हरित कीटनाशक रासायनिक कीटनाशकों का विकल्प बन सकता है

डूंगर कॉलेज की अन्तर्राष्ट्रीय कार्यशाला के दूसरे दिन पांच सत्र
बीकानेर 16 अक्टुबर। सम्भाग के सबसे बड़े डूंगर महाविद्यालय बीकानेर में हरित रसायन विषयक अन्तर्राष्ट्रीय कार्यशाला के दूसरे दिन भी पांच सत्रों मेंं देश विदेश के ख्यातनाम वैज्ञानिकों ने अपने शोध पत्र प्रस्तुत किये। प्रथम सत्र में जयपुर के प्रो. अंशु डाण्डिया ने ग्रीन उत्प्रेरक विषय पर, भावनगर के डॉ. कमलेश प्रसाद एव जयपुर के प्रो. इन्द्र कुमार ने जीवन में ग्रीन केमिस्ट्री के महत्व पर व्याख्यान दिया। द्वितीय सत्र में आईआईटी नई दिल्ली के प्रो. एन.डी.कुरूर ने एन एम आर तकनीक की व्याख्या करते हुए जटिल तकनीक को सरल भाषा में समझाया। द्वितीय सत्र में चण्डीगढ़ के प्रो. एस.के.मेहता ने उपकरणों के उपयोग के बारे में जानकारी दी। भावनगर के डॉ. केतन पटेल ने ग्रीन तकनीक के उपयोग का वर्णन किया।
तृतीय सत्र दिल्ली विश्व विद्यालय के प्रो. अशोक प्रसाद की अध्यक्षता में सम्पन्न हुआ। इसमें सूरत के प्रो. के.आर.देसाई, परमाण्विक उर्जा के डॉ. डी.पी.एस. राठौड़, डॉ. कनिका सोलंकी, राधिका गुप्ता, डॉ. मोहम्मद आबिद, डॉ. अरविन्द शर्मा, राकेश गौड़, वंदना, डॉ. विवके मिश्रा सहित युवा वैज्ञानिकों ने पत्र वाचन किया। चतुर्थ सत्र में डूंगर कॉलेज की डॉ. मीरा श्रीवास्तव ने बताया कि हरित कीटनाशक रासायनिक कीटनाशकों का विकल्प हो सकता है। पोस्टर सत्र में विभिन्न शोधार्थियों ने नारियल के पानी, खिचड़ी में घी आदि अनेक भोज्य पदार्थों का स्वास्थ्य पर प्रभाव संबंधी पोस्टर प्रस्तुत किये। वैज्ञानिकों ने सभी शोधार्थियों का उत्सावर्द्धन किया।
अंतिम सत्र में अहमदाबाद विश्व विद्यालय के डॉ.वी.के.जैन, डॉ. शिल्पी कुशवाहा ने आंमंत्रित व्याख्यान किये। आईआईटी दिल्ली के प्रो. एन.डी.कुरूर ने इस सत्र की अध्यक्षता की। संयोजक डॉ. नरेन्द्र भोजक ने बताया कि तीन दिवसीय कार्यशाला का बुधवार को प्रातःकालीन सत्र के पश्चात समापन समारोह का आयोजन होगा जिसमें सहभागियों को प्रमाण पत्रों का वितरण किया जावेगा।

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