व्यावसायिक शिक्षा अनिवार्य, फिर व्यावसायिक प्रशिक्षकों का भविष्य अंधकार में क्यों?

सरकार के फैसले का स्वागत, लेकिन वर्षों से कार्यरत व्यावसायिक प्रशिक्षकों के लिए स्थायी जॉब पॉलिसी की मांग
जयपुर, 21 अगस्त 2026।
राजस्थान में कक्षा 9 से व्यावसायिक शिक्षा को अनिवार्य विषय बनाए जाने तथा आगामी शैक्षणिक सत्रों में व्यावसायिक शिक्षा के विस्तार को लेकर सरकार द्वारा किए जा रहे प्रयासों का व्यावसायिक प्रशिक्षक संघर्ष समिति राजस्थान स्वागत करती है। दैनिक भास्कर में 21 अगस्त को प्रकाशित समाचार में भी कक्षा 9 से व्यावसायिक शिक्षा को अनिवार्य किए जाने की जानकारी सामने आई है। सरकार एवं शिक्षा विभाग द्वारा इस महत्वपूर्ण निर्णय को लेकर किए गए ट्वीट एवं प्रचार से यह स्पष्ट है कि राजस्थान सरकार विद्यार्थियों को स्कूली स्तर से ही रोजगारपरक एवं कौशल आधारित शिक्षा से जोड़ना चाहती है।
लेकिन इस निर्णय के साथ ही एक बड़ा सवाल भी खड़ा होता है—
जब राजस्थान में व्यावसायिक शिक्षा अनिवार्य है, तो व्यावसायिक शिक्षण कराने वाले प्रशिक्षकों की नौकरी अनिवार्य और स्थायी क्यों नहीं?
राजस्थान के सरकारी विद्यालयों में वर्षों से हजारों व्यावसायिक प्रशिक्षक (Vocational Trainers) विद्यार्थियों को विभिन्न ट्रेडों में प्रशिक्षण प्रदान कर रहे हैं। इन प्रशिक्षकों के माध्यम से विद्यार्थियों को केवल किताबी ज्ञान ही नहीं, बल्कि वास्तविक कौशल, प्रायोगिक प्रशिक्षण, औद्योगिक भ्रमण, ऑन-द-जॉब ट्रेनिंग तथा रोजगार से जुड़ी जानकारी उपलब्ध कराई जाती है।
सरकार अब व्यावसायिक शिक्षा का दायरा और बढ़ाने जा रही है। ऐसे में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले व्यावसायिक प्रशिक्षकों के भविष्य को लेकर अभी भी कोई स्पष्ट एवं स्थायी नीति नहीं होना गंभीर चिंता का विषय है।
व्यावसायिक प्रशिक्षक संघर्ष समिति राजस्थान से आर एन रावत का कहना है कि सरकार एक ओर विद्यार्थियों के लिए व्यावसायिक शिक्षा को अनिवार्य कर रही है, वहीं दूसरी ओर इस शिक्षा व्यवस्था की रीढ़ बने प्रशिक्षकों को वर्षों से अस्थायी व्यवस्था और प्लेसमेंट एजेंसियों के भरोसे छोड़ना उचित नहीं है।
सरकार से सीधे सवाल
1. जब व्यावसायिक शिक्षा को विद्यालयों में अनिवार्य किया जा रहा है तो व्यावसायिक प्रशिक्षकों के लिए स्थायी जॉब पॉलिसी कब बनाई जाएगी?
2. वर्षों से सरकारी विद्यालयों में सेवाएं दे रहे प्रशिक्षकों के अनुभव एवं सेवाकाल का लाभ उन्हें कब मिलेगा?
3. विद्यार्थियों को रोजगारपरक शिक्षा देने वाले प्रशिक्षकों का स्वयं का रोजगार अस्थायी क्यों रखा गया है?
4. यदि व्यावसायिक शिक्षा आने वाले समय में शिक्षा व्यवस्था का महत्वपूर्ण एवं अनिवार्य हिस्सा बनने जा रही है, तो इसके लिए प्रशिक्षकों का स्थायी कैडर क्यों नहीं बनाया जा रहा?
5. क्या सरकार व्यावसायिक प्रशिक्षकों को प्लेसमेंट एजेंसियों की व्यवस्था से बाहर निकालकर सीधे एवं सुरक्षित रोजगार देने की नीति बनाएगी?
प्रशिक्षकों का कहना—नीति स्वागत योग्य, लेकिन प्रशिक्षकों का भविष्य भी सुनिश्चित हो
समिति का कहना है कि व्यावसायिक शिक्षा को अनिवार्य करने का निर्णय विद्यार्थियों के भविष्य के लिए सकारात्मक कदम है। लेकिन किसी भी शिक्षा नीति की सफलता उसके क्रियान्वयन पर निर्भर करती है और उसके क्रियान्वयन की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी शिक्षक एवं प्रशिक्षक होते हैं।
यदि सरकार वास्तव में राजस्थान के युवाओं को कौशलयुक्त बनाकर रोजगार के अवसर उपलब्ध कराना चाहती है, तो सबसे पहले उन प्रशिक्षकों के भविष्य को सुरक्षित करना होगा जो वर्षों से विद्यालयों में इस व्यवस्था को जमीन पर लागू कर रहे हैं।
व्यावसायिक प्रशिक्षक संघर्ष समिति राजस्थान सरकार से मांग करती है कि व्यावसायिक शिक्षा को अनिवार्य किए जाने के साथ-साथ राजस्थान में कार्यरत व्यावसायिक प्रशिक्षकों के लिए सम्मानजनक वेतन, सेवा सुरक्षा एवं स्थायी जॉब पॉलिसी लागू की जाए तथा वर्षों से सेवाएं दे रहे प्रशिक्षकों के अनुभव का उचित लाभ दिया जाए।
हमारा स्पष्ट संदेश है—
“जब व्यावसायिक शिक्षा अनिवार्य है, तो व्यावसायिक शिक्षण कराने वाले प्रशिक्षकों का भविष्य भी सुरक्षित होना चाहिए।”
सरकार विद्यार्थियों के भविष्य को उज्ज्वल बनाने के लिए व्यावसायिक शिक्षा को अनिवार्य कर रही है, यह स्वागत योग्य कदम है। अब सरकार को उसी गंभीरता से व्यावसायिक प्रशिक्षकों के भविष्य को भी सुरक्षित करने की दिशा में ऐतिहासिक निर्णय लेना चाहिए।

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