कुछ पोंगा पंडितो ने बिगाड़े त्योहार के मायने, त्योहारों का बना दिया मजाक

हिन्दू धर्म की इससे बड़ी विडंबना क्या होगी की वो अपने त्योहार भी एक साथ मिल जुल कर नही मना सकते । कुछ अज्ञानी, कम जानकार, छपास के रोगी, पोंगा पंडितो द्वारा जब भी कोई हिन्दू त्योहार आता है तब उसके कुछ दिन पहले से सोशियल मिडीया पर अपना भाषण चालू कर देते है , … Read more

मस्तिष्क और मन (Mind & Brain)

हमारा मन या माइंड अपने आप में अति विचित्र है, इसके भीतर हमेशा भिन्न प्रकार की सोच निरंतर उछल-कूद करती ही रहती है इसीलिए मन की तुलना बन्दर से भी कीजा सकती है | माइंड या मन में विचारों का अथाह समुद्र भी होता है इसलिए कुछ लोग मन या माइंड को विचारों की खदान … Read more

मां ने देखा सपना, बेटी ने पा ली मंजिल

जोबनेर की अनिता कुमावत का कृषि वैज्ञानिक पद पर चयन, देशभर में चैथी रैंक ऽ बाबूलाल नागा ऽ आंखों में सपने और कुछ कर गुजरने का जज्बा हो तो मंजिल कितनी ही दूर क्यों ना हो उस पर सफलता पाई जा सकती है। और इस सफलता के पीछे अगर किसी मां का सपना जुड़ा हो … Read more

मस्तिष्क और मन (Mind & Brain)

जब कभी भी आप का मन या ह्रदय बैचेन या विचलित हो जाय, तब आप अपने आप से कहें कि जीवनशक्ति (लाइफफ़ोर्स जो समस्त विश्व ( की देख भाल करती है वही शक्ति आपकी भी देख भाल और | रक्षा करेगी,ऐसा सोचने से आप स्वयं देखगें कि आपकी सारी निराशा एवं चिन्ताएं खत्म हो गई … Read more

मरुधरा में बेटी के जन्म पर भी मनाया जाता है उत्सव

-पूनम खण्डेलवाल बालिका समुचित ६िाक्षा प्राप्त कर न केवल स्वयं का विकास करती है अपितु अगली पीढ़ी के लिए भी ६िाक्षा एवं संस्कार की वाहक बनती है। मरूधरा राजस्थान में भी बेटियाँ को पढ़ लिखकर आगे बढने के पर्याप्त अवसर दिए जा रहे है जिससे परिवार, समाज एवं दे६ा भी प्रगति के मार्ग पर अग्रसर … Read more

राज्यवर्धन सिंह राठौड़ के हाथ राजस्थान में स्वर्ण लग सकता है

एथेंस ओलम्पिक 2002 में रजत पदक जीतकर देश को गौरवान्वित करने वाले श्री राज्यवर्धन सिंह राठौड़ साहब के हाथ राजस्थान में स्वर्ण लग सकता है। कर्नल राठौड़ ने अपनी राजनीतिक पारी की शुरुआत 2013 में की, जब उन्होंने सेना से सेवानिवृत्ति लेकर भारतीय जनता पार्टी की सदस्यता ग्रहण की। 2014 के आम चुनाव में श्री … Read more

भगवा भारत

मान गए ज़नाब, शून्य से शिखर का सफर बहुत जल्द तय किया है भाजपा ने। और त्रिपुरा की इस प्रचंड जीत ने फिर मेरी उस सोच को दुरुस्त किया है जो कहती है कि लगभग 2024 तक को मोदी-शाह की जोड़ी अपराजेय है। मेरा मानना है कि किसी चुनाव में सफलता के लिए चार “M” … Read more

सरकार से मुकदमेबाजी की संस्कृृृृति का पनपना

सरकार से मुकदमेबाजी का बढ़ता प्रचलन एक समस्या बनता जारहा है। सरकार अपने स्तर पर अथवा संसद के जरिये जो भी फैसले ले रही हैं उनके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंचनेे का अर्थ देश की न्याय व्यवस्था को बोझिल बनाने के साथ-साथ सरकार के शासन को बाधित करना है। इन विडम्बनापूर्ण स्थितियों का बढ़ना न तो … Read more

धर्मगुरुओं की बढ़ती महत्वाकांक्षाओं से मुक्ति मिले

आज धर्म एवं धर्मगरुओं का व्यवहार एवं जीवनशैली न केवल विवादास्पद बल्कि धर्म के सिद्धान्तों के विपरीत हो गयी है। नैतिक एवं चरित्रसम्पन्न समाज बनाने का नारा देकर तथाकथित धर्मगुुुरुओं ने अपने भौतिक एवं आर्थिक साम्राज्य के विस्तार के लिये अशांति, अपवित्रता, असन्तलन एवं अंधकार को फैलाया है। राजनीति की ओर उनकी रवानगी, उनका व्यवसायी … Read more

इसीलिए त्योहार सुहाते

कुछ कड़वी , कुछ मीठी बातें , फिर क्यों ये त्योहार सुहाते ? आती है हर वर्ष दिवाली , कर देती है जेबें खाली । ईद बहुत खर्चीली होती , फिर भी सबके मन का मोती । निर्धन कर्ज़दार बन जाते , फिर क्यों ये त्योहार सुहाते ? होली मस्ती भरा पर्व है , बोलो … Read more

तू देख तमासा मेरा भी

संसद में बैंकों के एन. पी. ऐ. पर प्रधानमंत्री के भाषण से लगता है कि इस व्यक्ति की करनी और कथनी में कितना फर्क है यह वयक्ति अपनी कथनी के शब्दों में मानवीय मूल्यों की ईमानदारी की चिकट से चिकना दिखाने में प्रयासरत रहता है जबकि इसकी करनी मूल रूप से केवल राजनीतिक और द्वेषता … Read more