भक्त, अंधभक्त और पागलपंत

देवेन्द्रराज सुथार
कल शर्मा जी गली के नुक्कड़ पर मिले। हमसे कहने लगे हमारी तो आस्था भगवान-वगवान में बिलकुल भी नहीं है। मैं तो बिलकुल ही घोर नास्तिक हूं। मैंने कहा – चलो, भाई ! जिसकी जैसी सोच। फिर अगले दिन शर्मा जी को मंदिर में अपनी धर्मपत्नी के साथ हवन कराते हुए देखकर मेरी आंखें फटी की फट Read more

गैर-आदिवासी को आदिवासी बनाने की कुचेष्टा क्यों?

गणि राजेन्द्र विजय
इन दिनों समाचार पत्रों एवं टी​​वी पर प्रसारित समाचारों से यह जानकर अत्यंत दुख हुआ कि गुजरात में लंबे समय से गैर आदिवासियों को आदिवासी सूची में शामिल करने की कुचेष्टाएं चल रही हैं। राजनीति लाभ के लिये इस तरह आदिवासी जनजाति के अधिकारों एवं उनके लिये बनी लाभकारी योजनाओं को किसी Read more

हर कदम चुनाव को देखते उठाया जाता है

ओम माथुर
कोई व्यापारी संगठन या अन्य इस बात की गलतफहमी नहीं पालेे कि आज सरकार ने जीएसटी में जो संशोधन किए हैं उसका कारण उनका आंदोलन रहा है । यशवंत सिन्हा और अरुण शौरी भी इस भ्रम मे ना रहे कि सरकार ने उनके बयान के दबाव मे आकर यह कदम उठाया है। यह तो अगले महीने होने जा रहे गुजरात विधानस Read more

टॉयलेट से ताजमहल तक

देवेन्द्रराज सुथार
हमारी सरकार टॉयलेट बनाने पर आमादा है। यूं कहे कि सरकार ने टॉयलेट बनाने का ठेका ले रखा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जहां जाते है, वहां शुरू हो जाते है – भाईयों और बहनों और मित्रों ! टॉयलेट बनाया कि नहीं ? ”शौच है वहां सोच है“ सरकार का जब ध्येय होगा तो एक दिन पूरा देश श Read more

”ऐ चाँद तुम जल्दी से आ जाना”

प्रिया वच्छानी
ऐ चाँद तुम जल्दी से आ जाना भूखी प्यासी मैं दिन भर की बेकरार छलनी से करूँगी साजन का दीदार शर्म लाल होंगे तब मेरे रुखसार पिया मिलन में देर न लगा जाना ऐ चाँद तुम जल्दी से आ जाना मेहंदी रचे हाथ, सजे कंगन के साथ पूजा का थाल, और ले करवा हाथ मांगूगी तुमसे रहे सजना सदैव साथ लंबी उम Read more

अमेरिका में क्यों है इतनी हिंसक मानसिकता?

lalit-garg
आधुनिक सभ्यता की सबसे बड़ी मुश्किल यही है कि यहां हिंसा इतनी सहज बन गयी है कि हर बात का जवाब सिर्फ हिंसा की भाषा में ही दिया जाता है। देश एवं दुनिया में हिंसा का परिवेश इतना मजबूत हो गया है कि आज अपने ही घर में हम इतने असुरक्षित हो गए हैं कि हर आहट पर किसी आतंकवादी हमले या फि Read more

आखिर राजनीति भी फुटबॉल मैच ही तो है

शिव शंकर गोयल
कहने को तो देश में, अक्टूबर में, पहली बार “फीफा” (17 वर्ष तक की आयु के 24 देशों के खिलाडियों का फुटबॉल टूर्नामेंट) हो रहा है और यह भी कहते है कि विश्व फुटबॉल में हमारी रेंकिग काफी नीचे है लेकिन कुछ अन्य विशेषज्ञों की राय इससे भिन्न है. उनका कहना है कि फुटबॉल के खेल में तो हम Read more

संविधान की धरा 21 A और शिक्षक

sohanpal singh
महाराष्ट्र जो भारत के समृद्ध प्रदेशो की सूची पे अग्रणी प्रदेशो की अग्रणी सूचि में आता है लेकिन आज टीवी पर अमिताभ बच्चन द्वारा प्रस्तुत कार्य क्रम ” कौन बनेगा करोड़ पति ” देख कर ऐसा लगा की महाराष्ट्र तो गरीबी भुखमरी से जूझ रहे ओडिसा से भी पीछे है ? Read more

गांधी जी का चौथा बंदर

देवेन्द्रराज सुथार
माने तो जाते है गांधी जी के तीन बंदर लेकिन आजकल चौथे बंदर का फोग चल रहा है। या यूं कहे तो भी अतिश्योक्ति नहीं होगी कि इस चौथे बंदर के आगे तीनों बंदरों का वर्चस्व डाउन हो गया है। यह चौथा बंदर कमाल और धमाल है। इसकी आदतें और हरकतें बाकि के तीन बंदरों से बिलकुल ही भिन्न है। यह त Read more

दशानन के कई रूप

sohanpal singh
मेरे पौत्र ने पूंछा की रावण को इस प्रकार क्यों मारा और जलाया जाता है ? हम बोले बेटा अभी तुम छोटे हो बड़े होकर खुद समझ जाओगे लेकिन वो मानने को तैयार ही नहीं है , अब हम क्या करते हमने कहा की तुम ऐसे समझो की रावण श्रेष्ठ ब्राह्मण और शास्त्रो का ज्ञाता था सभी विध्या में निप Read more

सपने में रावण से वार्तालाप

देवेन्द्रराज सुथार
मैें स्वप्नदर्शी हूं। इसलिए मैं रोज सपने देखता हूं। मेरे सपने में रोज-ब-रोज कोई न कोई सुंदर नवयुवती दस्तक देती है। मेरी रात अच्छे से कट जाती है। वैसे भी आज का नवयुवक बेरोजगारी में सपनों पर ही तो जिंदा है। कभी कभी डर लगता है कि कई सरकार सपने देखने पर भी टैक्स न लगा दे। खैर ! Read more