रिक्शा चलाने और कूड़ा उठाने वालों का भी होगा स्वास्थ्य बीमा

अगला चुनाव भले ही दूर हो, लेकिन सरकार ने खुद को चाक-चौबंद करना शुरू कर दिया है। शायद यही वजह है कि उसे गली-मुहल्लों में कूड़ा उठाने वालों की भी सेहत ठीक रखने का खयाल आया है। महज तीस रुपये में साल भर में तीस हजार रुपये तक के इलाज के लिए सरकार उनका स्वास्थ्य बीमा कराएगी। सरकार ने टैक्सी, ऑटो और रिक्शा चालकों का भी स्वास्थ्य बीमा कराने की कोशिशें तेज कर दी हैं। बस, केंद्रीय कैबिनेट की हरी झंडी का इंतजार है।

सूत्रों के मुताबिक टैक्सी, ऑटो और रिक्शा चालकों का स्वास्थ्य बीमा तो बीते साल भर से सरकार के एजेंडे पर था, लेकिन कूड़ा उठाने और बीनने वाले भी अब उसकी प्राथमिकता में शामिल हो गए हैं। कूड़ा उठाने या बीनने वालों को राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना की तरह लाभ मिलेगा। इसमें गरीबी रेखा के नीचे [बीपीएल] के परिवारों को 30 रुपये के स्मार्ट कार्ड से सालभर में 30 हजार रुपये तक के कैशलेस इलाज की सुविधा है। रिक्शा चालकों के लिए स्वास्थ्य बीमा के मामले में भी यही फार्मूला अपनाया जाएगा। एक अनुमान के मुताबिक देश में 14 लाख से अधिक रिक्शा चालक हैं।

कूड़ा उठाने या बीनने वालों की पहचान का जिम्मा जिला प्रशासन का होगा। स्वास्थ्य बीमा 18 साल से ऊपर वालों का ही होगा। प्रमाण के तौर पर उन्हें मुहल्ला कमेटी, आवासीय समिति, व्यावसायिक कांप्लेक्स, होटल या कंपनी से कूड़ा उठाने के करार पत्र की कॉपी देना होगा। या फिर सोसाइटी, ट्रेड यूनियन, कंपनी अथवा सहकारिता अधिनियम के तहत बने किसी संगठन की सदस्यता का दस्तावेज भी दिया जा सकता है। सरकारी आंकड़ों में देश में 12 लाख से अधिक कूड़ा उठाने और बीनने वाले हैं।

टैक्सी ड्राइवरों और ऑटो चालकों को भी राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना की सुविधा देने की तैयारी है। लेकिन, उन्हें बीमा प्रीमियम की आधी राशि देनी होगी। बाकी आधी राशि केंद्र और राज्य 25-25 फीसद के अनुपात में वहन करेंगे। खदानों में काम करने वाले असंगठित क्षेत्र के करीब 18 लाख कामगारों को भी इसमें शामिल करने की योजना है। उनके प्रीमियम का राष्ट्रीय सामाजिक सुरक्षा कोष से भुगतान किए जाने का प्रस्ताव है।

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