राष्ट्रीय उष्ट्र अनुसंधान केन्द्र का 34 वां स्थापना दिवस आयोजित
बीकानेर, 5 जुलाई 5/7/17। पशुपालक कल्याण बोर्ड अध्यक्ष गोरधन राईका ने कहा कि ऊंटनी का दूध मानव स्वास्थ्य के लिए अत्यन्त उपयोगी है। खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण द्वारा ऊंटनी के दूध को खाद्य पदाथोर्ं की श्रेणी में शामिल किया गया है, जिससे इस व्यवसाय में रोजगार के नये अवसर पैदा होंगे।
राईका बुधवार को राष्ट्रीय उष्ट्र अनुसंधान केन्द्र के 34 वें स्थापना दिवस पर केन्द्र सभागार में आयोजित कार्यक्रम में सम्बोधित कर रहे थे। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार द्वारा पशुपालकों को ऊंटपालन हेतु प्रोत्साहित किया जा रहा है, जिसके सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। साथ ही पशु बीमा के तहत पशुपालकों को राज्य सरकार द्वारा अनुदान भी दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि पशुपालक अपने पशुओं का बीमा अवश्य करवाएं। राईका ने बताया कि जयपुर में ऊंटनी दूध बिक्री के लिए मिनी डेयरी प्लांट लगाए जाने के प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि किसान व पशुपालक एक दूसरे के पूरक हैं। ऊंटनी दूध की गुणवत्ता के विषय में आमजन को अवगत करवाया जाए, जिससे अधिकाधिक लोगों तक इसकी पहुंच हो सके।
मुख्य अतिथि के रूप में महाराजा गंगासिह विश्वविद्यालय के कुलपति भागीरथ सिंह ने कहा कि उष्ट्र अनुसंधान केन्द्र ने गत तीन दशक में उल्लेखनीय सेवाएं प्रदान की हैं। स्थापना दिवस आत्मनिरीक्षण का अवसर होता है, अतः वैज्ञानिकों को नया संकल्प लेकर और आगे बढ़ने का प्रयास करना चाहिए। उन्होंने कहा कि तकनीकी व आर्थिक विकास के कारण ऊंटों की उपयोगिता घटी है, साथ ही बढ़ते शहरीकरण व संयुक्त परिवारों के टूटने से भी ऊंटपालन पर विपरीत प्रभाव पड़ा है। विशिष्ट अतिथि सीमा सुरक्षा बल क्षेत्रीय मुख्यालय के उपमहानिरीक्षक यशवंत सिंह ने कहा कि सीमा सुरक्षा बल में ऊंटों की अहम भूमिका है। उन्होंने सीमावर्ती क्षेत्रों के पशुपालकों में ऊंटों के प्रति रूझान बढ़ाने के लिए सीमा सुरक्षा बल के सहयोग से जागरूकता शिविर लगाए जाने की आवश्यकता जताई।
केन्द्र निदेशक एन वी पाटिल ने संस्थान का प्रगति प्रतिवेदन प्रस्तुत करते हुए कहा कि ऊंटों की संख्या में निरन्तर गिरावट चिंता का विषय है। केन्द्र द्वारा ऊंटनी के दूध की औषधीय उपयोगिता आमजन तक पहुंचाने के लिए विशेष प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि इस दूध से मधुमेह, क्षय रोग, ऑटिज्म आदि के उपचार में उत्साहवर्धक परिणाम सामने आए हैं। केन्द्र द्वारा सरदार पटेल मेडिकल कॉलेज के सहयोग से सांप के जहर के विरूद्ध एंटीविनोम के उत्पादन हेतु अनुसंधान कार्य प्रगति पर है। लोकहित पशुपालक संस्था सादड़ी के निदेशक हनुमंत सिंह राठौड़ ने कहा कि ऊंटों के सम्बन्ध में परम्परागत ज्ञान समाप्त होता जा रहा है, जिसके संरक्षण की जरूरत है।
इससे पूर्व अतिथियों ने अनुसंधान केन्द्र का ऊंटगाडे पर बैठकर अवलोकन किया तथा केन्द्र परिसर में पौधारोपण किया। कार्यक्रम का संचालन हरपाल सिंह ने व प्रधान वैज्ञानिक डॉ. सुमन्त व्यास ने धन्यवाद ज्ञापित किया। स्थापना दिवस के तहत ऊंटनी दूध व्यवसाय की संभावनाओं पर दो तकनीकी सत्र व पशुपालकों से संवाद कार्यक्रम आयोजित किया गया।
– मोहन थानवी