जोधपुर, चौपासनी रोड स्थित जूना खेड़ापति बालाजी मन्दिर में चल रही भागवत कथा में छठे दिन गुरुवार को कथा वाचक कृश्ण मुरारी जी ने रास महारास, कंस वध, उद्धव चरित्र, रुकमणी विवाह का प्रसंग बताते हुए कृश्ण मुरारी जी ने बताया कि भगवान से गोपीयॉ बहुत प्यार करती थी हम संसार से प्रेम करते है संसार वाले हमें धोखा व षिकायत के अलावा कुछ नहीं देते। हम सच्चे मन से भगवान से ही प्रेम करें तो हमारा जीवन सफल हो जाये। गोपी का मतलब गो का अर्थ इन्द्रीया व पी का अर्थ पीना है वही गोपी है। हम गोपी बने कृश्ण से प्रेम करें यही जीवन है जोषी जी व प्रियाजी के संगीतमय भजनों को सुनकर भक्त आनन्द विभोर हो रहे है कल सुदामा की कथा के साथ कथा का विराम होगा।
जेठानन्द लालवानी, नारायण खटवाणी 9460601155