जयपुर, 21 अगस्त 2026: जब भी टीकाकरण की बात होती है, अधिकांश लोगों के मन में छोटे बच्चों को लगने वाले नियमित टीकों की तस्वीर उभरती है। आम धारणा है कि बचपन में सभी जरूरी टीके लग जाने के बाद टीकाकरण की आवश्यकता समाप्त हो जाती है। हालांकि, यह सोच बदलने की जरूरत है। जैसे-जैसे हम किशोरावस्था, वयस्क जीवन, गर्भावस्था और वृद्धावस्था में प्रवेश करते हैं, हमारी प्रतिरक्षा प्रणाली और स्वास्थ्य संबंधी जोखिम भी बदलते हैं। इसलिए उम्र और स्वास्थ्य स्थिति के अनुसार समय पर टीकाकरण कराना जीवनभर की निवारक स्वास्थ्य देखभाल का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
भारत ने टीकाकरण के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, जनवरी 2026 तक देश में पूर्ण टीकाकरण कवरेज 98.4 प्रतिशत तक पहुंच गया। वहीं, ऐसे बच्चों का अनुपात जिन्हें एक भी टीका नहीं लगा था, यानी ‘जीरो-डोज’ बच्चे, 2023 में 0.11 प्रतिशत से घटकर 2024 में केवल 0.06 प्रतिशत रह गया।
राजस्थान ने भी बचपन से आगे टीकाकरण के दायरे को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। फरवरी 2026 में राष्ट्रीय HPV टीकाकरण अभियान की शुरुआत राजस्थान के अजमेर से की गई। इस अभियान का उद्देश्य 14 वर्ष की आयु की लड़कियों को सर्वाइकल कैंसर से बचाव के लिए HPV वैक्सीन उपलब्ध कराना है। देशभर में लगभग 1.15 करोड़ लड़कियों को सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों पर यह वैक्सीन निःशुल्क उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया है।
बचपन के बाद टीकाकरण क्यों जरूरी है?
फोर्टिस एस्कॉर्ट्स हॉस्पिटल, जयपुर के कंसल्टेंट – इंटरनल मेडिसिन, डॉ. अखिल गुप्ता ने बताया, “लोग अभी भी टीकाकरण को बचपन में पूरा होने वाली प्रक्रिया मानते हैं, जबकि हमारी रोग प्रतिरोधक क्षमता उम्र के साथ बदलती रहती है। उम्र बढ़ने के साथ कुछ संक्रमणों का जोखिम और उनकी गंभीरता बढ़ सकती है, विशेषकर उन लोगों में जिन्हें डायबिटीज या हृदय रोग जैसी पुरानी बीमारियां हैं। इसलिए अपने टीकाकरण इतिहास की डॉक्टर के साथ समय-समय पर समीक्षा करना भी नियमित स्वास्थ्य जांच का हिस्सा होना चाहिए।”
उम्र के साथ बदलती हैं टीकाकरण की जरूरतें
किशोरावस्था: किशोरों को HPV, डिप्थीरिया और टिटनेस जैसी बीमारियों से बचाव के लिए आवश्यक टीके लगवाने चाहिए। यदि बचपन में हेपेटाइटिस-B, टाइफाइड, MMR या चिकनपॉक्स के टीके छूट गए हों, तो डॉक्टर की सलाह के अनुसार कैच-अप टीकाकरण कराया जा सकता है।
गर्भवती महिलाएं: गर्भावस्था के दौरान मां और शिशु दोनों की सुरक्षा के लिए कुछ विशेष टीकों, जैसे Tdap और फ्लू वैक्सीन, की सलाह दी जा सकती है। वहीं, लाइव वैक्सीन से गर्भावस्था के दौरान सामान्यतः बचने की सलाह दी जाती है।
वयस्क: उम्र, पेशे, यात्रा, जीवनशैली और स्वास्थ्य स्थिति के आधार पर वयस्कों को Td बूस्टर, हेपेटाइटिस-A/B, HPV तथा वार्षिक फ्लू वैक्सीन जैसे टीकों की आवश्यकता हो सकती है। डायबिटीज या हृदय रोग जैसी स्वास्थ्य स्थितियों वाले लोगों में टीकाकरण की जरूरतों की डॉक्टर से विशेष समीक्षा महत्वपूर्ण है।
वरिष्ठ नागरिक: उम्र बढ़ने के साथ प्रतिरक्षा प्रणाली की क्षमता स्वाभाविक रूप से कम हो सकती है। ऐसे में इन्फ्लूएंजा और न्यूमोकोकल संक्रमण जैसी सांस संबंधी बीमारियां अधिक गंभीर हो सकती हैं। इसलिए डॉक्टर की सलाह के अनुसार वार्षिक फ्लू, न्यूमोकोकल और शिंगल्स जैसे टीकों पर विचार किया जाना चाहिए।
अगर कोई टीका समय पर नहीं लग पाया तो?
कई लोगों को यह गलतफहमी होती है कि किसी टीके की निर्धारित खुराक छूट जाने पर पहले से लगाए गए टीकों का प्रभाव समाप्त हो जाता है और पूरा टीकाकरण दोबारा शुरू करना पड़ता है। विशेषज्ञों के अनुसार, अधिकांश मामलों में ऐसा नहीं होता। डॉक्टर व्यक्ति के पिछले टीकाकरण रिकॉर्ड की समीक्षा कर यह तय कर सकते हैं कि केवल कैच-अप डोज या बूस्टर की आवश्यकता है।
राष्ट्रीय टीकाकरण जागरूकता माह के दौरान विशेषज्ञों का संदेश स्पष्ट है—टीकाकरण को केवल बचपन तक सीमित न समझें। अपने डॉक्टर से पूछें, “मेरी उम्र और स्वास्थ्य स्थिति के अनुसार मुझे आज कौन-से टीके लगवाने चाहिए?”
कुछ मिनट की यह बातचीत भविष्य में गंभीर संक्रमणों से बचाव में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। उम्र बढ़ने के साथ अपनी प्रतिरक्षा को मजबूत बनाए रखना स्वस्थ और सुरक्षित जीवन के लिए आवश्यक है।