संत श्री ने किया श्रीराम जानकी विवाह का सुंदर चित्रण

10600390_10204137730418353_7013444148504122640_n10393755_10204137729258324_8550969056442186239_nसाधक के जीवन में अधंकार ही भक्ति में बाधक हैं, मनुष्य के जीवन में भक्ति आन्नद देने वाली है।
विश्व हिंदू परिषद अजयमेरू महानगर द्वारा विश्व हिंदू परिषद के स्वर्ण जयंती वर्ष के अंतरगर्त चल रही संगीतमय राम कथा के संातवे दिन कथा वाचक राष्ट्रीय संत परम पूज्ज दिव्य मुरारी बापू ने आज अपने श्रीमुख से भगवान के बाल्यकाल, गुरु आश्रम जाकर अध्ययन, विश्वामित्र के साथ राम लक्ष्मण के वन मे जाना आदि प्रसंग सुनाये।
कार्यक्रम की जानकारी देते हुए प्रचार प्रमुख शरद गोयल ने बताया की पूजा अर्चना के पश्चात संत श्री आज के प्रसंग में गुरु की आज्ञा लेकर नगर  दर्शन में भगवान राम श्री लक्ष्मण जी के साथ श्री धाम जनकपुर का दर्शन करने जाते है। नगर वासियों ने भगवान राम का भव्य स्वागत किया और भगवान भी नगर को देख कर अत्यत्त प्रसन्न हुये। आघ्यात्मिक द्वष्टी से जनकपुर धाम भक्ति की भूमि है। मनुष्य के जीवन में भक्ति आन्नद देने वाली है। भक्ति से भक्त भी आन्नदित होता है और भक्ति भावना से भगवान भी प्रसन्न होते हैं। साधक को अपने जीवन में भक्ति बढें ऐसा यतन करना चाहिए भक्ति पुरषार्थ साध्य नही है। भक्ति कृपा साधक है। भक्ति सन्त और भगवान ही दे सकते हैं। जैसा धनवान व्यक्ति आने वाले को धन का दान कर सकता है वैसे ही भगवान और सन्त किसी को भी भगवान की भक्ति दान कर सकते हैं ।
पुष्प वाटिका प्रसगं में भगवति सीता मॅा भवानी का पूजन करने जाती है और भगवान राम गुरू महाराज की पुजा के लिए पुष्प लेने जाते है लीला में यहा श्री सीता राम जी का प्रथम मिलन होता है । गौस्वामी जी यहा बताना चहाते है कि दुनिया का हर कुमार अगर गुरू सेवा में रहे और  दुनिया की हर कन्या मॅा भगवती की पूजा अराधना करे । तो दुनिया में कोई दुखी नही रहेगा ।
संतश्री ने धनुष प्रसगं में भगवान शंकर का धनुष बताया गया है। स्ववर में महाराज जनक ने शर्त रखी है कि जो धनुष तोडेगा उसके साथ अपनी पुत्री का विवाह करेगे। दुनिया के सारे वीर एक – एक करके और एक साथ भी लग के उस धनुष को हिला नही पाये । भगवान राम ने धनुष भंग करके भगवती सीत.ा को प्राप्त कर लिया । आध्यात्मिक द्वष्टी से भगवान राम पूर्ण बम्ह् है । श्री सीता जी भक्ति स्वरूप है । धनुष अहंकार का प्रतिक हैं । साधक के जीवन में अधंकार ही भक्ति में बाधक हैं । धनुष किसी से नही टुटा भगवान ने तोडा इसका मतलब है बिना भक्ति भगवान कि कृपा के अंहकार मुक्त नही हो सकते हैं ।
कथा को आगे सुनाते हुए बापू ने आज परशुराम संवाद में स्वधर्म का सकेत किया गया है। व्यक्ति को अपने स्वधर्म का पालन करना चाहिए गीता में अर्जुन राज परिवार से है । अन्याय के लिए लडना उसका अधिकार है लेकिन वह क्षत्रिय धर्म छोड कर ब्राम्ह्ण का धर्म अपनाना चाहता है और भगवान से कहता है की मै युध नही करूगा मुझे राज्य नही चाहिए । मै भिक्षा मान कर जीवन का निर्वाह कर लुगा । भगवान उसे कहते है अपने स्वधर्म का त्याग न करो तुम क्षत्रिय वीर हो अन्याय के विरूध लडना तुम्हारा धर्म है और भगवान ने अर्जुन को उसके स्वधर्म पर प्रेरित किया । भगवान परशुराम ब्राम्ह्ण है लेकिन स्वाहन्न मानु के आंतक के कारण उन्हे शस्त्र उठाना पडा। फिर तो मानो वह क्षत्रिय धर्म को ही अपना लिया। भगवान राम परशुराम संवाद में कहते है कि किसी परिस्थित के कारण आपने शस्त्र उठाया । लेकिन आप अपने धर्म का त्याग न करे आप ब्राम्ह्ण है ब्राम्ह्ण क कर्म तप करना है और भगवान परशुराम शस्त्र त्याग करके बृम्ह् तपस्या के लिए जाते है ।
श्री सीताराम विवाह में दुल्हे के रूप में भगवान अत्यंत चचंल घोडे पर बैठे हैं । महाराज जनक ने उनके चरण धोये । देव वश्ष्टि श्री सीताराम जी का वस्त्र बधंन करते है और श्री सीताराम जी का विवाह होता है। आघ्यात्मिक द्वष्टी से हमारा मन अत्यंत चचंल घोडे जैसा है मन की चचंलता को भगवान गौस्वामी ने मन जहॅा जाये भगवान दर्शन करे। अभिमान शुन्य हो जाये  तो सतगुरू हमारी दर्शन प्रभु से करा देते है। एक बार जीव का भगवान से दर्शन हो जाये फिर कभी अमगंल का मुख नही देखना पडता है । कथा के बाद इस अवसर पर रा. स्व सेवक संघ के प्रचारक मा. नंदलाल जी बाबाजी का भी अशिर्वचन मिला।
कथा के व्यवस्थापक श्री श्री 108 श्री घनश्यामदास जी महाराज ने बताया कल कथा मे श्री राम लक्ष्मण एवं माता सीता के वनवास गमन प्रसंग का चित्रण किया जाएगा। रामायण एवं संत श्री की पूजा आज के जजमान श्री रमाकांत बाल्दी रामसिंह उदावत राजेश पुरोहित भगवान हाडा धर्मेश जैन के द्वारा की गई। प्रशाद वितरण रेशमी कुवेरा इंद्रा त्यागी के द्वारा किया गया। विश्व हिंदू परिषद के अध्यक्ष श्री आनंद अरोड़ा महानगर मंत्री शशिप्रकाश इन्दोरिया श्री सुनीलदत्त जैन सर्वेश्वर अग्रवाल श्री ओमप्रकाश सोमानी श्री ओम जी मंगल श्री किशन जी बंसल श्री विष्णु जी ममता मिष्ठान श्री गोविंद जादम श्री आनंद सिंह राजावत श्री अशोक मेघवाल लेखराज सिंह श्रीमती अल्का गौड़ सोहनलाल बरूपाल श्री सुभाष माहेश्वरी प्रभा गुप्ता श्री देवीलाल श्री सम्मान सिंह श्याम बिहारी शर्मा कैलाश भाटी नरेंद्र चंडक सहित अन्य कार्यकर्ता उपस्थित थे। कार्यक्रम मे रोजाना हजारो श्रद्धालु कथा सुनने आ रहे है। यह कथा दोपहर 12 बजे से शाम 4 बजे तक विभिन्न अध्यायों के माध्यम से चलेंगी, जिसमे प्रतिदिन रामायण के अलग अलग सोपानों पर संगीतमय कथा का वाचन होगा। 21 तारीख को दोपहर 12.15 बजे विराट हिंदू सम्मेलन का आयोजन रखा गया है। जिसमे देश भर के अनैक संत महात्मा उपस्थित रहेंगे।
प्रचार प्रमुख  
शरद गोयल  9414002132

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