
मासिक शिवरात्रि तिथि
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ज्येष्ठ, कृष्ण चतुर्दशी 28 मई 2022, शनिवार
शिवरात्रि प्रारंभ: 28 मई 2022 दोपहर 01:09 बजे
शिवरात्रि समाप्त: 29 मई 2022 दोपहर 02:54 बजे
मासिक शिवरात्रि का महत्व
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मासिक शिवरात्रि का व्रत शक्तिशाली और शुभ माना जाता है। इस व्रत को रखने से स्त्री-पुरुष का जीवन बेहतर होता है। मान्यता है कि शिव मंत्र ॐ नमः शिवाय का पूरे दिन और रात जप करने से व्यक्ति की सभी मनोकामना पूर्ण होती है। जो भक्त इस दिन उपवास करता है, उसे मोक्ष, मुक्ति की प्राप्ति होती है और वह स्वस्थ और समृद्ध जीवन व्यतीत करता है।
मासिक शिवरात्रि पर ऐसे करें पूजन
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सर्वप्रथम सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि करने के बाद साफ कपड़े पहने।
घर के मंदिर में दीप प्रज्वलित करें।
अगर घर में शिवलिंग है तो शिवलिंग का गंगा जल, दूध, आदि से अभिषेक करें। बेल पत्र चढ़ाए।
भगवान शिव के साथ ही माता पार्वती की पूजा अर्चना भी करें।
भगवान भोले और मां पार्वती को भोग लगाए।
भोलेनाथ का अधिक से अधिक ध्यान करें।
ऊॅं नम: शिवाय मंत्र का जप करें।
हवन करें फिर भगवान शिव की आरती करें।
पूजा में भगवान भोलेनाथ को अक्षत यानि चावल अर्पित करते समय ध्यान रहे चावल खंडित यानि टूटा ना हो।
इन उपायों से शिवजी होंगे प्रसन्न
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घर की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने के लिए और आने वाले संकटों से बचने के लिए भगवान शिव की आराधना करनी चाहिए।
भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए स्नानादि करके सफेद, हरे, पीले, लाल या आसमानी रंग के वस्त्र धारण करके पूजा करें।
पूजा में भगवान भोलेनाथ को अक्षत यानि चावल अर्पित करते समय ध्यान रहे चावल खंडित यानि टूटा ना हो।
मासिक शिवरात्रि के दिन दही, सफेद वस्त्र, दूध और शक्कर का दान करना श्रेष्ठ माना जाता है, इन चीजों का दान करने से भगवान भोलेनाथ अपने भक्तों पर प्रसन्न होते हैं।
मासिक शिवरात्रि के दिन अक्षत, चंदन, धतूरा, दूध, आक, गंगा जल, और बेल पत्र आदी चढ़ाना चाहिए। इससे भगवान शिव प्रसन्न होते हैं और अपना शुभ आशीर्वाद देते हैं।
यदि कोई जातक आर्थिक तंगी से गुजर रही हैं तो उन्हें मासिक शिवरात्रि की शाम को कच्चे चावल में काले तिल मिलाकर दान करना चाहिए। इस उपाय से घर में धन-धान्य के भंडार भी भरे रहेंगे।
मासिक शिवरात्रि पौराणिक कथा
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पौराणिक कथा और धार्मिक ग्रंथों के अनुसार भगवान शिव महाशिवरात्रि पर मध्य रात्रि के समय शिव लिंग के रूप में प्रकट हुए थे। जिसके बाद सबसे पहले भगवान ब्रह्मा और भगवान विष्णु ने उनकी पूजा की थी। उस दिन से लेकर आज तक इस दिन को भगवान शिव के जन्म दिवस के रूप में बड़े ही धूम-धाम से मनाया जाता है। इस दिन शिव पूजन का खास महत्व है। शास्त्रों के अनुसार अपने जीवन के उद्धार के लिए माता लक्ष्मीं, सरस्वती, गायत्री, सीता, पार्वती तथा रति जैसी बहुत-सी देवियों और रानियों ने भी शिवरात्रि का व्रत किया था। मान्यता है कि मासिक शिवरात्रि जीवन में सुख और शांति प्रदान करता है और भगवान शिव की कृपा दृष्टि से उपासक के सारे बिगड़े काम बन जाते है।
राजेन्द्र गुप्ता,
ज्योतिषी और हस्तरेखाविद
मो. 9611312076
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