चातुर्मास द्वार है आत्मोन्नति और जीवन-परिवर्तन का
भारत की आध्यात्मिक परम्पराओं ने मानव जीवन को केवल भौतिक उपलब्धियों तक सीमित नहीं माना, बल्कि उसे आत्मबोध, चरित्र-निर्माण और चेतना के उत्कर्ष की यात्रा के रूप में देखा है। इसी दृष्टि का एक अद्वितीय और कालजयी उपहार है चातुर्मास। यह केवल चार महीनों का धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि आत्मा के परिष्कार, मन के अनुशासन, … Read more