अजमेर। प्रदेश में अमूल के विस्तार के विरोध और सरस डेयरी एवं सहकारी व्यवस्था को मजबूत बनाए रखने की मांग को लेकर रविवार, 23 अगस्त को ‘सरस सहकार महाकुंभ’ का आयोजन सुबह 11 बजे कच्छावा गार्डन, तबीजी फार्म के पास किया जाएगा। कार्यक्रम की मुख्य थीम ‘अमूल भगाओ-सरस बचाओ’ रखी गई है। आयोजन में प्रदेश के 15 जिला संघों के सरस डेयरी अध्यक्षों के साथ पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत तथा कई वरिष्ठ नेता और सहकारिता क्षेत्र से जुड़े प्रतिनिधि शिरकत करेंगे।
अजमेर सरस डेयरी अध्यक्ष रामचंद्र चौधरी ने बताया कि महाकुंभ में अमूल के प्रदेश में विस्तार से सरस डेयरी और लाखों पशुपालकों पर पड़ने वाले संभावित प्रभाव को लेकर इस महाकुंभ में रणनीति तैयार की जाएगी। महाकुंभ में संपूर्ण प्रदेश से लगभग 25,000 महिला-पुरुष सम्मिलित होंगे।
महाकुंभ में इन नेताओं की रहेगी भागीदारी… (नेताओं के नाम यहाँ जोड़े जा सकते हैं)
गुणवत्ता और कार्यप्रणाली पर रामचंद्र चौधरी के गंभीर आरोप:
महाकुंभ की तैयारियों के बीच, रामचंद्र चौधरी और सरस समर्थकों ने एक विस्तृत आरोप पत्र जारी किया है। इसमें अमूल पर ग्राहकों को गुमराह करने और उत्पादों की गुणवत्ता से समझौता करने के गंभीर आरोप लगाए गए हैं। आरोप है कि अमूल अपने उत्पादों में प्रिजर्वेटिव (Preservative) और प्राकृतिक वसा (Natural Fat) की जगह वेजिटेबल फैट का इस्तेमाल करता है, जबकि सरस पूरी तरह शुद्धता के मानकों का पालन करता है। इसके अलावा, अमूल पर एक्सपायरी डेट के उत्पाद बेचने और अपने गृह राज्य (गुजरात) की तुलना में अन्य राज्यों में कीमतें ज्यादा रखने की दोहरी नीति अपनाने का भी आरोप है।
महाकुंभ के अन्य प्रमुख मुद्दे:
1. सरस की त्रिस्तरीय सहकारी व्यवस्था: चौधरी ने कहा कि डॉ. कुरियन की सोच के अनुसार सरस में ग्राम स्तर की दुग्ध समितियों, जिला दुग्ध संघों और प्रदेश स्तर की व्यवस्था के माध्यम से त्रिस्तरीय सहकारी ढांचा विकसित किया गया है। उनका कहना है कि अमूल की कार्यप्रणाली में ऐसी व्यवस्था नहीं होने से वास्तविक लाभ किसे मिलेगा, यह बड़ा सवाल है।
2. सहकारिता के उपनियम बनाम कानून थोपने का आरोप: चौधरी का आरोप है कि सरस की सहकारी संस्थाएं निर्धारित उपनियमों के तहत संचालित होती हैं, जबकि अमूल की अलग तरह की नीतियां लागू होती हैं। महाकुंभ में इस अंतर को भी प्रमुखता से उठाया जाएगा।
3. हजारों करोड़ के सरस ढांचे को बचाने की अपील: चौधरी ने कहा कि राजस्थान में सरस के लिए वर्षों में हजारों करोड़ रुपये का बुनियादी ढांचा तैयार हुआ है। यदि अमूल को बिना उचित नीति के प्रदेश में विस्तार का अवसर दिया गया तो सरस का यह ढांचा प्रभावित होने की आशंका है।
4. छोटे पशुपालकों की आजीविका पर असर की आशंका: अमूल के प्रदेश में आने से छोटे किसानों और पशुपालकों की आजीविका पर सीधा असर पड़ सकता है। उनका कहना है कि दूध खरीद की व्यवस्था और कीमतों को लेकर स्पष्ट सीलिंग नहीं होने से स्थानीय दुग्ध उत्पादकों के सामने प्रतिस्पर्धा की चुनौती बढ़ेगी।
5. मुख्यमंत्री से अमूल को अनुमति नहीं देने की मांग: रामचंद्र चौधरी ने मुख्यमंत्री से मांग की है कि अमूल को राजस्थान में विस्तार की अनुमति नहीं दी जाए। उन्होंने कहा कि यदि सरकार ने इस दिशा में निर्णय लिया तो आंदोलन को आगे बढ़ाते हुए जंतर-मंतर पर धरना दिया जाएगा तथा आवश्यकता पड़ने पर उच्चतम न्यायालय की शरण भी ली जाएगी।
6. 13 हजार समितियों पर संकट का दावा: चौधरी ने दावा किया कि अमूल के प्रदेश में आगमन से राजस्थान की करीब 13 हजार दुग्ध समितियां प्रभावित होकर समाप्त होने की स्थिति में आ सकती हैं। इससे लाखों लोगों की आजीविका पर असर पड़ने की आशंका उन्होंने जताई।
7. सरस जिला संघों के बकाया भुगतान की मांग: महाकुंभ में राज्य सरकार से मांग की जाएगी कि मिड-डे मील योजना के तहत लगभग एक से डेढ़ साल से बकाया 300 से 400 करोड़ रुपये का जल्द भुगतान किया जाए। इसके साथ ही मुख्यमंत्री दुग्ध उत्पादक संबल योजना की लगभग तीन माह से बकाया राशि का भी शीघ्र भुगतान करने की मांग रखी जाएगी।
रामचंद्र चौधरी ने कहा कि सरस केवल एक डेयरी ब्रांड नहीं, बल्कि राजस्थान के हजारों गांवों के पशुपालकों और लाखों परिवारों की आजीविका से जुड़ी सहकारी व्यवस्था है। इसलिए प्रदेश में दुग्ध क्षेत्र से जुड़े किसी भी बड़े निर्णय से पहले स्थानीय पशुपालकों, दुग्ध समितियों और सरस के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
‘सरस सहकार महाकुंभ’ के माध्यम से आयोजक प्रदेश की सहकारी दुग्ध व्यवस्था को बचाने और सरकार पर अपनी मांगों को लेकर दबाव बनाने की रणनीति पर चर्चा करेंगे।