अधर्म पर धर्म अहंकार पर विनम्रता असत्य पर सत्य की विजय का पर्व विजयादशमी Part 1

j k garg
“दशहरा”संस्कृत शब्द ’दश’ व’ हरा’ से मिल कर बना है | दशहरा का दूसरा मतलब भगवान राम के द्वारा रावण के दसों सिर जो दस पापों और दस तामसी आदतों के सूचक हैं यानि काम, क्रोध, लोभ, मोह मद, मत्सर, अहंकार, आलस्य, हिंसा और चोरी इन सभी को समूल नष्ट करके हमको राक्षस राजा राज के आंतक अनाचार से मुक्ति दिलाने से है। यह भी सत्य है कि भगवान श्रीराम ने रावण से युद्ध करके उसको आश्विन शुक्ल दशमी के दिन पराजित करके उसका का वध किया था इसीलिए प्रतिवर्ष आश्विन शुक्ल को विजयादशमी के रूप सनातन धर्मी मनाते हैं | विजयदशमी को हम अन्याय पर न्याय की विजय सौहार्द की अहंकार की पराजय दिन के रूप में मनाते है। ध्यान रक्खें कि विजयदशमी मात्र इस बात का प्रतीक नहीं है कि अन्याय पर न्याय अथवा बुराई पर अच्छाई की विजय हुई थी किन्तु वास्तविकता में विजया दशमी का दिन हमें बुराई में भी अच्छाई ढूँढने का अवसर है। रावण वध के बाद स्वयं भगवान राम ने अपने छोटे भाई लक्ष्मण को रावण के पास जाकर रावण से राजनीति सीखने और गूढ़ ज्ञान प्राप्त करने का आदेश दिया था | रावण ने लक्ष्मणजी को तीन सीख दी पहली शत्रु को कभी छोटा नहीं समझना चाहिए दुसरी शुभ कार्य जितनी हो जल्दी कर देना चाहिये तीसरा अपने जीवन का कोई राज किसी को भी नहीं बतलाना चाहिये रावण ने लक्ष्मणजी को कहा कि यहां भी मैं चूक गया क्योंकि विभीषण मेरी मृत्यु का राज जानता था, ये मेरे जीवन की सबसे बड़ी गलती थी | आईये आज हम सभी विजयादशमी को मनाये तामसी प्रवत्तियो पर सात्विक प्रव्रत्तियों के विजय दिवस के रूप में (जीवन में काम,क्रोध,लोभ, मद मत्सर, अहंकार, आलस्य, हिंसा और चोरी को त्याग कर स्नेह प्रेम और विनम्रता अपनाने के पर्व के रूप में मनायें |

Leave a Comment

This site is protected by reCAPTCHA and the Google Privacy Policy and Terms of Service apply.

error: Content is protected !!