कोरोना वापसी” की “उलटी गिनती” शुरू……..

बे- लगाम “जनता” यही चाहती है शायद “ये हाल” करेंगे “बे हाल”

सुशील चौहान
भीलवाड़ा। “बड़ी मुश्किल” से “काबू” हुआ “कोरोना” ओर प्रशासन, पुलिस के साथ स्वास्थ्य कर्मी थोड़े “रिलेक्स” हुए है। अभी कोई “आपाधापी” नहीं है। कोरोना का आंकड़ा भी “डाउन” है लेकिन लॉक डाउन में ढील के बाद बाजार का “नज़ारा” वाकई देखने लायक है। इतनी भीड़ ओर कोरोना गाइड लाइन की सरे आम उड़ती धज्जियां। सुना था यह “पब्लिक” है सब जानती है तो कोरोना ने कितनों को “मौत” की “नींद” सुला दिया शायद इस बात से “अनजान” है। तभी तो बाजार में लोग “खरीददारी” के लिए ऐसे निकले है मानो कल ही “सारा सामान” खत्म होने वाला है। लगता है किसी को परवाह नहीं है कि कोरोना अभी गया नहीं है। सरकार और प्रशासन ने भी इसी “पब्लिक” पर “भरोसा” कर छूट दी कि “जरूरी” होने पर “घर से निकलो” ओर “पूरी सुरक्षा” के साथ जितनी जल्दी हो खरीददारी कर “घर लौट आओ”। मगर हालात तो एकदम उलट है। सुबह से शाम चार तक बाजार में ऐसी “रेलमपेल” कि कोरोना भी समझ गया होगा कि यह पब्लिक ही मेरी “पब्लिसिटी” कर रही है। “तगड़ी मार्केटिंग” कर रही है और इनके ही कारण कोरोना “मजबूरी” ओर “मजबूती” से लौटेगा । आकड़े आने कम हो गए हो लेकिन कोरोना के शिकार अभी भी जिंदगी के लिए संघर्ष कर रहे है। जिन पर बीत रही है उनका मन जानता है। वैसे पब्लिक के “लक्खण” देखते हुए तो कहने का मन करता है कि “छूट” मिलनी ही नहीं चाहिए थी। प्रशासन भी शायद यही सोच रहा है क्योंकि कोरोना “आया” तो “पब्लिक” तो “हाथ” खड़े कर “अस्पताल” भागेगी। भर्ती करने की जिद भी करेगी। बेड भी मांगेगी। ऑक्सीजन भी ओर इंजेक्शन भी। भरपूर दवा पर तो जैसे पूरा हक जताएगी लेकिन अभी कह दो कि बिना वाजिब वजह घर से मत निकलो तो इसे नहीं मानेगी। बस छूट मिली हैं तो घूमेंगे तो सही।ऐसी ऐसी चीजें खरीदने के लिए लोग अपनी मोटर साइकिल पर सवार होकथ निकल रहे जो ना भी खरीदे तो काम चल सकता, लेकिन दिल हैं कि मानता नहीं। अब देखोना गेहूं की धाणी ही लेने बाजार में आ रहे। कोई नई साड़ी तो कोई नया सलवार सूट के लिए दौड़ रहे हैं बाजारों में अरे भाई फिलहाल यह नहीं खरीदोगे तो आपका कुछ बिगड़ेगा नहीं।लेकिन जिद्द हैं।जुलाई की एक दो तारीख पर शादियां भी खूब हैं इसलिए कपड़ों, सुनार की दुकानें पर सौशाल डिस्टेंस तो हवा हवाई हो गई। और तो चाट पकौड़ी की दुकानों पर तो ऐसे टूट रहे हैं जैसे कभी वो इसका स्वाद नहीं उठा पाएंगे। अरे भाई प्रशासन ने मेहनत कर कोरोना पर जैसे तैसे काबू पाया हैं। पुलिस व प्रशासन की मेहनत पर पानी मत फेरो। थोड़े दिन और घरों में रुक जाओ।वो आप और आपके परिवार के लिए लाजमी रहेगा। अगर कोरोना फिर फैला तो प्रशासन को आपकी रक्षा के लिए उतरना ही पड़ेगा ।क्योंकि वो नहीं चाहता हैं कि कोरोना से फिर कोई आपका अपना दूर होवे। इसलिए मान जाओ। लेकिन तभी तो कहा है कि यह पब्लिक है ये कब मानती है पब्लिक है….?
-सुशील चौहान –
– 98293 -03218
– स्वतंत्र पत्रकार
– पूर्व उप – सम्पादक, राजस्थान पत्रिका
– वरिष्ठ उपाध्यक्ष, प्रेस क्लब,भीलवाड़ा
– sushilchouan 953@gmail.com

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