पर्यावरण संरक्षण की दिशा में बागपत के लोग उत्तर भारत में मिसाल पेश करने जा रहे हैं। उत्तराखंड की लोक परंपरा को अपनाते हुए बाबुल के घर से विदा होने से पहले बेटी पति के साथ घर के आंगन या आसपास एक पौधा रोपेगी। इस पौधे की हिफाजत लड़की के माता-पिता बेटी की तरह करेंगे। कई संस्थाएं और लोग इसका संकल्प ले चुके हैं और अब दूसरों को प्रेरित कर रहे हैं।
उत्तराखंड में खासकर चमोली जनपद में पर्यावरण संरक्षण की दिशा में मैती आंदोलन के तहत बेटियां विदाई से पहले पति के साथ पौधा रोपती हैं। इसका संरक्षण-संवर्द्धन उसके मायके वाले बड़ी ललक के साथ जीवन पर्यत करते हैं। प्रकृति से जीवन की लयबद्धता के इसी बिरले उदाहरण को बागपत ने आत्मसात किया है। चौधरी रमेश चंद ट्रस्ट के चेयरमैन संजीव ढाका, लोक जन चेतना कल्याण समिति के अध्यक्ष देवेंद्र धामा व जन चेतना समिति के अध्यक्ष डॉ. कालूराम चौहान इसे बागपत जिले में शुरू कराने जा रहे हैं। ये संस्थाएं लोगों से संकल्प पत्र ले रही हैं कि शादी के बाद उनकी बेटी एक पौधा लगाकर ही घर से विदा होगी। पत्र पर बेटी और उसके माता-पिता से हस्ताक्षर कराए जा रहे हैं और इस समृद्ध परंपरा को अन्य लोगों तक पहुंचाने का अनुरोध भी। अभी तक 128 परिवार यह संकल्प ले चुके हैं।
डीएम अमृता सोनी का कहना है कि लोगों की यह स्वस्थ सामाजिक पहल पर्यावरण संरक्षण की दिशा में नई इबारत लिखेगी। इस अभियान में सभी संकल्प लें और सहयोग की आहुति डालें तो पर्यावरण की दिशा और दशा दोनों बदल जाएंगी।