मजदूर परिवार भुखमरी के कगार पर खड़े है

मजदूर परिवार भुखमरी के कगार पर खड़े है यह बात कमठा मजदूर यूनियन बाड़मेर के अध्यक्ष लक्ष्मण बडेरा ने बाड़मेर शहर के तिलक नगर में रहने वाले जोगी कालबेलिया वाल्मीकि समुदाय वह आदिवासी भीलों के परिवारों से मिलने के बाद में प्रेस बयान जारी कर बताया कि राजस्थान के मुख्यमंत्री ने कोई भी व्यक्ति भूखा न सोये इसके लिए एसडीओ बीडीओ तहसीलदार पटवारी ग्रामसेवक पुलिस के बीट कांस्टेबल को अधिकृत किया था लेकिन बाड़मेर के तिलक नगर में रहने वाले घुमन्तु परिवारों व कचरा बीनने वालों आदिवासियों जोगी कालबेलिया के परिवारों तक सरकार की सहायता नहीं पहुंची पिछले चार दिन से सहायता के इंतजार कर रहे है और यह पूरे परिवार भुखमरी के कगार पर खडे हुये है 22 मार्च से जनता कर्फ्यू के बाद में ना तो यह कचरा बीनने के लिए बाहर जा सकते हैं और नहीं यह मजदूरी करने के लिए भी जा सकते हैं और तथा सरकार ने घर से बाहर निकलने पर भी पाबंदी लगा रखी है इसलिए दूसरे लोगों से जजमानी मांग कर खाने पर भी पाबंदी होने के कारण इनके रोजी-रोटी का संकट आ पड़ा है मुख्यमंत्री ने जब यह कहा कि कोई भी गरीब भूखा नहीं सोएगा उसके बाद में जरूर कुछ आशा बंधी थी लेकिन इस मामले में बाड़मेर जिला प्रशासन ने अपनी जिम्मेदारी नहीं निभाई मजदूर नेता लक्ष्मण बडेरा ने अफसोस जताते हुए कहा कि बाड़मेर जिले में ऐसे गरीबों की संख्या लाखो में होने के बावजूद भी अभी तक उन गरीबों तक सरकार द्वारा जारी की गई राशन सामग्री और जो भोजन पैकेट नही पहूंचे उसके बावजूद ऐसे गरीब लोग जिनके वास्तव में खाने को दाना नहीं है उन तक तत्काल भोजन के पैकेट बना करके भेजने की व्यवस्था थी उस पर भी प्रशासन काम नहीं कर पाया है और इस मामले में जब बाड़मेर के पटवारी ओमप्रकाश विश्नोई को जानकारी देकर व्यवस्था करने पर बताया कि नगर परिषद बाड़मेर कर रही है जब नगर परिषद से सम्पर्क किया तो बताया हम केवल शहरी क्षेत्र में कर रहे है ग्रामीण क्षेत्र में पंचायत समितियों देख रही तब बादमे के विकास अधिकारी केलाश चन्द चौधरी से मुलाकात कर तिलक नगर के घुमन्तु व कचरा बीनकर जीवन निर्वाह करने वाले जोगी व आदिवासी व वाल्मीकि परिवारो को सहायता देने की बात कहने पर कहा कि सरपंच कर रहे है लेकिन अभी तक किसी ने नही की

मजदूर नेता लक्ष्मण बडेरा ने बताया कि उनके पूरे जिले में घुमन्तु व दिहाड़ी मजदूरों की लाखों में संख्या है और उन तक सरकार की सहायता नहीं पहुंचना अपने आप में गम्भीर मामला है गरीबो व मजदूरों तक सहायता पहुंचने में सरकार पूरी तरह से विफल हो चुकी है

दिहाडी मजदूर की मजदूरी बन्द है घुमन्तु परिवार की जजमानी से पेट भरने पर पाबंदी होने के लोग व उनके बच्चे भूखमरी का सामना कर रहे हैं और लोगों को यह चिंता है कि अगर तत्काल सरकार के अधिकारी सहायता के लिए नही पहुंचे तो यह जो लोग हैं वह परेशान हो जाएंगे और भूख से तड़प तड़प के मर जाएंगे ऐसी सूरत के अंदर मजदूर नेता लक्ष्मण बड़ेरा ने सरकार के जुड़े हुए उन अधिकारियों को आग्रह किया है कि वह सरकार द्वारा जारी सभी सहायता मजदूरों गरीबों तक पहुंचाने कि व्यवस्था करे।

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