लो आ गये भाजपा के अच्छे दिन ..

क्या गुजरात सरकार द्वारा आनंदी बेन पटेल के लिए खरीदा जा रहा १०० करोड़ का वायुयान देश की १२० करोड़ जनता पर महंगाई का बोझ नहीं डालेगा ?
Narendra-modi-poster-new-मो.आमिर अंसारी- ९ जून २०१४ को जब महामहीम राष्ट्रपति ने अपना अभिभाषण संयुक्त सदन के सामने सेंट्रल हाल में पेश किया तो बहुत सारे ऐसे सपने उन्होंने अपने भाषण में पेश किये जिन सपनों ने समाज की पंक्ति में खड़े उस अंतिम आदमी की आँख में चमक पैदा कर दी जिस अंतिम व्यक्ति के उत्थान की बात आज़ादी के दिन से लेकर आज तक हर सरकार और दल करता चला आ रहा है !
कांग्रेस ने इस अंतिम व्यक्ति की बदहाल ज़िंदगी को खुशहाल करने के उद्देश्य से नारा दिया था की गरीबी हटाएंगे लेकिन आज़ाद हिन्दुस्तान में लगभग ६० सालों तक हुकूमत करने के बाद उसी कांग्रेस का प्रधानमंत्री संसद के भीतर खड़े होकर यह कहते हैं कि देश में ४३ करोड़ लोग ऐसे हैं जिनका जीवन यापन २२-२३ रुपये प्रतिदिन प्रतिव्यक्ति की आय पर निर्भर है !और इसी यू पी ए २ के महान मंत्री गरीबों का मज़ाक उड़ाते हुए यह कह रहे थे कि ५-१० और १५ रुपये में कोई भी व्यक्ति भरपेट खाना खा सकता है !
कांग्रेसी नेताओं द्वारा किये जा रहे गरीबों के इसी अपमान के कारण गरीब के दिल से एक आह निकली और इस आह ने कांग्रेसी अहंकार को मिट्टी में मिला दिया ! गरीबों के अपमान ,अनदेखी और सिसकती दर्दभरी आहों ने कांग्रेस को उस मुक़ाम पर लाकर खड़ा कर दिया कि कांग्रेस मुख्य विपक्ष के दर्जे के लिए भी लोकसभा स्पीकर के सामने गुहार लगाने पर मजबूर हो गयी !
देश के गरीब,बेरोज़गार और नौजवानों ने मोदी के भाषण में वो असर देखा जो उन्हें पिछले १० सालों में कांग्रेस की वाणी में नहीं दिखा था ! मोदी ने चुनावी भाषणों में जो वादे किये थे ,जो सपने दिखाए थे और जिन अच्छे दिनों के नारे के सहारे सत्ता के शीर्ष पर पहुँचने में कामयाब हुए थे वही सिलसिला राष्ट्रपति के अभिभाषण में नयी सरकार के प्रथम सत्र के संयुक्त सदन में भी जारी रहा ! राष्ट्रपति ने कहा की हमारी सरकार गरीबी को कम नहीं बल्कि खत्म करेगी !लेकिन जिस प्रकार मोदी सरकार के रैल मंत्रालय ने माल भाड़ा और यात्री किराय में जो तारीखी बढ़ोतरी की है उससे महंगाई का एक ऐसा बोझ देश की गरीब जनता के ऊपर पड़ा है जिस बोझ के नीचे दब कर उसका ज़िंदा रहना भी दुश्वार हो जायेगा ! मोदी सरकार के इस फैसले के बाद सचमुच गरीबी कम नहीं होगी लेकिन गरीब ज़रूर खत्म हो जायेंगे ! प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मन में गरीबों का कितना दर्द है यह तो उनके इस फैसले के बाद देश की जनता को समझ आ ही गया होगा !
 चिंतन योग्य बात तो यह है कि पिछले १० सालों में रेल यात्री किराया और भाड़ा नहीं बड़ा था लेकिन महंगाई फिर भी आसमान छु रही थी और इस महंगाई की भट्ठी में झुलसती जनता ने उस मोदी पर महंगाई कम करने का विशवास कर लिया जिन मोदी ने गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री के रूप में यह कहा था कि ११-१३ रूपये प्रतिदिन कमाने वाला गुजराती गरीब नहीं हैं तभी जनता को यह समझ जाना चाहिए था कि यदि कांग्रेस की निगाह में २२-२३ रुपये कमाने वाला भारतीय गरीब नहीं है और उसका ठीक आधा कमाने वाला गुजराती मोदी की निगाह में गरीब व्यक्ति नहीं हैं तो फिर मोदी की निगाह में गरीब जनता का क्या दर्द होगा !
जब यू पी ए १ और २ के दौर-ए-हुकूमत में रेल यात्रा किराया और रेल भाड़ा नहीं बढ़ने के बावजूद महंगाई रोज़ नयी ऊंचाइयों पर जा रही थी तब मोदी सरकार के  रेल भाड़े में ६.५% और यात्री किराये में १४.२% बढ़ोतरी के पश्चात महंगाई कहाँ पहुँच जाएगी इसकी कल्पना ने कृषि प्रधान देश की आम जनता की नींद उड़ा दी है अर्थव्यवस्था के सुधार के नाम पर जो कड़वी दवा मोदी सरकार ने भारतीय जनमानस को पेश की है वह वास्तव में दवा नहीं बल्कि ज़हर की कड़वी पुड़िया साबित होगी चूंकि रेल भाड़े में की गयी इस वृद्धि के बाद लोहे,स्टील,कोयले,दूध,सब्ज़ियों और तेल की कीमत में वह उछाल आएगा जिसका तसव्वुर करने से ही आत्मा सहर उठती है !
चूंकि जब कोयला महंगा होगा तो बिजली महंगी होगी जब बिजली महंगी होगी तो पीने का पानी तक महंगा हो जायेगा और केंद्रीय ऊर्जा मंत्री ने तो रेल भाड़े में की गयी इस वृद्धि के पूर्व ही बिजली दरो को महंगा करने का संकेत दे दिया था ! दूध,सब्ज़ी और तेल के महंगे होने के कारण गरीब की थाली से अन्न का दाना भी चुन-चुन कर उठा लिया जाएगा ! मोदी सरकार के इस फैसले  के बाद वह स्टील भी महंगी हो जाएगी जिस स्टील से गरीब की थाली निर्मित होती है यानी मोदी ने महंगाई का एक ऐसा ज़हरीला इंजेक्शन  आम भारतीय जन मानस को दिया है जिसके पश्चात गरीब की थाली से न सिर्फ अन्न का दाना तक गायब हो जायेगा बल्कि वह थाली भी इस गरीब की ज़िंदगी से गायब हो जाएगी जिस थाली में वह खाना खाता था !
इस समय एक शायर का वह शेर मेरे ज़हन में कौंधने लगा है जिसमे शायर गरीबी की परिकाष्ठा का ज़िक्र करते हुए कहता है कि “तमाम रात माँ पत्थर उबालती रही , बच्चे फरेब खा के ज़मीन पर सो गए ” मोदी सरकार की महंगाई के इस प्रकोप के बाद अब गरीब माँ अपने भूखे बच्चों को फरेब दे कर पत्थर भी नहीं उबाल सकेगी चूंकि उसके पास न तो वह तबेला होगा जो महंगी स्टील के कारण वह इसे खरीद सके और न ही वोह चूल्हा होगा जिस पर वह इन पत्थरों को उबाल सके ! चूंकि चूल्हा जलाने के लिए इस्तेमाल की जाने वाली रसोई गैस और कैरोसिन की कीमतों में भी बढ़ोतरी के संकेत मोदी सरकार ने दे दिए है ! मीडिया में आ रही ख़बरों की माने तो गैस सिलेंडर में प्रति माह १० रुपये की वृद्धि मोदी सरकार करेगी ! यानी हर माह महंगाई का एक झटका गैस सिलेंडर की कीमतों में वृद्धि से जनता को लगता रहेगा यानी जिन ६० महीनों के लिए सत्ता की भीख नरेंद्र भाई मोदी ने अपने प्रचार के दिनों में माँगी थी और कहा  था कि आपने ६० साल तक एक ऐसे दल को अपने मतों से सत्ता के सिंहासन पर बैठाया है जिसने आपको महंगाई कि आग में झोंक दिया है आप केवल ६० महीनों के लिए मुझे अपना सेवक बना लो मैं देश के प्रधानमंत्री नहीं बल्कि एक चौकीदार के रूप में आपकी सेवा करूंगा ! हिन्दुस्तान कि मासूम जनता मोदी के शब्दों के जाल में उलझ गयी और ६० महीनों के लिए जनता ने मोदी के हाथों में देश कि बागडोर सौंप दी लेकिन मोदी ने प्रथम १ माह में ही संकेत दे दिए कि वह वही करेंगे जो पिछली सरकारें करती चली आ रही है यदि हर माह १० रुपये कि बढ़ोतरी रसोई गैस में होगी तो ६० वें महीने में आज का गैस सिलेंडर अपनी दुगनी से अधिक कीमत का हो जायेगा !
मोदी सरकार के रेलमंत्री कह रहे हैं कि हमने रेल किराया नहीं बढ़ाया है हमने तो पिछली सरकार के फैसले को ही यथास्थित रख कर आगे बढ़ाया है तब देश की आम जनता के मन में यह बैचेनी हिचकोले मारने लगी कि जब हमने सत्ता परिवर्तन व्यवस्था को सुधारने के लिए किया है तो फिर मोदी सरकार  पिछली सरकार की ही नीतियों और फैसलों पर क्यों आगे बड़ रही है !  इसी बीच भारतीय गृहमंत्रालय की एक खबर मीडिया में आयी है कि जल्द ही यू पी ए २ के उस फैसले को रद्द किया जाएगा जिस फैसले के द्वारा एक आयोग गठित कर गुजरात में हुई एक महिला की जासूसी की असलियत का पता लगाया जा सके लेकिन केंद्रीय ग्रह राज्यमंत्री रिजीजू ने संकेत दिए है कि पिछली सरकार के इस फैसले को रद्द किया जाएगा ! ज्ञात रहे की इस जासूसी काण्ड में वर्तमान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर विपक्ष द्वारा आरोप लगाये गए थे ! इस बात का ज़िक्र मैंने इसलिए अपने लेख में किया है चूंकि मोदी सरकार के इन दो फैसलों के पश्चात यह बिलकुल साफ़ हो जाता है कि यदि पिछली सरकार के जन विरोधी   फैसले होंगे तो उन्हें मोदी सरकार बरकरार रखेगी लेकिन महिला सम्मान की बात करने वाले नरेंद्र भाई की यदि कोई जांच जैसी बात आएगी तो उस फैसले को रद्द कर दिया जायेगा !
मोदी सरकार के इन दौहरे मापदण्डों के कारण ही यह सरकार संभवतः वह पहली भारतीय राजनीत की सरकार होगी जिसने अपने एक माह से भी कम के कार्यकाल में जनता का ऐसा विशवास खोया है कि एक माह पूरा होने से पहले ही प्रधानमंत्री नरेंद्र भाई मोदी के पुतले देश के चप्पे-चप्पे पर फूंके जा रहे है !  इस एक माह के भीतर कभी डीज़ल की कीमतें बड़ी ,कभी रेल किराया और भाड़ा बड़ा , कभी चीनी के दाम बढे ,कभी रसोई गैस तथा कैरोसिन की सब्सिटी खत्म करने के संकेत दे दिए ! इन चीज़ों के महंगे होने पर बड़ रही महंगाई के कारणों की समीक्षा करते हुए मोदी सरकार तथ्य दे रही है कि खज़ान खाली है विकास के लिए पैसे की ज़रूरत है !  और यह पैसा आम जनता की गाढ़ी कमाई से ही इकठ्ठा किया जा रहा है जहाँ एक ओर मोदी सरकार खाली खज़ाने का रोना रोकर महंगाई की भट्टी को रोज़ नए सिरे से सुलगा कर उसमें जनता को भून रही है वही दूसरी ओर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की राजनैतिक उत्तराधिकारी के रूप गुजरात के मुख्यमंत्री की कुर्सी पर विराजमान आनंदी बेन पटेल १०० करोड़ रुपये का वायुयान सरकारी खज़ाने से खरीदने की तैयारी कर रही है और मीडिया में आयी ख़बरों के मुताबिक विदेशी अख़बारों में इसकी खरीदारी के लिए इश्तेहार भी गुजरात सरकार द्वारा जारी कर दिए गए हैं !
यह है भाजपा की कथनी और करनी का अंतर , एक ओर जनता जनार्दन पर महंगाई की कड़वी दवाई के नाम पर अत्याचार और दूसरी ओर उसी जनता की खून पसीने की कमाई से अपनी सरकारी यात्राओं को सुविधा जनक बनाने के लिए १०० करोड़ का वायुयान खरीदना ! क्या ऐसे ही अच्छे दिनों के शुरुवात होते है ? शायद जनता के लिए तो यह अच्छे दिनों की शुरुवात नहीं है लेकिन हाँ , भाजपा और उसके नेतागणों के ज़रूर अच्छे दिनों की शुरुवात हो गयी है !
मैं अपनी कलम को विराम देते हुए कहना चाहता हूँ  कि यदि भारत सरकार अपने तानाशाही निर्णयों को जनता पर इसी तरह थोपती रही तो वोह यह भी जान ले कि यह वही जनता है जिसने आपको सत्ता के सिंहासन पर बैठा कर , लगातार १० साल तक सत्ता का मज़ा चखने वाली कांग्रेस को सत्ता के उस पायदान पर ला कर खड़ा कर दिया है जिस मुकाम पर खड़े होकर कांग्रेस मुख्य विपक्ष की भूमिका के लिए भी तरस रही  है ! समय का चक्र न कभी किसी के लिए रुका है और न ही रुकेगा यदि जनता की सिसकती,करहाती सदाओं को नज़र अंदाज़ करते हुए  मोदी सरकार ऐसे ही जनविरोधी फैसले लेती रही तो वह दिन दूर जब यही जनता भाजपा को भी उसी स्थिति में लाकर खड़ा करने पर मजबूर हो जाएगी ! जिस स्थिति में आज कांग्रेस खड़ी है !
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