राजनीति जो कहलवाए और करवाए कम है

राजेंद्र हाड़ा
राजेंद्र हाड़ा
नगर निगम का चुनाव परिणाम कुछ भी रहे। किसी का भी बोर्ड बने या कोई भी मेयर बने। भाजपा का एक दावा तो पूरा नहीं हो पाएगा। भाजपा ने इस चुनाव को मिशन 60 का नाम दिया है। यानि वह निगम की सभी साठ सीटों को जीतेगी। ऐसा होना नामुमकिन है। यह सभी को पता है। उन्हें भी जिन्होंने यह नारा रचा या गढ़ा और जिन्होंने अपने भाषणों में इसका दावा किया। लगता है मिशन 60 नारा अजमेर के स्तर पर ही गढ़ा गया। 2013 के अंत में हुए थे विधानसभा चुनाव। उस समय भाजपा ने नारा दिया था मिशन 125 क्योंकि विधानसभा में सदस्य होते हैं 200 और जिसके 101 सदस्य आते हैं वह सरकार बनाने का हकदार होता है। भाजपा का मकसद था कि उसे स्पष्ट बहुमत मिल रहा है और वह कम से कम 125 सीटें हासिल करेगी। हांलाकि मिली मिशन से ज्यादा। केंद्र में भी ऐसा ही हुआ। नारा दिया गया मिशन 272 यानि स्पष्ट बहुमत का आंकड़ा। अजमेर के भाजपाई तो केंद्र और राज्य से भी आगे निकल गए और नारा दिया मिशन 60 जबकि निगम का बहुमत है 31 पार्षद का। मिशन 60 की बात तो इसलिए भी नहीं की जा सकती क्योंकि चुनाव पूरे शहर का है परंतु चुनाव लड़ा जा रहा है उत्तर-दक्षिण के हिसाब से। आरक्षण में भी दखल दिया गया और अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित एक सीट उत्तर में और बाकी 16 दक्षिण में। अनुसूचित जनजाति की एक सीट वह भी दक्षिण में। नीति तो यही रही कि उत्तर विधानसभा में सीटें ज्यादा जीतीं जाएं क्योंकि अनुसूचित जाति का एक बहुसंख्यक मतदाता आज भी कांग्रेस का पल्लू पकड़कर चलता है। इस चक्कर में एक गड़बड़ हो गई। अनुसूचित जाति के मतदाता तो फिर भाजपा को मिल जाते हैं परंतु मुस्लिम मतदाता आज भी भाजपा के नाम से ही बिदकते हैं। उत्तर विधानसभा क्षेत्र में अब तक मुस्लिम क्षेत्र दो वार्डों तक सिमटा था। नए परिसीमन का ऐसा हिसाब किताब बैठा कि दो की जगह चार वार्डों में मुस्लिम मतदाताओं का प्रभाव हो गया। इसके अलावा रातीडांग, चौरसियावास, लोहाखान, कुंदननगर में भी मुस्लिम मतदाता अब प्रभाव डालने की स्थिति में आ गए। एक तरह से चार से आठ सीटों पर मुस्लिम मतदाता इतनी संख्या में हैं जो पिछले निगम चुनावों में नहीं थी। एक खास बात और। मुस्लिम मतदाता आज भी कांग्रेस को अपना खैरख्वाह मानता है परंतु कांग्रेस ने यह सोचकर कि मुसलमान जाएंगे कहां उनकी परवाह ही नहीं की। अजमेर में करीब 3500 सैयद खादिम मतदाता और 1200 शेख खादिम मतदाता है। एक तरह से करीब पांच हजार मतदाता होने के बावजूद कांग्रेस ने एक भी खादिम को टिकट नहीं दिया। इस से भी महत्वपूर्ण तथ्य है कि खादिमों को पूरी तरह उपेक्षित किया गया। दरगाह दीवान सैयद जैनुअल आबेदीन खान ने वार्ड आठ से इमरान सिद्दीकी को, अंजुमन सैयद जादगान के पूर्व सदर गुलाम किबरिया ने वार्ड 10 से वहीउलहसन को और अंजुमन सैयद जादगान के नायब सदर इकबाल अहमद चिश्ती ने सैयद नातिक चिश्ती के लिए टिकट की मांग कांग्रेस से की थी। कांग्रेस ने खादिम समुदाय और दरगाह के इन महत्वपूर्ण लोगों की मांग को ही नजरअंदाज कर दिया। जबकि जो प्रत्याशी सुझाए गए उनमें कुछ तो सेंट एन्सलम्स जैसी प्रतिष्ठित स्कूल के छात्र रह चुके हैं। सचमुच राजनीति जो कर दिखाए कम है। -राजेन्द्र हाड़ा 09829270160

error: Content is protected !!