आईये देखें क्यों हमारे अधिकतर धार्मिक पर्व रात में ही मनाये जाते हैं ?

डा. जे.के.गर्ग
क्या हमने इस सच्चाई पर ध्यान दिया है कि क्यों प्रमुख धार्मिक पर्व यथा दीपावली, होली, शिवरात्रि, नवरात्रा आदि हमारे देश में रात में ही मनाये जाते है ? मन में सवाल उठता है कि हम शिवरात्री या नवरात्री को शिवदिन या नवदिन क्यों नहीं कहते हैं? इससे स्पष्ट प्रतीत होता है कि अगर रा Read more

क्‍या भगवान श्रीराम ने की थी नवरात्रि की शुरूआत ?

डा. जे.के.गर्ग
नवरात्रि का पर्व विनाशकारी ,तामसी ,अनिष्टकारी, अधार्मिक एवं अमानवीय प्रव्रत्तियों पर सात्विकता, कल्याणकारी प्रव्रत्तियों, मानवीयता, धर्म एवं सत्य की विजय का पर्व है | नवरात्रा का पर् साल में दो बार यानि चैत्र और आश्विन माह में मनाया जाता है, हालाँकि चैत्र माह में मनाई जाने व Read more

शक्ति की उपासना और कन्याओं पर बढ़ते जुल्म

lalit-garg
शताब्दियों से हम साल में दो बार नवरात्र महोत्सव मनाते हुए कन्याओं को पूजते हैं। पूरे नौ दिन शक्ति की उपासना होती है। दुर्गा के अलग-अलग रूपों की पूजा-अर्चना करके लोग उनसे अपने घर पधारने का अनुरोध करते हैं। लेकिन विडम्बना देखिये कि सदियों की पूजा के बाद भी हमने कन्याओं को उनका Read more

समाजवाद के प्रणेता एवं प्रथम वैश्य सम्राट कर्मयोगी महाराजा अग्रसेन Part 4

डा. जे.के.गर्ग
पशुबलि बंद करवाने वाले प्रथम सम्राट कुलदेवी माता लक्ष्मी की कृपा से भगवान अग्रसेन के 18 पुत्र हुये। राजकुमार विभु उनमें सबसे बड़े थे। महर्षि गर्ग ने भगवान अग्रसेन को 18 पुत्रके साथ 18 यज्ञ करने का संकल्प करवाया। उन दिनो यज्ञों में पशुबलि दी जाती थी। जिस समय 18 वें यज्ञ में Read more

समाजवाद के प्रणेता एवं प्रथम वैश्य सम्राट कर्मयोगी महाराजा अग्रसेन Part 3

डा. जे.के.गर्ग
अग्रोहा शहर का जन्म——देवी महालक्ष्मी से आशीर्वाद प्राप्त करने के बादराजा अग्रसेन ने नए राज्य की स्थापना एवं राजधानी के चयन हेतु रानी माधवी के साथ भारत का भ्रमण किया, अपनी यात्रा के दौरान वे एक जगह रुके जहाँ उन्होंनेदेखा कि कुछ शेर और भेडीये के बच्चे साथ-साथ खेल र Read more

समाजवाद के प्रणेता एवं प्रथम वैश्य सम्राट कर्मयोगी महाराजा अग्रसेन Part 2

डा. जे.के.गर्ग
भगवान् शिव और माता लक्ष्मी की आराधना— यहाँ यह स्मरण रखने वाली बात है कि महाभारत के युद्ध के कारण जन-धन की भारी तबाही हुई थी, इसलिये राष्ट्र के पुनर्निर्माण हेतु शांति के साथ उद्ध्योग, खेती,व्यापर की आवश्यकता थी जो वैश्यों दुवारा ही सम्भव था | महाराज अग्रसेन ने काशी जाक Read more

समाजवाद के प्रणेता एवं प्रथम वैश्य सम्राट कर्मयोगी महाराजा अग्रसेन Part 1

डा. जे.के.गर्ग
किसी भी राष्ट्र और समाज उन्नत तथा विकसित बनाने के लिये उसके आर्थिक, राजनीतिक, सांस्कृतिक एवं सामाजिक स्तम्भ मजबूत होने चाहिये | इन चारों स्तंभों को दृढ़ करके ही राष्ट्र को प्रगतिशील एवं विकसित देश बनाया जा सकता है | आज से लगभग 5141 साल पहिले महाराजा अग्रसेनजी ने इन्हीं चार स Read more

स्वादिष्ट भोजन में कंकड़ की तरह है कर्नाटक का हिंदी विरोध ….!!

tarkesh kumar ojha
तारकेश कुमार ओझा छात्र जीवन में अनायास ही एक बार दक्षिण भारत की यात्रा का संयोग बन गया। तब तामिलनाडु में हिंदी विरोध की बड़ी चर्चा होती थी। हमारी यात्रा ओड़िशा के रास्ते आंध्र प्रदेश से शुरू हुई और तामिलनाडु तक जारी रही। इस बीच केरल का एक हल्का चक्कर भी लग गया। केरल की बात क Read more

बिना हिंदी के हिन्दुस्तान की कल्पना नहीं की जा सकती

ब्रह्मानंद राजपूत
(14 सितंबर 2017 हिंदी दिवस पर विशेष Article) हिंदी शब्द है हमारी आवाज का हमारे बोलने का जो कि हिन्दुस्तान में बोली जाती है। आज देश में जितनी भी क्षेत्रीय भाषाएँ हैं उन सबकी जननी हिंदी है। और हिंदी को जन्म देने वाली भाषा का नाम संस्कृत है। जो कि आज देश में सिर्फ प्रतीकात्मक Read more