sohanpal singh2014 के चुनाव में प्रचंड बहुमत से जितने के बाद दक्षिण पंथी विचारो वाली भारतीय जनता पार्टी की अगुवाई में जब श्री नरेंद्र मोदी ने केंद्र में 26 मई 2014 को शार्क देशों के राष्ट्रध्यक्षो के सम्मुख भारत के प्रधान मंत्री के रूप में शपथ ग्रहण की तो बीजेपी समर्थकों के साथ साथ सभी राष्ट्र भक्त भारतियों का सीना फूल कर 56 इंच का हो गया था ? लेकिन शीघ्र ही लोगों को इस बात का एहसास हो गया की यह उनका भ्रम ही था जो कभी पूरा नहीं हो सकता ? क्योंकि नरेंद्र मोदी नाम का व्यक्ति जोहै वह आत्ममुग्ध अरोगेन्स व्यक्तित्व का व्यक्ति केवल इस जुगाड़ में कार्य कर रहा है की अपने आपको विश्व स्तर पर किस प्रकार स्थापित कर सके? लोकतंत्र कस मतलब है राज्य और विकास के कार्यों सभी व्यक्तियों की भागीदारी जो जहाँ भी हो जिस स्तर पर हो ? जैसे शिक्षा में टीचर और क्षात्र , इसी प्रकार विधान सभाओं में पक्ष और विपक्ष ! संसद में सरकार और विपक्षी मिल बैठकर देश हित में कार्य करे ? लेकिन यह हास्यास्पद ही है की राज्य सभा में बहुमत न होने पर बीजेपी और उसके समर्थकों की सोंच बहुत ही संकीर्ण है की हम विपक्ष से समझौता नहीं करेंगे और राज्यों में होने वाले चुनावों में अपनी सरकार बना कर राज्य सभा में बहुमत पा कर फिर अपनी मन मानी करेंगे ? बीजेपी को एक और घमंड अहंकार है की वह देश को कांग्रेस मुक्त करेंगे ? क्या लोक तंत्र में ऐसा संभव है मान भी लो कांग्रेस समाप्त भी हो जाय तो क्या कोई विपक्ष होगा ही नहीं ? इसी प्रकार बिहार चुनाव में भी लगभग यही नारा था की बिहार से लालू यादव को भगाओ! नीतीश को भगाओ ! जाति का कार्ड! आरक्षण गौमाता। और अगड़ा पिछड़ा सभी पर पैर जमाने की भरपूर कोसिस की । लेकिन जिस प्रकार से दिल्ली वासियो ने दोनों गुजरातियों को नकार दिया था? उसी प्रकार से ेबिहारियों ने बिहार से दोनों गुजरातियों को चलता कर दिया है ? अब यह आने वाले समय की बात है की क्या पूरा देस भी ऐसा ही करेगा ?