जनकल्याणकारी योजनाओं से कोई वंचित ना रहे-देथा

पालनहार योजना में नए आवेदकों को जोडने हेतु बैठक आयोजित

भवानी सिंह देथा
भवानी सिंह देथा

अजमेर। जिला कलक्टर श्री भवानी सिंह देथा ने कहा कि राज्य सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ लेने से कोई पात्र व्यक्ति वंचित नही रहे यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए। राज्य सरकार की पालनहार योजना के तहत जिले में सर्वे के बाद शिविर लगाकर वंचितों को इस योजना का लाभ दिया जाना चाहिए।
श्री देथा आज जिला कलेक्टे्रट सभागार में पालनहार योजना में नए आवेदकों को जोडने हेतु आयोजित बैठक को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार की पालनहार योजना से जिले में वंचित रहे बच्चों का सर्वे कर उन्हें इसका लाभ दिलवाने हेतु अभियान के रूप में प्रयास करने की आवश्यकता है। इस योजना में नए आवेदकों को जोडने के लिए क्षेत्र के विकास अधिकारी, आंगनबाडी सुपरवाईजर, विद्यालयों के प्रधानाचार्य व ग्राम सेवक 15 जुलाई को ब्लॉक स्तर पर बैठक आयोजित कर सर्वे व शिविर की कार्ययोजना को तैयार करेंगे। इसी क्रम में 16 से 31 जुलाई तक ब्लॉक स्तर पर कार्यक्रम तैयार कर पालनहार योजना के तहत आवेदन तैयार करवाने के बाद संबंधित क्षेत्र के विकास अधिकारी को जमा कराए जाएंगे। शहरी क्षेत्र के आवेदन जिला बाल संरक्षण ईकाई को जमा कराएं जाने है। उक्त आवेदन पत्र 5 अगस्त तक अनिवार्य रूप से जमा कराने होंगे।
श्री देथा ने कहा कि समाज में बच्चों की शिक्षा व लालन-पोषण का बडा महत्व है। शिक्षा व उचित मार्गदर्शन के अभाव में बालक-बालिका समाज में उचित स्थान बनाने में असफल हो जाते है। राज्य सरकार की पालनहार योजना ऐसे बच्चों के लिए संजीवनी है जो आर्थिक या पारिवारिक कारणों से अध्ययन नहीं कर पाते है, ऐसे बालक-बालिकाओं को शिक्षा की मुख्य धारा से जोडने के लिए पालनहार योजना का संचालन किया जा रहा है। अधिकारियों को इस योजना का अधिकतम लाभ पात्रता रखने वालों को सुनिश्चित करना होगा।
सहायक निदेशक जिला बाल संरक्षण ईकाई श्री जे.पी. चावरिया ने स्लाईड प्रजेन्टेशन के माध्यम से बताया कि राज्य सरकार द्वारा संचालित पालनहार योजना के द्वारा 9 श्रेणियों के अन्तर्गत आने वाले परिवारों के बच्चों को इस योजना का लाभ दिया जा रहा है। जिसमें अनाथ बालक-बालिका, आजीवन कारावास प्राप्त माता-पिता के बच्चे, निराश्रित पेंशन प्राप्त विधवा की तीन संतान, पुर्नविवाहित माता-पिता के बच्चे, एड्स पीडित माता-पिता के बच्चे, कुष्ठ रोग से पीडित माता-पिता के बच्चे, नाता जाने वाली माता की तीन संतान, विकलांग माता-पिता की संतान, तलाकशुदा व परित्यक्ता निराश्रित पेंशन की पात्र महिला की संतान शामिल है। उक्त श्रेणी में शामिल 5 वर्ष तक की आयु के बच्चों को 500 रूपए प्रतिमाह एवं स्कूल में प्रवेश के पश्चात् 1000 रूपए प्रतिमाह 18 वर्ष तक की आयु प्राप्त होने तक सहायता दी जाती है, लेकिन बच्चों का विद्यालय जाना अनिवार्य है।
बैठक में अतिरिक्त जिला कलक्टर श्री गजेन्द्र सिंह राठौड, विकास अधिकारी, बाल विकास अधिकारी एवं अन्य विभागों के अधिकारी मौजूद थे।

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