सवा लाख से एक लड़ावाँ ताँ गोविंद सिंह नाम धरावाँ

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“चिड़ियाँ नाल मैं बाज लड़ावाँ गिदरां नुं मैं शेर बनावाँ सवा लाख से एक लड़ावाँ ताँ गोविंद सिंह नाम धरावाँ” सिखों के दसवें गुरु श्री गोविंद सिंह द्वारा 17 वीं शताब्दी में कहे गए ये शब्द आज भी सुनने या पढ़ने वाले की आत्मा को चीरते हुए उसके शरीर में एक अद्भुत शक्ति का स Read more

जीवन से खिलवाड़ करती मिलावट की त्रासदी

lalit-garg
मिलावट करने वालों को न तो कानून का भय है और न आम आदमी की जान की परवाह है। दुखद एवं विडम्बनापूर्ण तो ये स्थितियां हंै जिनमें खाद्य वस्तुओं में मिलावट धडल्ले से हो रही है और सरकारी एजेन्सियां इसके लाइसैंस भी आंख मूंदकर बांट रही है। जिन सरकारी विभागों पर खाद्य पदार्थों की क्वॉल Read more

बड़े – बड़ों की शादी और बीमारी …!!

तारकेश कुमार ओझा
पता नहीं तब अपोलो या एम्स जैसे अस्पताल थे या नहीं, लेकिन बचपन में अखबारों में किसी किसी चर्चित हस्ती खास कर राजनेता के इलाज के लिए विदेश जाने की खबर पढ़ कर मैं आश्चर्यचकित रह जाता था। अखबारों में अक्सर किसी न किसी बूढ़े व बीमार राजनेता की बीमारी की खबर होती । साथ में उनके इ Read more

देवी नागरानी की अंग्रेजी रचना का रजनी मोरवाल द्वारा हिंदी अनवुाद

रजनी मोरवाल
मूल इंग्लिश: देवी नागरानी The music of my heart Listen to my Heart Beat I am the singing melody of my Land That gently tunes in rhythm Wrapping me in her essence. My thoughts dance in tune With the melody of my heart beat In the Canopy of fragrance They dance as daisies in m Read more

कलेक्टरेट में एडीशनल चूहा

शिव शंकर गोयल
….परन्तु वह तो मेरे से जूनीयर है. उसके यहां मेरे चेम्बर से एक चूहा ज्यादा कैसे ? कलक्टर साहब को रह रहकर यही बात कचोट रही थी. वह अपने कक्ष में बैठे बैठे सोच में डूबे हुए थे कि कही चूहों को पकडने या गणना करने वालों से कोई गलती तो नही होगई ? वैसे प्रसिध्द व्यंग्य लेखक हर Read more

“न दे उसका भी भला”

हेमंत उपाध्याय
बचपन में 50 वर्ष पूर्व मेरे पैतृक ग्राम कालमुखी (जिला-खंडवा) में सायंकाल में एक भिखारी दर्द भरी आवाज में भीख माँग रहा था। दे दे अलाह के नाम पर दे दे। माँ ने कहा- बेटा एक रोटी पर सुखी सब्जी व गुड़ रखकर उसे दे दो । इसी ब Read more

जातिगत राजनीति

कल्पित हरित
“राजनीति से बड़ा कोई धर्म नहीं और धर्म से बड़ी कोई राजनीति नहीं ” राम मनोहोर लोहिया जी का कथन आज भी भारतीय राजनीत में सटीक बैठता है | भारतीय समाज तो धर्म से आगर बढ़कर भी कई जातियों में बंटा है जहा हर जाति अपने तौर पर अपने लोगो के अधिकार के लिए संघर्षरत है और इनका ये संघर्ष किस Read more

बड़े – बड़ों की शादी और बीमारी …!!

तारकेश कुमार ओझा
पता नहीं तब अपोलो या एम्स जैसे अस्पताल थे या नहीं, लेकिन बचपन में अखबारों में किसी किसी चर्चित हस्ती खास कर राजनेता के इलाज के लिए विदेश जाने की खबर पढ़ कर मैं आश्चर्यचकित रह जाता था। अखबारों में अक्सर किसी न किसी बूढ़े व बीमार राजनेता की बीमारी की खबर होती । साथ में उनके इ Read more

नौ माह बाद भी सत्ता परिर्वतन की छाप नहीं

sanjay-saksena
योगी राजः सत्ता नई, मिजाज वही – संजय सक्सेना, लखनऊ – उत्तर प्रदेश की सियासत क्या एक बार फिर करवट ले रही है। जो भाजपा अपनी प्रतिद्वंदी सपा-बसपा को खत्म मान कर चल रही थीं,वह ही सपा-बसपा योगी सरकार की खामियों और नीतियों का फायदा उठाकर एक बार फिर अपना ‘सिर’ उठाने ल Read more

स्वप्न मेरे उसके काजल में रहते हैं

सुरेन्द्र चतुर्वेदी
स्वप्न मेरे उसके काजल में रहते हैं, बच्चे ज्यों माँ के आँचल रहते हैं . बूढ़े पीपल ने बतलाया उसके सब, नाती-पोते तो जंगल में रहते हैं. सह सकते जो धूप ,अनिश्चय ,प्यास,चुबन, वो अपने दम पर मरुथल में रहते हैं. मोर और खेतों के रिश्ते रूहानी, दोनों के ही सुख बादल में रहते हैं कमल एक Read more

गाली प्रतियोगिता की झलक

शिव शंकर गोयल
श्री मणिशंकर अय्यर द्वाराकिये गए नवीनतम उवाच के संदर्भ में व्यंग्य आपको यह जानकर प्रसन्नता होगी कि सदा की भांति इस बार भी अखिल भारत गाली प्रतियोगिता का आयोजन, देष के राजनीतिक अखाडें में होनेवाला हैं. इसमें हिन्दुस्तान के दोनों ही प्रमुख दलों के जाने-माने और देष के सर्वोच् Read more