संत श्री ने किया श्रीराम जानकी विवाह का सुंदर चित्रण

विनय न माने जलधि जड़ गये तीन दिन बीत । बोले राम सकोप तब भय बिन होत न प्रीत ।।
150181_10204131584024697_6119384662031237075_nविश्व हिंदू परिषद अजयमेरू महानगर द्वारा विश्व हिंदू परिषद के स्वर्ण जयंती वर्ष के अंतरगर्त चल रही संगीतमय राम कथा के नवें दिन कथा वाचक राष्ट्रीय संत परम पूज्ज दिव्य मुरारी बापू ने आज अपने श्रीमुख से कथा को आगे सुनाते हुए सीता हरण गरुड़ उद्धार राम सेतु निर्माण अशोक वाटिका सुंदर कांड का बड़ा सुंदर उल्लेख किया।
बापू कहते है की यह संपूर्ण सृष्टि प्रभु की लीला है। श्री रघुनाथजी का गुणगान संपूर्ण सुंदर मंगलों का देने वाला है। जो इसे आदर सहित सुनेंगे, वे बिना किसी जहाज के ही भवसागर को तर जाएँगे।
कार्यक्रम की जानकारी देते हुए प्रचार प्रमुख शरद गोयल ने बताया की पूजा अर्चना के पश्चात संत श्री आज के प्रसंग में हनुमान जी के जन्म से लेकर उनके बाल्यकल युवा अवस्था प्रभु श्री राम से उनका मिलन सीता खोज लंका दहन आदि सभी प्रसंग बताते हुए बापू कहते है की रामायण मे से यदि हनुमान जी को हटा दे तो कुछ भी शेष नही। श्री राम व हनुमान का संबंध स्वामी सेवक का जरूर था परंतु संपूर्ण सृष्टि मे ऐसा आत्मीय संबंध किसी का नही था। पॅंचवॅटी मे रावण छदम रूप धारण कर जब सीता को आकाश मार्ग से लंका की और ले जाता है तब पक्षी राज जटायु ़ रावण को रोकने का प्रयास करता है एवं घायल हो धरती पर गिर जाता है तभी वहाँ श्री राम लक्ष्मण आते है और जटायु से पूछते है तो जटायु सारा व्रत्त बताता है एवं अपने प्राण त्याग देता है प्रभु उसका अंतिम संस्कार कर आगे माता सीता को खोजने जाते जहाँ उनका मिलन हनुमान व सुग्रीव से होता है प्रभु उनके सहयोग से माता सीता को खोजने समुंद्र तक पहुँच कर वहाँ अपना डेरा डालते है एवं लंका जाने का मार्ग सोचते है ।
विनय न माने जलधि जड़ गये तीन दिन बीत । बोले राम सकोप तब भय बिन होत न प्रीत ।।
इधर तीन दिन बीत गए, किंतु जड़ समुद्र विनय नहीं मानता। तब श्री रामजी क्रोध सहित बोले- बिना भय के प्रीति नहीं होत
नाथ नील नल कपि द्वौ भाई। लरिकाईं रिषि आसिष पाई॥ तिन्ह कें परस किएँ गिरि भारे। तरिहहिं जलधि प्रताप तुम्हारे॥
समुद्र ने कहा हे नाथ! नील और नल दो वानर भाई हैं। उन्होंने लड़कपन में ऋषि से आशीर्वाद पाया था। उनके स्पर्श कर लेने से ही भारी-भारी पहाड़ भी आपके प्रताप से समुद्र पर तैर जाएँगे मैं भी प्रभु की प्रभुता को हृदय में धारण कर अपने बल के अनुसार (जहाँ तक मुझसे बन पड़ेगा) सहायता करूँगा। हे नाथ! इस प्रकार समुद्र को बँधाइए, जिससे तीनों लोकों में आपका सुंदर यश गाया जाए। इस प्रकार लंका चड़ाई हेतु राम सेतु का निर्माण हुआ।
कथा के पश्चात अजमेर के भजन सम्राट श्री विमल गर्ग ने मधुर भजनों की प्रस्तुति दी। कथा के व्यवस्थापक श्री श्री 108 श्री घनश्यामदास जी महाराज ने बताया कल कथा मे श्री राम लक्ष्मण एवं रावण युद्ध  रावण का अंत व उद्धार श्री राम की अयोध्या वापसी एवं श्री राम के राजतिलक का चित्रण किया जाएगा। रामायण एवं संत श्री की पूजा आज के जजमान श्री अनुपम गोयल के द्वारा की गई। प्रशाद वितरण श्री राधा कृष्ण सखा परिवार के के द्वारा किया गया। विश्व हिंदू परिषद के अध्यक्ष श्री आनंद अरोड़ा महानगर मंत्री शशिप्रकाश इन्दोरिया श्री सुनीलदत्त जैन सर्वेश्वर अग्रवाल श्री ओमप्रकाश सोमानी श्री ओम जी मंगल श्री किशन जी बंसल श्री विष्णु जी ममता मिष्ठान श्री गोविंद जादम श्री अशोक मेघवाल लेखराज सिंह श्रीमती अल्का गौड़ सोहनलाल बरूपाल श्री सुभाष माहेश्वरी प्रभा गुप्ता श्री देवीलाल श्री सम्मान सिंह श्याम बिहारी शर्मा कैलाश भाटी नरेंद्र चंडक सहित अन्य कार्यकर्ता उपस्थित थे। कार्यक्रम मे रोजाना हजारो श्रद्धालु कथा सुनने आ रहे है। 21 तारीख को दोपहर 12.15 बजे विराट हिंदू सम्मेलन का आयोजन रखा गया है। जिसमे देश भर के अनैक संत महात्मा उपस्थित रहेंगे।
कृपया इस अवसर पर अपना प्रेस प्रतिनिधि एवं फोटोग्राफर दोपहर 1.15 बजे भेजने का कष्ट करें।
प्रचार प्रमुख  
शरद गोयल  9414002132

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