श्वानों में इलेक्ट्रोरेटिनोग्राफी शल्य चिकित्सा में बनी पहचान

bikaner samacharवेटरनरी विश्वविद्यालय के सर्जरी एवं रेडियोलॉजी विभाग में डिमस्का सेन्टर के वैज्ञानिकों ने श्वानों के नेत्रा संबंधी रोगों के निदान और आधुनिक शल्य क्रिया में उन्नत उपकरणों के उपयोग से देश में एक अलग पहचान बनाने में सफलता हासिल की है। राजुवास में डिमस्का केन्द्र के सहप्रमुख अन्वेषक और नेत्रा रोग विशेषज्ञ डॉ. सुरेश कुमार झीरवाल द्वारा 14-15 जुलाई को चैन्नई, तनुवास में श्वानों में इलेक्ट्रोरेटिनोग्राफी के उपयोग पर आयोजित राष्ट्रीय कार्यशाला में पेपर प्रस्तुत किया गया। केन्द्र के प्रमुख अन्वेषक डॉ. प्रवीण बिश्नोई ने बताया कि राजुवास में श्वानों की शल्य क्रिया की संम्पूर्ण जांच के लिए टोनोमेट्री और इलेक्ट्रोरेटिनोग्राफी का उपयोग किया जा रहा है। श्वानों की नेत्रा शल्य क्रिया चिकित्सा की इ.आर.जी. में यह देश का दूसरा प्रमुख केन्द्र है। राजुवास के शल्य चिकित्सा विशेषज्ञ प्रो. टी.के. गहलोत ने बताया कि विश्वविद्यालय के केन्द्र द्वारा श्वानों की नेत्रा शल्य चिकित्सा में बढ़त का लाभ अन्य संस्थानों के वैज्ञानिकों को भी मिलेगा।

——– मोहन थानवी

error: Content is protected !!