सर्वधर्म प्रार्थना सभा सहित विविध कार्यक्रम आज

bikaner samacharबीकानेर, 01 अक्टूबर। महात्मा गांधी की जयंती पर रविवार को पब्लिक पार्क के बाहर स्थित गांधी पार्क में सुबह आठ बजे सर्वधर्म सभा, प्रार्थना का आयोजन होगा। गांधी जयंती पर शिक्षण, सामाजिक व स्वयं सेवी संस्थाओं की ओर से भी कार्यक्रम आयोजित कर बापू को पुष्पांजलि अर्पित करते हुए नमन किया जाएगा। गांधी जयंती से ही सुबह आठ बजे गंगाशहर पेट्रोल पंप के पास से स्वच्छता का एक माह चलने वाले अभियान शुरू किया जाएगा।
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महात्मा गांधी के आदर्श शाश्वत
राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के सत्य, अहिंसा, सर्वधर्म समभाव, सहिष्णुता के आदर्श हमेशा शाश्वत रहेंगे। अपने उत्कृष्ट कार्यों व देश सेवा से गुजरात के पोरबंदर में 2 अक्टूबर 1869 को जन्में मोहन दास कर्मचंद गांधी ने राष्ट्रपिता का सम्मान प्राप्त किया। उन्होंने हमेशा अहिंसा की बात कही इसलिए प्रत्येक वर्ष 2 अक्टूबर को महात्मा गांधी की जयंती अहिंसा दिवस के रूप में मनाई जाती है।
महात्मा गांधी विभिन्न धर्मांे के प्रति सहिष्णुता का संदेश दिया वे मानवीय गतिविधि को सभी धर्मों का नैतिक आधार तथा मानव जीवन को ईश्वर प्रदत उपहार मानते थे। उन्होंने भारत को जानने के लिए गांवों पर अधिक ध्यान देने की बात कही।
महात्मा गांधी ने स्वदेशी वस्तुओं के महत्व को उजागर करते हुए खादी व कुटीर उद्योगों को बढ़ावा देने की बात कही। उनका मानना था कि ईश्वर हर व्यक्ति में अन्तर्व्याप्त है। ईश्वर को प्राप्त करने का सीधा और सही मार्ग है कि हम ईश्वर की सभी संतानों एवं समग्र प्रकृति से प्रेम और सेवा करें। गांधीजी की आस्था आत्म संयम में थी। वे अपनी उपलब्धियों का श्रेय अपने आत्म संयम एवं संयमित जीवन को देते थे। उनका कहना था कि प्रकृति और धरती माता हमारी मूलभूत आवश्यकताओं की पूर्ति करती है, परन्तु लालच की पूर्ति नहीं कर सकती।
गांधीजी ने हमेशा बुनियादी शिक्षा पर जोर दिया। उनका कहना था कि शिक्षा का लक्ष्य समाज का व्यापक कल्याण करने वाला होना चाहिए। शिक्षा दर्शन के पीछे व्यक्ति का सर्वांगीण विकास होना चाहिए जो व्यष्टि की जगह समष्टि से जोड़ता है। शिक्षा के क्षेत्र में हैड, हार्ट एवं हैड, मस्तिष्क व हाथ का समन्वय करके अपनी कर्मप्रधान, आस्था परक और वैज्ञानिक शिक्षा पद्धति का सूत्रापात किया। वे शिक्षा के स्वावलम्बी गुण के पक्षधर थे। वे आत्मा संबध्ंाी शिक्षा को सच्ची शिक्षा मानते थे, जो छात्रों में देश प्रेम के भाव को जागृत करती हो और स्वाभिमान के साथ जीना सिखाती हो।
गांधीजी शिक्षक पर शिक्षा को देने के साथ-साथ पीढ़ी को संस्कारित करने का अतिरिक्त दायित्व का महत्व मानते थे। उनका कहना था कि भारत के सुदृढ़ भविष्य के लिए भावी पीढ़ी को देश प्रेम भाव व संस्कार युक्त बुनियादी शिक्षा से जोड़ा होगा।
अपनी अद्भूत आध्यात्मिक शक्ति से मानव जीवन के शाश्वत मूल्यों को उद्भाषित करने वाले विश्व इतिहास के महान तथा अमर नायक महात्मा गांधी आजीवन सत्य, अहिंसा, और प्रेम का पथ प्रदर्शित करते रहे थे।
कालजयी युगपुरुष राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने न केवल स्वतंत्रता प्राप्ति के लिए अहिंसक संघर्ष के लिए प्रेरित किया अपितु राष्ट्र की जनता को सार्थक, प्रभावी, शांत, सत्यनिष्ठ एवं अहिंसावादी, स्वच्छता व शुद्धता से जीवन जीने की राह दिखाई।
रामचन्द्र स्वामी
अध्यापक ,
रा.उ.मा.वि. नत्थूसर गेट, बीकानेर

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