
जयपुर, 15 मई। महिला एवं बाल विकास राज्यमंत्री श्रीमती अनिता भदेल ने कहा कि राजस्व लोक अदालतों के जरिए जरूरतमंद लोगों को घर बैठे सस्ता, सुलभ व त्वरित न्याय मिल सकेगा।
प्रभारी मंत्री श्रीमती भदेल शुक्रवार को भीलवाड़ा के कलेक्ट्रेट सभागार में राजस्व लोक अदालत-2015 पर प्रकाशित हैंड बुक के विमोचन समारोह और समीक्षात्मक बैठक में बोल रही थीं। उन्होंने कहा कि न्याय समय पर नहीं मिले तो न्याय नहीं रह जाता। राजस्व मामलों में कई पीढ़ियां निकल जाती हैं। खर्चीली प्रक्रिया, तनाव व समय की बर्बादी से लोग टूट जाते हैं। किसानों की इसी समस्या का निराकरण करने के लिए मुख्यमंत्री श्रीमती वसुंधरा राजे ने कई कल्याणकारी योजनाओं की कड़ी में पहली बार राजस्व लोक अदालतंे ’न्याय आपके द्वार- 2015’ आयोजित करने का निर्णय लेकर लाचार व असहाय लोगों को घर बैठे न्याय सुलभ कराने का निश्चय किया है।
उन्होंने कहा कि राजस्थान में 4 लाख राजस्व मामलें लंबित हैं, जिनके निपटारे के प्रयास राजस्व लोक अदालतों के माध्यम से किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि इसके लिए सबके समन्वित प्रयास की आवश्यकता है। जनप्रतिनिधिगण व अधिकारीगण मिलकर समन्वय के साथ कार्य करें। लोगों की समझाइश करें तथा उन्हें लोक अदालत में मामले निपटाने के लिए प्रेरित करें। लोगों के राजस्व सम्बंधी मामले निपटने से श्रम व समय की बचत होगी जिसका उपयोग राज्य के नवनिर्माण में और कहीं किया जा सकता है। उन्होंने स्वयंसेवी संगठनों व मीडिया से भी सहयोग की अपेक्षा की।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सरकारी मुख्य सचेतक कालूलाल गुर्जर ने कहा कि लोक अदालतो की परंपरा पुरानी रही है। ग्राम चौपालों पर न्याय की परिपाटी बहुत ही अच्छी थी। लोक अदालतंे भी उसी परंपरा का नया स्वरुप है। इनमें फैसले के पश्चात लोगों में आपसी वैमनस्य नहीं रहता। राजीनामे से बाद में भी सम्बंध ठीक रहते है तथा उपरी न्यायालय में जाने की नौबत भी नहीं आती।
कार्यक्रम में जिला कलक्टर डॉ. टीना कुमार, जिला प्रमुख पीरचंद सिंघवी, आसींद विधायक रामलाल गुर्जर, भीलवाड़ा विधायक विट्ठलशंकर अवस्थी ने भी अपने विचार प्रकट किए।