आस्था का सवाल है

शर्मा जी को आप जानते ही हैं। जो सुबह मोर्निंग वॉक पर सुस्ताते मिलते हैं। चाय की दुकान पर चाय और अखबार दोनों साथ पी रहे होते हैं। घरवाले और बाहर वालो के अलावा उनकी इज्जत सब करते हैं। वे धर्म, राजनीति, समाज, खेल, व्यापार, शिक्षा, साहित्य, हर विषय पर समान अधिकार से घंटो बोल … Read more

अकेलेपन की समस्या से जूझता समाज

संचार के बढ़ते साधनों के बीच अकेलापन आधुनिक जीवन की त्रासदी बनती जा रही है। विडम्बनापूर्ण एवं भयावह अकेलापन आधुनिक जीवन की एक बड़ी सच्चाई है। यह न केवल भारत की समस्या है बल्कि दुनिया भी इससे त्रस्त एवं पीड़ित है। समस्या इतनी बड़ी है कि इससे निपटने के लिए ब्रिटिश सरकार ने तो बाकायदा … Read more

60 करोड़ या 600 करोड़

वैसे तो भक्त लोगों को मेरी पोस्ट उनके भगवन के लिए नकारात्मक ही लगती है और इसके लिए वो लोग गाली गलौज भी करने से बाज नहीं आते ? लेकिन हमें भी आलोचना करने का मशाला उनके बॉस दे ही देते है , बात अभी ताजी ताजी है उधर डावोश में प्रधान सेवक जी निवेशकों … Read more

इन्सान की खुशहाली और उत्तम स्वास्थ्य का सबसे बड़ा दुश्मन—क्रोध

क्या हम अपने आप को क्रोध मुक्त इंसान बना सकते हैं अगर हाँ तो कैसे ? क्या आप भी उन लोगों में शामिल हैं जो यह मानते हैं कि “ क्रोध किए बिना आप अपना काम करवा ही नहीं सकते हैं ? क्यों हम उन लोगों पर क्रोधित हो जाते हैं जो हम पर प्रत्यक्ष … Read more

निर्लिप्त हूँ

देह की तिलिस्मी आंच में तपकर तुम अपने अस्तित्व की स्वीकार्यता का उत्सव मनाते हो पुरूष होने के मानक तय करते हो क्योंकि , तुम्हारें पुरुष होने के दंभ ने तुम्हारा सामर्थ्य इसी सोच तक सीमित कर दिया हैं और मैं!!!!! पिघलकर उस शिलाखण्ड में परिवर्तित हो जाती हूँ जिसकी पाषाण देह पर तुम मेरी … Read more

नैतिकता का पतन

पिछले कुछ दिनों से फेसबुक पर “मेरी बेटी, मेरा अभिमान”, “मेरा बेटा, मेरा अभिमान”, “मेरी पत्नी, मेरी ताकत” जैसे “अभिमान” वाली पोस्ट धड़ाधड़ चल रही है। हालांकि इन तीनों पर अभिमान करने और इनके प्रति अपनी भावनाएं व्यक्त करने में कोई हर्ज भी नहीं है। यह तीनों परिवार के सशक्त स्तम्भ हैं। लेकिन “मेरी पड़ोसन, … Read more

शिक्षा के मन्दिरों में बच्चे हिंसक क्यों बन रहे हैं?

नये भारत के निर्माण की नींव में बैठा इंसान सिर्फ हिंसा की भाषा में सोचता है, उसी भाषा मेें बोलता है और उससे कैसे मानव जाति को नष्ट किया जा सके, इसका अन्वेषण करता है। बदलते परिवेश, बदलते मनुज-मन की वृत्तियों ने उसका यह विश्वास और अधिक मजबूत कर दिया कि हिंसा हमारी नियति है, … Read more

उपहास का फल

जैन पाठशाला कहते हैं कि व्यक्ति समय के साथ जीवन से बहुत कुछ सीखता चला जाता है। जीवन घटित घटनाओं से ही सीख लेता है और बहुत सारी घटनाएँ बाल्यावस्था में ही घटित होती हैं जो हमें जीवन के कुछ मूल्य सीखा जाती हैं । मेरी बाल्यावस्था का एक संस्मरण जो कि मुझे जीवन भर … Read more

“गुलेल”

कितना बदनसीब है ज़फर कि दो गज जमीं न मिल सकी कुआये यार में” अंतिम मुग़ल बाद शाह बहादुर शाह ज़फर इस लिए अपने आपको बदनसीब कहते हुए दुनिया से बिदा हुए की मरने के पश्चात उनको अपने देश में चिरनिद्रा के लिए दो गज जमीन भी न मिली आज भी रंगून में उनके अवशेष … Read more

तुम हो कौन

तुम हो कौन, जानना एक मुद्दत से चाहता हूं, क्या तुम वही हो, जिसे मैं हरवक्त सोचता हूं, क्या तुम भोर की वही पहली किरण हो, क्या तुम चन्द्र की वही शीतल किरण हो, तुम कौन हो, एक मुद्दत से जानना चाहता हूं, क्या तुम वही हो, जिसे मैं ख्वाबों में देखा करता था, क्या … Read more

‘काला सोना’ बदलेगा किस्मत !

पिछले कई वर्षो से विवादों में रही राजस्थान रिफाइनरी के कार्य प्रारंभ की घोषणा से एक बार फिर पश्चिमी क्षेत्र सहित संपूर्ण राज्य में खुशी का माहौल है। सरकार की इस महत्वकांक्षी परियोजना में 43,129 करोड़ रूपए का निवेश होगा। जिससे प्रदेश की 34,000 करोड़ रूपए की अतिरिक्त आय होने का अनुमान लगाया जा रहा … Read more