ष बाद मतदान कराया। अब शराब का ठेका 1 वर्ष के लिए और नवीनीकरण करने की सूचना पर महिलाओं का गुस्सा उबाल पर है। खुली चेतावनी देते हुए कहा है कि 31 मार्च तक प्रशासन अपना फैसला ले ले और 1 अप्रैल से मंडावर का ठेका हटा देवें ,नहीं तो प्रशासन में आबकारी विभाग महिलाओं से लड़ने के लिए तैयार रहें।

सरपंच बोली- तुरंत ठेका बंद हो

प्यारी रावत
मंडावर शराबबंदी अभियान की अगुवा एवं सरपंच प्यारी रावत ने प्रशासन को पत्र लिखकर तत्काल प्रभाव से शराब का ठेका बंद कराने की मांग की है। पत्र में लिखा है कि हमारा अभियान पिछले वर्ष का है और इस वर्ष के ठेके को बंद कराने के लिए ज्ञापन दिया था परंतु प्रशासन ने टालमटोल रवैया अपनाते हुए मतदान नहीं कराया था। अब मतदान हो चुका है । जिसमें मंडावर की जनता ने अपना फैसला दे दिया हैं । प्रशासन और आबकारी विभाग तुरंत प्रभाव से ठेका बंद करें। किसी भी अप्रिय घटना के लिये प्रशासन की जिम्मेदारी होगी।

भौतिक सत्यापन के बाद 20 दिन में होना था मतदान , कराया 10 महीने बाद
आबकारी अधिनियम के तहत मतदान कराने की मांग को लेकर मंडावर के ग्रामीणों ने ज्ञापन दिया था परंतु ना तो लॉटरी रोकी, ना ही भौतिक सत्यापन समय पर कराया । इसके बाद भौतिक सत्यापन तो कराया परंतु नियम-कायदों को दरकिनार करते हुए 10 महीने बाद मतदान कराया जबकि भौतिक सत्यापन के बीस दिवस के अंतर्गत मतदान होना आवश्यक है । इस तरह प्रशासन ने जानबूझकर लेटलतीफी कर कर अभियान को दबाने की साजिश रची। साजिश के बीच भी मण्डावर की जनता का गुस्सा मतदान में साफ देखने को मिला और बड़ी जीत दर्ज की।

नही दिया चुनाव चिन्ह, अंतिम समय में बदला था मतपत्र
मंडावर शराबबंदी अभियान को दबाने को लेकर प्रशासन में आबकारी विभाग ने जबरदस्त रणनीति बनाई और चुनाव में चिन्ह तक नही दिया जबकि आधे से अधिक मतदाता अनपढ़ है। इसी तरह चुनाव घोषणा के समय दिए गए नमूना मतपत्र से भिन्न आकार, डिजाइन के नए मतपत्र से मतदान कराया । जबकि महिलाओं को प्रशासन द्वारा उपलब्ध नमूना मतपत्र से वोट देने की प्रक्रिया को समझाया था। मतदान के दिन सुबह मतपत्र में परिवर्तन की सूचना पर मंडावर की महिलाओं में आक्रोश व्याप्त हो गया । इस पर आनन फानन में उसी के अनुरूप मतपत्र बनाकर सभी महिलाओं को समझाया गया और बंपर वोटिंग हुई। मतपत्र बदलने की सूचना पर जनता में गुस्सा व्याप्त हो गया, मण्डावर की इज्जत, अस्मिता बचाने में हर एक ने दुगने जोश से काम किया। मंडावर की एक तरफा जीत सुनिश्चित हुई।

आचार संहिता का हवाला वाहनों को मजरों में ही रोका
वैसे तो आम चुनावों में राजनीतिक पार्टियों के प्रत्याशियों के द्वारा मतदाताओं के लाने के लिए वाहनों का उपयोग खुलेआम किया जाता है परंतु मंडावर में शराबबंदी आंदोलन को दबाने की साजिश के चलते हुए मंडावर के सभी 24 मजरों में पुलिस अधिकारियों को लगा दिया गया जिससे कोई भी मतदाता वाहनों में बैठकर मत देने नहीं आ सके। इस पर मंडावर सरपंच व प्रशासन के बीच दिनभर से नोकझोंक होती रही। सरपंच प्यारी रावत ने सभी मतदातायो को हराने की साजिश के साथ मार्मिक अपील कर मतदातायो को पेडल वोट देने आने हेतु फोन किया। सरपंच ने खुली चेतावनी दी कि आने वाले आम चुनावों में कोई भी राजनीतिक पार्टी और प्रत्याशी मतदाताओं को गाड़ी में बिठा कर नहीं लाएगा।

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