मोबाईल कपनियों द्वारा उपभोक्ताओं को नुकसान पहुंचाया जा रहा हैं

रेणु शर्मा
रेणु शर्मा
जयपुर। मोबाईल कपनियों द्वारा विभिन्न तरीकों से घोटाले कर अपने उपभोक्ताओं को नुकसान पहुंचाया जा रहा हैं। इस पूरे घटनाक्र्रम में वोडाफोन , एमटीएस के काले कारनामे सामने आये है। कानूनी जानकारी एंव कागजी कार्यवाही के अभाव के कारण उपभोक्ता इनसे उलझना जरूरी नही समझता लेकिन जो उपभोक्ता अपने इन्टरनेट संपर्को, व्यक्तिगत एंव व्यवसायिक संपर्क रखते है उन्हें क पनियों के कारण भारी आर्थिक और मानसिक नुकसान उठाना पड़ रहा हैं। अकसर ये क पनियंा कानूनी नियमों और अदालत के आदेशों की खुले आम ध्ज्जीयंा उड़ा रही हैं। एमटीएस क पनी नियमों को ताक में रखकर अपने उप ाोक्ताओं को अप्रत्यक्ष रूप से ब्लेकमेल कर रही हैं और उपभोक्ता अपने संपर्को को कायम रखने की मजबूरी के चलते ब्लेकमेलिंग का शिकार हो रहा हैं।
यू करते है ब्लेकमेल- गौरतलब है कि एमटीएस क पनी अपने उपभोक्ता बढाने केे लिये आनन-फानन में मोबाईल और इन्टरनेट कनेक्शन अंावटीत कर देती हैं जब उपभोक्ता एमटीएस क पनी के अपने स पर्क न बर अपने परिचितों को दे देता हैं तो क पनी अपने मनमाने तरीके से उपभोक्ताओं को ब्लेकमेल व प्रताडित करना शुरू कर देती हैं।
बिना किसी पूर्व सूचना या नोटिस के कनेक्शन काट दिया जाता हैं- सूत्रों के अनुसार एमटीएस क पनी द्वारा समय पर मोबाईल और इन्टरनेट का बिल नही दिया जाता और नाहीं उपभोक्ता के न बर पर फोन करके बिल जमा कराने को कहा जाता हैं और समय पर बिल जमाा नहीं होने पर उपभोक्ताओ को बिना पूर्व सूचना या नोटिस के मोबाईल और इन्टरनेट का कनेक्शन काट देती हैं। उपभोक्ता को बिल की कोई जानकारी नही होती मोबाईल और इन्टरनेट के बन्द होने पर ही उसे बिल की मालूम चलता हैं कि बिल जमा नहीं करवाने के कारण उसका कनेक्शन काटा गया हैं।
क्या कहते है नियम- ट्राई के नियमानुसार उपभोक्तातों को बिल ाुगतान की अवधी के कुछ दिन पूर्व उसके घर तक बिल पहुंचाया जाना आवश्यक होता हैं लेकिन क पनी मुनाफे के लालच में ऐसा नहीं करती हैें और उपभोक्ता जागे तक तक उसका कनेक्शन काट जाता हैं।
करोडों की ब्लेकमेलिंग- गौरतलब है कि मोबाईल क पनियों द्वारा कनेक्शन काटा देने के पश्चात उपभोक्ता को कनेक्शन वापस लेना होता हैं इसके लिये क पनी उपभोक्ता से जुर्मानती वसूलती हैं और दुवारा कनेक्शन जोडती हैं। इस तरह देश भर में फेले लाखों उपभोक्ता से क पनी प्रत्येक माह करोडों रूपया वसूल कर रही है। ग्राहक सेवा केन्द्र वालों ने बताया कि बिल जमा करने कि अन्तिम अवधी तक बिल जमा नहीं होता तो ग्राहक को बिल के बारे मे बताया जाता हैं और उसके आठ दिन वाद उपभोक्ता का कनेकशन काट दिया जाता हैं।
कोर्ट के आदेशों की खुले आम ध्ज्जियंा- वोडाफोन मोबाईल क पनी अपने उपभोक्तातों के न बरों पर मनमाने तरीके से स्कीम लागू कर देती है एंव उपभोक्ता द्वारा तय कि गयी लिमीट की राशी को क पनी अपनी मनमर्जी से बढा देती है। कुछ जागरूक उपभोक्ता जब ऐेसे मामलों की शिकायत उपभोक्ता न्यायालय में करते हैं तो क पनी उपभोक्ता न्यायालय द्वारा दिये जाने वाले आदेशों तक की खुले आम ध्ज्जीयंा उड़ा देती हैं। उपभोक्ता न्यायालय में मुकदमा चलने के बाद भी तो वोडाफोन क पनी द्वारा उपभोक्ता का कनेक्शन बन्द करके उसका न बर अन्य व्यक्ति को दे दिया जाता हैं। नियमानुसार उपभोक्ता न्यायालय द्वारा निर्णय आने के पश्चात ही विवादित न बर अन्य व्यक्ति को दिया जाना चाहिये।
वरिष्ठ वकील डॅा सुनील शर्मा ने बताया कि यदी उपभोक्ता कोर्ट के आदेशानुसार बिल जमा करवाता रहता हैं तो क पनी मोबाईल कनेक्शन बन्द नही कर सकती । वोडाफोन के मेनेजर बंसल से पूछा की किसी उपभोक्ता का मोबाईल न बर जिसका केस उपभोक्ता कोर्ट में चल रहा हो उस न बर को किसी स्थिति में अन्य उप ाोक्ता को दिया जाता हैं या नही दिया जाता तो उन्होने कहा कि हमारे शिव असवार से पूछों वही अपको बता सकते हैं , शिव असवार को फोन करके पूछा तो वो कहते है कि हम आपको सूचना बताने के लिये अधिक्ृत नहीं हैं आपको हमारे ऑफिस आना होगा।

Renu Sharma
Editor-Geetanjali Post Newspaper
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