पशुओं को मौत के मुंह में नहीं धकेले

सरकार अकाल ग्रस्त पशु पालकों को लघु व सीमांत किसानों में बांटकर गायों को मौत के मुह में नही धकेले भारतीय जनता पार्टी अनुसूचित जाति मोर्चा राजस्थान प्रदेश के कार्यकारिणी सदस्य लक्ष्मण बडेरा ने राज्य के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत व राजस्व मंत्री हरीश चौधरी को पत्र लिखकर यह मांग की की अकाल ग्रस्त बाड़मेर व जैसलमेर जिले में पशुओं को बचाने के लिए जिले के अकाल ग्रस्त किसानों को लघु व सीमांत कृषकों में बांटकर पशुओं को मौत के मुंह में नहीं धकेले भाजपा नेता लक्ष्मण वडेरा ने पत्र में बताया कि बाड़मेर जिले की 17 पंचायत समितियों की 500 से अधिक ग्राम पंचायतों में अकाल का भंयकर प्रभाव है पूरे जिले में 2741 गांव अकाल ग्रस्त है सरकार ने 1 वर्ष पूर्व गिरदावरी करके अकाल ग्रस्त घोषित किया था लेकिन अभी तक सरकार ने सूखे व अकाल की भयंकर मार झेल रहे बाड़मेर जैसलमेर के पशु पालकों के पशुधन को बचाने के लिए सरकार ने पर्याप्त कदम नहीं उठाया 500 से अधिक अकालग्रस्त ग्राम पंचायतों में 185 पशु शिविरों की स्वीकृति जारी कर अधिकारीयों ने इतिश्री कर दी जबकि जिले के 2741 गाँव के लाखों पशु अकाल की वजह से व चारा पानी नही मिलने की वजह से लगातार मर रहे है पशुओं के शवों से गांवों में बदबू व बीमारी फैलने का अंदेशा भी हो गया है सरकार ने पिछले समय कर्ज माफी के दौरान एक बार लघु व सीमांत किसानों की शर्तें लगाई थी मगर लोकसभा में वोट बटोरने के लिये शर्तें हटा दी लेकिन पशुओं के वोट होते नही इसलिए इस शर्तें को थोपकर पशुधन को सरकार ने मौत के मुह में पंहुचा दिया सरकारी अधिकारी सरकार की इन बंदिशों के कारण पशुओं का बचाव करने में असमर्थ है बाड़मेर जिले में पशु चारा डिपो खोलकर सरकार ने अकाल पीड़ित ग्रामीणों से पशुचारे के पैसे वसूल रहे है एक तरफ अकाल की मार से जूझ रहे पशु पालकों को पशुओं को बचाना भारी पड़ रहा है सरकार चारा डिपो खोलकर पशुपालकों को लुट रही है जबकि भारतीय जनता पार्टी के शासन में पूरे जिले में गांव गांव में पंचायतों में पशु शिविर खोलकर पशुधन को निशुल्क चारा उपलब्ध करवा कर बचाया था जिसकी वजह से आज भी ग्रामीण लोगों का जीवन पशुओं के सहारे जिंदा है वर्तमान गहलोत सरकार ने लघु व सीमांत किसानों की शर्ते थोप कर पशुओं को मौत के मुंह में धकेल दिया है भाजपा नेता लक्ष्मण बडेरा ने मांग की है कि लघु व सीमांत किसानों की शर्तें को तत्काल समाप्त किया जाए और गांव गांव में पशु शिविर स्वयंसेवी संस्थाओं के माध्यम से स्थापित कर बहुमूल्य पशुधन को बचाकर गांव की आर्थिक रीड की हड्डी को मजबूत करें अन्यथा राज्य के भाजपा नेता अकाल ग्रस्त क्षेत्रों का दौरा कर इस मामले को राज्य स्तर पर उठाएंगे और सरकार को मजबूर करेंगे पशुधन को बचाने के लिए

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