आशा, करुणा और मानवीय संवेदनाओं का जीवंत उत्सव

विश्व इच्छा दिवस- 29 अप्रैल 2026 पर विशेषः हर वर्ष 29 अप्रैल को मनाया जाने ‘विश्व इच्छा दिवस’ मानवता के उन कोमल स्पंदनों को अभिव्यक्त करता है, जो हमें एक-दूसरे से जोड़ते हैं। यह केवल एक दिवस नहीं, बल्कि संवेदनशीलता, करुणा और आशा का वैश्विक अभियान है। इस दिन का मूल उद्देश्य उन बच्चों के … Read more

भारत-न्यूजीलैंड मुक्त व्यापार समझौते का वैश्विक अर्थ

युद्ध की आशंकाओं के बीच आशा का सेतुः वैश्विक परिदृश्य इन दिनों युद्ध की अनिश्चितताओं, तनावों और भू-राजनीतिक खींचतान से भरा हुआ है। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव, आपूर्ति श्रृंखलाओं में व्यवधान और महाशक्तियों के बीच प्रतिस्पर्धा ने विश्व अर्थव्यवस्था के सामने कई प्रश्नचिह्न खड़े कर दिए हैं। ऐसे समय में भारत और न्यूजीलैंड के … Read more

भारतीय ज्ञान-संपदा और वैश्विक नवाचार के बीच संवाद

विश्व बौद्धिक संपदा दिवस, 26 अप्रैल 2026 पर विशेषः प्रतिवर्ष 26 अप्रैल को मनाया जाने वाला विश्व बौद्धिक संपदा दिवस केवल किसी कानूनी अधिकार की औपचारिक स्मृति नहीं है, बल्कि यह मानव मस्तिष्क की उस सृजनशील शक्ति का उत्सव है जिसने सभ्यता को अंधकार से प्रकाश की ओर अग्रसर किया। इस वर्ष का विषय खेल … Read more

आचार्य महाश्रमण की निर्गुण-चेतना से विश्व-शांति की नई दिशा

आचार्य महाश्रमण का 65 वां जन्मदिवस, 25 अप्रैल 2026 मानव इतिहास के इस अशांत और संक्रमणकालीन दौर में जब विश्व का परिदृश्य युद्ध, हिंसा, आतंकवाद और वैचारिक टकरावों से आच्छादित है, तब शांति, सह-अस्तित्व और मानवीय मूल्यों की पुकार पहले से कहीं अधिक तीव्र हो उठी है। ऐसे समय में आचार्य महाश्रमण एक ऐसे आध्यात्मिक प्रकाशस्तंभ … Read more

राजस्थान कांग्रेस में खेल अभी बाकी है मेरे दोस्त…

सियासत में मुस्कानें कभी-कभी शब्दों से ज्यादा बोलती हैं। संकेत मौन से ज्यादा मुखरित होते हैं। और इशारे अक्सर नई कहानी कहते हैं। इस बार भी कुछ ऐसा ही हुआ। राजस्थान के मुख्यमंत्री रहे अशोक गहलोत और उप मुख्यमंत्री रहे सचिन पायलट जब पद के बिना आमने-सामने आए, तो हाथ सिर्फ मिले नहीं, ठहरे। मुस्कानें सिर्फ … Read more

पुस्तकें हैं जीवन का दीप, समाधान का सेतु

विश्व पुस्तक एवं कॉपीराइट दिवस, 23 अप्रैल 2026 पर विशेषः हर वर्ष 23 अप्रैल को समूचा विश्व ज्ञान, सृजनशीलता और मानवीय सभ्यता की अमूल्य धरोहर पुस्तकों का उत्सव मनाता है। यूनेस्को द्वारा 1995 में प्रारंभ किया गया यह दिवस केवल औपचारिक आयोजन नहीं, बल्कि लेखकों के सम्मान, सृजनाधिकार की रक्षा और पठन संस्कृति के संवर्धन … Read more

राजस्थान कांग्रेस में दिग्गजों को दरकिनार करने की साजिश

राजस्थान कांग्रेस रणभूमि बनी हुई है। खतरा डिजिटल खेल का है। तीर बाहर अंदर से चल रहे हैं। केंद्र में हैं गोविंद सिंह डोटासरा, जो अपने समर्थकों की हरकतों की हवा से घिरते हुए, धीरे-धीरे कमजोर पड़ते हुए और दूसरों को दरकिनार ठिकाने लगाने की कोशिश में खुद ठिकाने लगते हुए।  यह परिदृश्य इसलिए बना क्योंकि … Read more

लपटों ने लपेटा, तो विकास के बजाय राजनीति में भी झुलस रही रिफाइनरी

पचपदरा। रेत का विस्तार। तेल की रिफाइनरी। उम्मीदों का आसमान। रोजगार की फैक्ट्री और ऊर्जा का स्वप्न। लेकिन अचानक आग। सपलपाती लपटों ने रिफाइनरी को लपेट लिया। वह भी प्रधानमंत्री के आने से कुछ घंटे पहले। आग से भी तेज, आग की खबर फैली। सियासत उससे भी तेज़ भागी। क्योंकि यह कोई साधारण परियोजना नहीं। राजस्थान के औद्योगिक भविष्य की धुरी। लेकिन एक लपट ने सबको लपेटे में … Read more

छात्रों का आत्मघातः सपनों का बोझ है या सिस्टम की नाकामी?

कुरुक्षेत्र स्थित राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान कुरुक्षेत्र में दो महीनों के भीतर चार छात्रों द्वारा आत्महत्या की घटनाएं केवल एक संस्थान की त्रासदी एवं नाकामी नहीं हैं, बल्कि पूरे भारतीय समाज, शिक्षा व्यवस्था और हमारी सामूहिक संवेदनहीनता पर लगा गहरा प्रश्नचिह्न हैं। ये घटनाएं हमें झकझोरती हैं कि आखिर वह कौन-सी परिस्थितियां हैं, जिनमें देश की … Read more

महामृत्युंजय: मृत्यु के पार चेतना का विज्ञान

मानव सभ्यता के इतिहास में कुछ ऐसे सूत्र, ध्वनि-विन्यास और आध्यात्मिक प्रयोग विद्यमान हैं, जो सामान्य धार्मिक आस्था की सीमाओं से परे जाकर कहीं अधिक गहरे और व्यापक अर्थों को धारण करते हैं। महामृत्युंजय मंत्र ऐसा ही एक विरल सूत्र है—एक ऐसा मंत्र जो मात्र प्रार्थना नहीं, बल्कि चेतना, ऊर्जा और जीवन के गहन रहस्यों … Read more

अष्टद्रव्यपूजा गीत

अष्टद्रव्य से पूजा करें, भावों का विस्तार, प्रभु चरणों में अर्पित करें, श्रद्धा अपार। जल-चंदन-अक्षत-पुष्प, नैवेद्य दीप उजियार, धूप-फल से पूर्ण हो, प्रभु का सत्कार॥ जल चढ़ाऊँ चरणों में, समर्पण का भाव, जैसे बहता निर्मल जल, नम्र बने स्वभाव। हे प्रभु! ऐसा विनय दे, मन हो निर्मल-नीर, तेरे चरणों में बसूँ, मिटे अहंकार की पीर॥ चंदन तिलक लगाऊँ मैं, श्रद्धा का आधार, हृदय में तेरा स्मरण, हो जीवन साकार। तेरे प्रति विश्वास से, भर जाए यह मन, हर श्वास में बस जाए, प्रभु तेरा ही ध्यान॥ अक्षत अर्पण करूँ मैं, भेद-विज्ञान का प्रकाश, सत्य-असत्य का भान हो, मिटे अज्ञान का त्रास। शुद्ध चेतना जागे अब, अंतर का हो सुधार, तेरी वाणी से मिले, जीवन को आधार॥ पुष्प चढ़ाऊँ प्रेम से, हृदय की यह पुकार, भावों की सुगंध से, महके सारा संसार। प्रेम ही पूजा सच्ची है, प्रेम ही तेरा द्वार, तेरे चरणों में मिले, जीवन का सार॥ नैवेद्य अर्पित करूँ, तुझको ही समर्पण, जो कुछ पाया है प्रभु, तुझको ही अर्पण। तेरी कृपा से मिला सब, हे पतित-पावन, सेवा में ही सुख मिले, धन्य हो यह जीवन॥ दीप जलाऊँ ज्ञान का, मिटे अज्ञान अंधेरा, तेरी कृपा से जागे, अंतर का सवेरा। ज्ञान-ज्योति जलती रहे, हर पल हर बार, तेरे मार्ग पर चलूँ, हो जीवन का उद्धार॥ धूप चढ़ाऊँ भाव से, सद्गुण की महक, जैसे सुगंध फैलती, वैसे गुण चमक। करुणा, दया, क्षमा भर दे, ऐसा हो व्यवहार, तेरी भक्ति में ढले जीवन, हो भव-पार॥ फल अर्पित करूँ, प्रभु कृपा बरसाए, सार्थक हो यह जीवन, मिटे जन्म का जाल। तेरे चरणों में मिले, कर्मों का विश्राम, फलवान हो आराधना, पूर्ण हों सब काम॥ अष्टद्रव्य की यह पूजा, भावों की पहचान, समर्पण से फल तक का, सुंदर यह विधान। हे जिनवर! कृपा करो, रहे अटल यह प्रीति, प्रभु चरणों में “राहत”, बसती रहे भक्ति॥ ” राहत टीकमगढ़”

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