स्त्रियों के उल्लास का त्योहार सिंजारा 2 अगस्त को

आज यानी 2 अगस्त को राजस्थान सहित देश के अनेक भागों में सिंजारा और 3 अगस्त को हरियाली तीज उत्सव मनाया जाएगा। तीज श्रावण मास में शुक्ल पक्ष तृतीया को मनाई जाती है। यह मुख्य रूप से स्त्रियों के उल्लास का त्योहार है। इस समय तक बारिश का आगमन हो चुका होता है और धरती पर चारों ही तरफ हरियाली की चादर बिछ जाती है। ऐसे में स्त्रियों के समूह गीत गाकर झूला झूलते हैं। हरियाली के वातावरण में चारों तरफ उत्सव का वातावरण रहता है जिसे हरियाली तीज कहा जाता है। हरियाली तीज राजस्थान में विशेष रूप से मनाई जाती है।
हरियाली तीज पर मां पार्वती का पूजन परिवार में शांति और सुख लाता है। समस्त उत्तर-भारत में तीज पर्व बड़े उत्साह और धूमधाम से मनाया जाता है। बुंदेलखंड के जालौन, झांसी, महोबा और ओरछा जैसे क्षेत्रों आदि क्षेत्रों में इसे हरियाली तीज के नाम से व्रतोत्सव के रूप में मानते हैं।
तीज भारत के अनेक हिस्सों में मनाई जाती है परंतु राजस्थान की राजधानी जयपुर में इसका विशेष रंग देखने को मिलता है। तीज के आगमन को भीषण ग्रीष्म ऋतु के बाद पुनर्जीवन के रूप में देखा जाता है। तीज के दिन वर्षा का होना इसके उत्सवी रंग को और भी बढ़ा देता है। इस त्योहार पर लड़कियों को ससुराल से पीहर आने का न्योता भेजा जाता है।
विवाह के पश्चात जब पहला सावन आता है तो लड़कियों को उसका उत्सव पीहर में मनाने के लिए आमंत्रित किया जाता है। नवविवाहिता लड़की को ससुराल से इस त्योहार पर सिंजारा भेजा जाता है। हरियाली तीज से एक दिन पहले सिंजारा मनाया जाता है।
सिंजारा यानी इस दिन नवविवाहिता लड़की को ससुराल से वस्त्र, आभूषण, शृंगार का सामान, मेहंदी और मिठाई भेजी जाती है। स्त्रियां इन सभी वस्तुओं का उपयोग करके अपना श्रृंगार करती हैं।
राजस्थान में जिन कन्याओं की सगाई हो गई होती है उन्हें अपने भावी सार-ससुर से तीज से एक दिन पहले ही भेंट मिलती हैं। इस भेंट को भी शिंझार या शृंगार कहते हैं। इसमें मेहंदी, लाख की चूडिय़ां, लहरिया नामक विशेष वेशभूषा और घेवर नामक मिष्ठान्न शामिल होता है।
तीज के दिन सबसे प्रमुख कार्य होता है खुले स्थान पर बड़े-बड़े वृक्षों की शाखाओं पर झूला डालना। झूला महिलाओं को मुदित होने का मौका देता है। झूला झूलते हुए वे अपने तमाम दुखों को विस्मृत करती हैं और उललास से भर जाती हैं। मल्हार गाते हुए मेहंदी रचे हाथों से झूले की रस्सी पकडकर झूलना उन्हें खुश होने का मौका देता है।
तीज पर स्त्रियां पति के दूर देश से लौट आने की कामना करती हैं। यह उनके लोकगीतों में भी मुखरित होता है। तीज पर तीन बातें त्यागने का विधान है जिनमें पति से छल-कपट, झूठ व दुव्र्यवहार और परनिंदा शामिल हैं।

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