बीकानेर 16 जुलाई । कदाम्बिनी क्लब, बीकानेर द्वारा स्थानीय होटल मरुधर हेरिटेज के विनायक सभागार में हिंदी, राजस्थानी और उर्दू भाषा में किये जाने वाले सृजन पर चर्चा और त्रिभाषा काव्य गोष्टि का आयोजन किया गया । कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए कवि , कथाकार और संस्कृतिकर्मी राजाराम स्वर्णकार ने कहा कि बीकानेर के सृजनकर्मी अपने सृजन से न केवल देश में वरन विदेशों में भी अपनी उपस्थिति दर्ज करा रहे हैं । यहां के कवि देश की स्थिति और समस्याओं के प्रति जागरूक है ये उनके काव्य सृजन में स्पस्ट नज़र आता है । उनके सृजन में चिंतन के तत्व मौजूद है । इस अवसर पर श्री स्वर्णकार ने शब्द आधारित अपनी कविता ‘मैं और मेरे शब्द दो तन एक मन’ भी सुनाई ।
कार्यक्रम के शुरू में विषय प्रवर्तन करते हुए क्लब के संयोजक डॉ अजय जोशी ने कहा कि बीकानेर साहित्य की दृष्टि से छोटी कशी है यहा की गंगा जमुनी संस्कृति है इसलिए यहा राष्ट्र भाषा हिंदी मायड़ भासा राजस्थानी और उर्दू में निरन्तर सभी विधाओं में सृजन होता रहा है । यहां का सृजन बहुआयामी है।
कार्यक्रम समन्वयक डॉ रेणुका व्यास नीलम ने कहा कि यहां के साहित्यकार सामजिक सरोकर रखते हैं । उन्होंने सामजिक विडम्बनाओं पर आधारित रचना प्रस्तुत की । कार्यक्रम में इंजीनियर निर्मल शर्मा ने अपना गीत ‘मैं जिंदगी को ढूंढता रहा’ प्रस्तुत किया । वरिष्ठ साहित्कार डॉ उषाकिरण सोनी ने भारत मेरा महान शीर्षक की कविता प्रस्तुत की । श्री नरसिंह भाटी नीशू ने आतंकवाद को समाप्त करने के लिए प्रभावी उपाय करने की जरुरत पर बल देने वाली अपनी कविता सुनाई । इस अवसर पर डॉ नरसिंह बिन्नाणी, डॉ संजू श्रीमाली, नगेन्द्र किराडू, बीड़ी हर्ष, शिक्षविद मोहनलाल जांगिड़, असद अली असद, डॉ कृष्ण आचार्य, कृष्णा वर्मा, डॉ प्रकाश चंद्र वर्मा, सोनू लोहमरोड, पूनम चंद गोदारा, तुलसी राम मोदी, व्यवसायी हेमचंद बांठिया, मुनीन्द्र अग्निहोत्री आदि ने बीकानेर के सृजन सरोकारों पर चर्चा की और अपनी काव्य रचनाएं प्रस्तुत की । कार्यक्रम का संचालन डॉ रेणुका व्यास ने किया । आभार ज्ञापन क्लब के सह संयोजक डॉ नरसिंह बिन्नाणी ने किया।
डॉ अजय जोशी
संयोजक
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