ब्यावर, (हेमन्त साहू)। अशैक्षणिक कार्यों के बोझ तले दबे सरकारी स्कूलों के शिक्षक स्कूलों की कक्षाओं में समय नहीं दे पा रहे हैं। कम स्टाफ और सिर पर परीक्षाएं होने के बाद भी राहत नहीं दी जा रही। 1992 से राजस्थान शिक्षक संघ राष्ट्रीय में सक्रिय एवं रविवार को छठी बार जिलाध्यक्ष पद पर निर्वाचित हुए धन्नासिंह रावत ने कहा कि शिक्षकों की समस्याओं को लेकर जल्द ही शिष्टमंडल शिक्षा मंत्री से भेंट करेगा।
राजस्थान शिक्षक संघ राष्ट्रीय के वार्षिक चुनाव रविवार को पटेल स्कूल में हुए। जिला निर्वाचन अधिकारी सुरेश चौहान की देखरेख में धन्ना सिंह रावत को छठी बार निर्विरोध जिलाध्यक्ष एवं राजेंद्र प्रजापति को जिला वरिष्ठ उपाध्यक्ष पद पर नियुक्त किया गया। इस मौके पर रतन सिंह देवड़ा को जिला मंत्री, शिवनारायण सिंह को जिलासभाध्यक्ष, नारायण सिंह राजियावास नंदसिंह चौहान को उपसभाध्यक्ष, पंकज शर्मा, सुरेखा शर्मा, हेमेंद्र दगदी, प्रकाश प्रजापति, भोमाराम वर्मा खोड़ा डाली को उपाध्यक्ष, रतनसिंह देवड़ा को मंत्री, गीता सोलंकी को महिला मंत्री, विष्णुदत्त गोयल को कोषाध्यक्ष नियुक्त किया गया। कार्यकारिणी में सुवालाल, प्रकाशचंद सालवी, बृजकुमार कुमावत, भैरू सिंह पंवार, कुंदनमल वर्मा, चंद्रकांता पंवार, भगवान सिंह चौहान, गोपाल सिंह, सुनील त्रिपाठी, दिलीप सिंह चौहान, लक्ष्मण सिंह को सदस्य के रूप में शामिल किया गया।
बाजार में बिगड़ती यातायात व्यवस्था पर व्यापारियों नें रोष जताया
ब्यावर, (हेमन्त साहू)। शहर के मुख्य बिगड़ती यातायात व्यवस्था को लेकर अब व्यापारी भी आगे गए हैं। इस संबंध में चांग व्यापार एसोसिएशन की बैठक अध्यक्ष मुरली तिलोकानी की अध्यक्षता में चांगगेट धर्मशाला में आयोजित हुई। अध्यक्ष मुरली तिलोकानी सहित अन्य व्यापारियों ने आरोप लगाया कि शहर की हृदय स्थली चांगगेट क्षेत्र में यातायात व्यवस्था दिनों-दिन बिगड़ती जा रही है। पदाधिकारियों ने इस बात रोष जताया कि पुलिस चौकी महज कुछ कदम दूर होने के बावजूद क्षेत्र में व्यवस्था सुचारू नहीं हो रही है। पदाधिकारियों ने आरोप लगाया कि तथाकथित सेवाशुल्क की वजह से व्यवस्था चौपट हो रही है। व्यापारियों ने इस संबंध में जल्द ही पुलिस के आला अधिकारियों से मिलकर क्षेत्र की बिगड़ती यातायात व्यवस्था से अवगत कराकर व्यवस्था सुचारू कराने की मांग करने का निर्णय लिया। बैठक में मुरली तिलोकानी, महामंत्री महेंद्र बोहरा समेत अन्य व्यापारी बड़ी संख्या में मौजूद थे।