राजस्थान की कला, शिल्प और लोककथाओं की झलक दिखाएगा गोवा का सेरेंडिपिटी आर्ट्स फेस्टिवल

जयपुर, अक्टूबर, 2026- गोवा में 13 से 20 दिसंबर तक आयोजित होने वाले सेरेंडिपिटी आर्ट्स फेस्टिवल में इस बार राजस्थान की कला,शिल्प और लोककथाओं की खास झलक देखने को मिलेगी। पणजी में होने वाले इस महोत्सव में देशभर की कला और संस्कृति से जुड़े कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। राजस्थान की ओर से कालबेलिया समुदाय की पारंपरिक कला, थार रेगिस्तान की एप्लीक कला और प्रसिद्ध राजस्थानी लेखक विजयदान देथा की कहानी पर आधारित नाटक ‘दोहरी जिंदगी’प्रस्तुत किया जाएगा।

ये आयोजन राजस्थान की पारंपरिक कला, कपड़ों से जुड़ी कहानियों और लोककथाओं को नए अंदाज में दर्शकों के सामने पेश करेंगे।

सेरेंडिपिटी आर्ट्स के संस्थापक एवं संरक्षक सुनील कांत मुंजाल ने कहा, “शुरुआत से ही हमारा प्रयास रहा है कि अलग-अलग कला विधाओं,विचारों और समुदायों को एक मंच पर लाया जाए। इस साल का कार्यक्रम भी इसी सोच को आगे बढ़ाता है। इसमें विभिन्न क्षेत्रों, पीढ़ियों और कला विधाओं से जुड़े प्रोजेक्ट शामिल हैं। हमें उम्मीद है कि परंपरा और नए प्रयोगों के मेल से दर्शकों को कुछ अलग और दिलचस्प अनुभव मिलेंगे। हमारा उद्देश्य है कि लोग कला को खुले मन से देखें और यहां से एक नया नजरिया लेकर लौटें।”

कालबेलिया कला से लेकर विजयदान देथा की कहानी तक

महोत्सव में ‘डिस्कार्ड्स: हेल्ड इन रिपेयर’के तहत कालबेलिया क्राफ्ट रिवाइवल प्रोजेक्ट पेश किया जाएगा। इसमें कलाकार जुही शर्मा के साथ कालबेलिया समुदाय की लाड बाई, छोटी बाई, सुशीला बाई और काली बाई शामिल हैं। श्रेयांसी सिंह के क्यूरेशन में तैयार इस प्रोजेक्ट के जरिए कपड़ों की मरम्मत और सिलाई की पारंपरिक कला को दिखाया जाएगा। यह प्रोजेक्ट बताता है कि पुराने कपड़ों से भी परिवार, विरासत और जीवन से जुड़ी कई यादें जुड़ी होती हैं।

राजस्थान की पारंपरिक कला को ‘इकोज ऑफ व्हाइट’प्रोजेक्ट में भी जगह दी गई है। क्षितिज झालोरी के क्यूरेशन में तैयार इस प्रोजेक्ट में थार की एप्लीक कला के साथ जामदानी, चिकनकारी, पारसी कढ़ाई, जरदोजी और आरी वर्क जैसी कलाओं को शामिल किया गया है। इसके तहत तैयार कपड़ों के पैनलों में तेजी से खत्म हो रही ट्रॉपिकल वनस्पतियों को दिखाया गया है। इस तरह यह प्रोजेक्ट पारंपरिक हस्तकला के जरिए प्रकृति और पर्यावरण से जुड़े मुद्दों पर भी ध्यान आकर्षित करता है।

राजस्थान के साहित्य और लोककथाओं को भी इस महोत्सव में खास जगह मिलेगी। प्रसिद्ध लेखक विजयदान देथा की कहानी पर आधारित नाटक ‘दोहरी जिंदगी’का क्यूरेशन महेश दत्तानी ने किया है। पारंपरिक कावड़ कथा शैली से प्रेरित यह नाटक राजस्थान की कहानी कहने की परंपरा को आधुनिक रंगमंच के साथ जोड़ता है।

ये तीनों प्रोजेक्ट दिखाते हैं कि किस तरह राजस्थान की सांस्कृतिक विरासत कला, शिल्प और कहानियों के जरिए आज भी आगे बढ़ रही है और नई पीढ़ी तक पहुंच रही है।

सेरेंडिपिटी आर्ट्स की सह-संस्थापक एवं संरक्षक शेफाली मुंजाल ने कहा, “इस साल के महोत्सव की खास बात नए अनुभवों और चीजों को जानने का अवसर है। दर्शक किसी नाटक, प्रदर्शनी, संगीत कार्यक्रम, बातचीत या खानपान के जरिए महोत्सव से जुड़ सकते हैं। कलाकार अपनी परंपराओं और अनुभवों से प्रेरणा लेकर आज के समय से जुड़े मुद्दों को सामने ला रहे हैं। इससे कार्यक्रम में विविधता भी आती है और हमारी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़ाव भी बना रहता है। हम चाहते हैं कि दर्शक यहां अपने पसंद के विषयों और अनुभवों से जुड़ सकें।”

कला, संगीत, थिएटर और खानपान के होंगे कई आयोजन

राजस्थान की कला और लोककथाओं के अलावा महोत्सव में पेंटिंग, संगीत, थिएटर, डांस, डिजाइन और खानपान से जुड़े कई कार्यक्रम आयोजित होंगे। थिएटर में ‘बेली ऑफ द बीस्ट’और ‘द क्वीन’प्रमुख आकर्षण होंगे। वहीं, संगीत प्रेमियों को लोक-रॉक बैंड स्वरत्मा की प्रस्तुति और ‘त्रिलोक गुर्टू द्वारा शोभा गुर्टू को संगीतमय श्रद्धांजलि’सुनने का मौका मिलेगा।

खानपान से जुड़े कार्यक्रमों में अलग-अलग क्षेत्रों के व्यंजनों, पारंपरिक पकवानों और स्थानीय सामग्रियों के बारे में जानने का अवसर मिलेगा। इस तरह महोत्सव कला और संगीत के साथ भारतीय खानपान की विविधता से भी दर्शकों को रूबरू कराएगा।

सेरेंडिपिटी आर्ट्स की निदेशक स्मृति राजगढ़िया ने कहा, “इस साल के कार्यक्रम को तैयार करते समय यह देखना दिलचस्प रहा कि कलाकार अपने-अपने अंदाज में आज के मुद्दों को किस तरह पेश कर रहे हैं। कला के अलग-अलग माध्यमों में इतिहास, परंपरा, पहचान और बदलती जीवनशैली को नए तरीके से समझने और दिखाने की कोशिश की गई है। हमारा प्रयास रहा है कि कलाकारों को नए प्रयोग करने का अवसर मिले और दर्शक भी इन प्रस्तुतियों को अपने नजरिए से समझ सकें। यही विविधता इस महोत्सव को खास बनाती है।”

दिसंबर में गोवा घूमने का बनाएं खास प्लान

प्रदर्शनियों, संगीत, थिएटर, हस्तशिल्प, डांस, डिजाइन और खानपान के साथ सेरेंडिपिटी आर्ट्स फेस्टिवल गोवा घूमने आने वाले लोगों के लिए एक खास अनुभव होगा। राजस्थान की पारंपरिक कलाओं से लेकर देशभर के कलाकारों की नई प्रस्तुतियों तक, इस महोत्सव में दर्शकों को भारतीय कला और संस्कृति के कई रंग देखने को मिलेंगे।

महोत्सव में शामिल होने के लिए रजिस्ट्रेशन शुरू हो चुका है। इच्छुक लोग serendipityartsfestival.com/register पर जाकर रजिस्टर कर सकते हैं।

सेरेंडिपिटी आर्ट्स के बारे में

सेरेंडिपिटी आर्ट्स एक गैर-लाभकारी संस्था है, जो दक्षिण एशिया में कला, शोध और सांस्कृतिक गतिविधियों को बढ़ावा देती है। संस्था का उद्देश्य कला के जरिए लोगों के बीच संवाद और आपसी समझ को बढ़ाना है।

संस्था अनुदान, रेजिडेंसी कार्यक्रमों, संयुक्त कला परियोजनाओं और लेखन पहलों के माध्यम से नए और अनुभवी कलाकारों को सहयोग देती है। पेंटिंग, संगीत, थिएटर, डांस, हस्तशिल्प और फोटोग्राफी सहित कई कला क्षेत्रों में काम करने वाले कलाकार इसके कार्यक्रमों से जुड़े हैं। इसके साथ ही संस्था कला शिक्षा और पर्यावरण के प्रति जागरूकता को भी बढ़ावा देती है।

सेरेंडिपिटी आर्ट्स हर साल गोवा के पणजी में सेरेंडिपिटी आर्ट्स फेस्टिवल का आयोजन करती है। यह दक्षिण एशिया के प्रमुख मल्टीडिस्प्लीनरी कला महोत्सवों में से एक है। आम लोगों के लिए निःशुल्क आयोजित होने वाला यह महोत्सव कलाकारों, कला संस्थानों और दर्शकों को एक मंच पर लाता है और भारतीय कला एवं संस्कृति के विभिन्न रूपों को सामने लाने का काम करता है।

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