जीवन बनाना चाहते है खुशहाल तो निम्नलिखित बातों का रक्खें ध्यान—

डॉ. जुगल किशोर गर्ग
डॉ. जुगल किशोर गर्ग

सुखमय जीवन जीने के लिये अपना लक्ष्य निर्धारित करें, उद्देश्यहीन जीवन नहीं जिए |
ईर्ष्यालु नहीं बने,दूसरों की सफलता पर खुश हों, उन्हें बधाई दें |
महत्वकांक्षा तो जरुर रक्खें किन्तु अति महत्वकांक्षी न बने |
अपने आत्म विश्वास हमेशा बनाये रक्खें उसको खोएं नहीं |
अपनी प्रतिभा को कम नहीं आकें | हीनता की पर्वर्ति का त्याग करें |
सही काम करने में हिचकिचाए नहीं |
कम्फर्ट जोन अच्छीजगह है, लेकिन हर समय इस जोन मे रहने से किसी को फायदा नहीं मिलता है |
आराम तलब जिन्दगी नहीं जिए, कर्मशील बने |
अपनी गलतियों को मानने से उनसे जीवन का बड़ा सबक सीखने को मिलता है | आप जितनी गलतियाँ करते हैं,जीवन में उतना आगे बड़ते चले जाते हैं |
भावात्मक होकर लिये गये निर्णय कम ही सफल होते हैं |
चीजों की उम्मीद लगाना छोड़ दें |उन्हें हासिल करने के लिये काम करें |
किसी से कोई अपेक्षा नहीं रक्खें और किसी की भी उपेक्षा भी नहीं करें |
आत्मचिंतन करें, आध्यात्मिक इन्सान बने | निरंतर मेडीटेसन का अभ्यास करें |
आपसी सम्बन्धों में गांठ नहीं बांधे,शिकायत करने की प्रवर्ती नहीं रक्खें |
व्यर्थ की टीका-टिप्णी न करें |
मूखों से वादविवाद, तर्क-वितर्क करने से बचे |
अपने आत्मसम्मान से कोई समझोता नहीं करें,स्वाभिमान के साथ जीये |
अपने निकटम परिचीतों एवं स्वजनों की भावनाओं,आवश्यकताओं का ध्यान रक्खें,उनकी अनदेखी नहीं करें |
नकारात्मक सोच/प्रवर्ती नहीं रक्खें, नकारात्मकता आपके जीवन मे चिंताओं का पहाड खड़ा कर देगी एवं आप अपना आत्मविश्वास भी खो देगें |
निराशा/हताशा को त्यागे,आशा रखें, याद रक्खें, जहाँ आशा है वहीं सफलता भी है |
डर के साये में नहीं जीये, डर आदमी की प्रगति/उन्नति में सबसे बड़ी बाधा है |
जीवन मे घटित होने वाली छोटी-मोटी, महत्वहीन बातोँ पर ध्यान नहीं दें, उनकी अनदेखी करें और उन्हें भूल जायें |
सम्बन्धियों/ मित्रो से होने वाले विचार भेद को आपसी वार्तालाप से सुलझायें इन मतभेदों को अपने मन पर हावी नहीं होने दें |
सकारात्मकता को अपनी सोच का अभिन्न अंग बनायें |
छोटी से छोटी बातों में भी अच्छाई को ढूढें |
शक करने की आदत को छोड़े,शक का कोई निदान/इलाज नहीं है |
मधुर वाणी बोलें, कटु शब्दों का प्रयोग कभी नहीं करें, गाली-गलोच कभी भी नहीं करें |
जीवन में घटित अवांचित/ दुर्भाग्यपूर्ण घटनाओं को याद नहीं रक्खें, उन्हें भूल जायें |
भूल जाओ और माफ़ करो की निती को अपनायें |
चिंतित नहीं रहें, चिन्ताओं को अपने आप से कोसों दूर रक्खें क्योंकि चिन्ता आपके व्यकित्त्व को भी हानी पहुचायेगी, आप अपना आत्मविश्वास पुरीतरह से खो देगें,बीमारियों को निमन्त्रण देगें, अस्वस्थ रहगें, याद रक्खें “चिन्ता चिता से भी बुरी होती है,चिन्ता आपके जीवन के हर क्षण को दुखमय बना देगी,सफलता के सारे दरवाजे भी बंद करदेगी |
बुरा नहीं बोलें,बुरा नहीं कहें,बुरा नहीं सुने और बुरा नहीं देखें
दुसरों के कार्यों की आलोचना करने की जगह उनके अच्छे कामों की प्रशंसा करें |
जो जैसा है उसे उसी रूप में स्वीकार करें |
किसी से भी घ्रणा नहीं करें, सबको स्नेह/प्यार दें |
दूसरों के विचारों का भी सम्मान करें, उन्हें आदर दें |
कोई भी काम को अंजाम देने से पूर्व यह निच्चय कर ले कि आपके काम से किसी का अहित तो नहीं होगा |
दूसरों के दुःख-दर्द एवं पीड़ा को समझें, उनकी मदद करें, उनके दुःख-दर्द के निवारण में सहयोग दें |
हर एक व्यक्ति का मुस्करा कर अभिवादन करें | खुद हसें, अन्य को भी ह्सांये |
खुद जियें और अन्य को भी सुखमय जीवन जीने दें |
अपनी असफलताओं के लिये दूसरों को दोष नहीं दें |
डॉ. जे. के. गर्ग

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