सिंधुपति महाराजा दाहरसेन के आदर्श अपनाने का आह्वान

dahersenबीकानेर 16 जून 2017। सिंधी सेंट्रल पंचायत बीकानेर के तत्वावधान में पवनपुरी के नवनिर्मित झूलेलाल मंदिर में सिंध के आखिरी ब्राह्मण महाराजा दाहरसेन का 1305वां बलिदान दिवस मनाया गया। महाराजा दाहरसेन वीर महापराक्रमी गौ तथा मातृशक्ति के रक्षक थे। इन्होंने अपने सिंध राज्य की सीमाओं का विस्तार किया। उस समय बलोचिस्तान भी सिंध में था। महाराजा दाहरसेन खलीफों के मीर कासिम बिन के साथ युद्ध में धोखे से मारे गए और दिनांक 16 जून 712 ई को वीर गति प्राप्त हुए। अत: आत उनका 1305वां बलिदान दिवस मनाया गया। सिंधी समाज के वरिष्ठ अर्जुनदास आवतरामानी, दीनदयाल नंदा, हीरालाल रिझवानी के सान्निध्य में बैनर का लोकार्पण किया गया। पंचायत के लालचंद तुलसियानी और मोहन थानवी ने सिंधुपति महाराजा दाहरसेन की जीवनी पर प्रकाश डाला। उन्होंने महाराजा दाहरसेन के आदर्श अपनाने का आह्वान किया व बताया कि महाराजा की सूर्य परमाल नामक पुत्रियों की वीरता एवं दुश्मनों से बदला लेने तथा तत्कालीन सिंध देश की रानियों-दासियों के जौहर करने के प्रसंग भी अमर हैं। थानवी ने सिंधी बोली व भाषा के बारे में बताते हुए सिरायकी बोली में रचित साहित्य का संरक्षण एवं उसको प्रकाशित करना जरूरी बताया। लीलादेवी वलिरमानी ने सिंधी लोकभजन सुनाए। इस अवसर पर अनिल तुलसियानी ने सिरायकी बोली के प्रचलित मुहावरों व कहावतों के बारे में जानकारी साझा की। महादेव बालानी, लक्ष्मण दास तुलसियानी, जानू ग्वालानी, बाबुलाल, खेमचंद खत्री, हरीश पंजाबी, मोन्टू महाराज, के कुमार आहूजा, घनश्याम लालवानी सहित मौजूद सभी गणमान्यों ने दाहरसेन के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित की।

लालचंद तुलसियानी
सिंधी सेंट्रल पंचायत
9269301694

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